क्रिप्टोकरेंसी का ड्रग्स कनेक्शन: संसदीय समिति ने जताई चिंता, साइबर विंग बनाने की सिफारिश
नई दिल्ली, 11 दिसम्बर। गृह मामलों की संसदीय समिति ने ड्रग्स की खरीद-फरोख्त में डिजिटल करेंसी और डार्कनेट के उपयोग पर चिंता जताई है। पैनल की ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित करने के लिए विधेयक लाने की योजना बना रही है।

डार्कनेट मार्केट ई-कॉमर्स साइट हैं जिन्हें नियमित सर्च इंजन की पहुंच से बाहर रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इन वेबसाइट का अवैध लेनदेन और व्यापार के लिए इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इसपर खरीदार और बेचने वाले की पहचान काफी हद तक गुप्त रहती है।
साइबर विंग बनाने की सिफारिश
शुक्रवार को पेश की गई एक रिपोर्ट में सांसद आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली समिति ने गृह मंत्रालय को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के तहत एक साइबर विंग स्थापित करने की सिफारिश की है। इसमें कहा गया है कि क्रिप्टोकरेंसी और डार्कनेट के माध्यम से नशीली दवाओं की तस्करी की प्रभावी पहचान और जांच के लिए एक साइबर विंग स्थापित की जाए।
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा "समिति देश में मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा उठाए गए कदमों को नोट करती है। समिति नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए क्रिप्टोकरेंसी और "डार्कनेट" के बढ़ते उपयोग के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करती है। इसके अलावा, नशीली दवाओं के तस्करों द्वारा गुमनामी बनाए रखने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया जा रहा है, जिससे ड्रग्स की आवाजाही को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।"
समिति ने अपनी सिफारिश में आगे कहा "गृह मंत्रालय और एनसीबी को जल्द से जल्द क्रिप्टोकरेंसी और डार्कनेट से जुड़े मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों की प्रभावी पहचान और जांच के लिए इंटेलिजेंस फ्यूजन सेंटर के साथ एक साइबर विंग स्थापित करने की सलाह दी जाती है। इस संबंध में हुई प्रगति के बारे में समिति को अवगत कराया जाए।"
गृह मंत्रालय ने अपने जवाब में इस संबंध में सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से समिति को अवगत कराया। गृह मंत्रालय ने अपने जवाब में बताया कि "एक समर्पित साइबर-विंग की स्थापना सहित एनसीबी के पुनर्गठन और विस्तार का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) के परामर्श से गृह मंत्रालय के विचाराधीन है।"
क्रिप्टोकरेंसी बिल ला रही है सरकार
वर्तमान में चल रहे शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विधेयक, 2021 को पेश करने की तैयारी कर रही है।
लोकसभा की वेबसाइट पर उपलब्ध विवरण के अनुसार इस बिल के जरिए सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का क्रिप्टो करेंसी जारी करने के लिए फ्रेमवर्क तैयार कर रही है। सरकार इस बिल में ऐसा प्रावधान लाने की तैयारी में है जिसके बाद भारत में निजी क्रिप्टो प्रतिबंद्धित हो जाएंगे। कहा जा रहा है कि सरकार इसकी टेक्नोलॉजी और इस्तेमाल को प्रमोट करने के लिए कुछ विकल्प रख सकती है।
सरकार ने इसे लेकर अहम क्रिप्टो एक्सचेंजों के साथ महत्वपूर्ण बैठक भी की थी। मीडिया रिपोर्ट में इस बैठक के हवाले से कहा गया था कि सरकार इस बात को समझती है कि क्रिप्टोकरेंसी को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके लिए नियमावली बनाना भी बहुत जरूरी है। वर्तमान में देश में क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग पर कोई विनियमन या कोई प्रतिबंध नहीं है।
निजी डिजिटल मुद्राओं और क्रिप्टोकरेंसी ने पिछले एक दशक में लोकप्रियता हासिल की है। लेकिन दुनिया भर के नियामक और सरकारें इन मुद्राओं को लेकर संशय में हैं और इससे जुड़े जोखिमों को लेकर आशंकित हैं।












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