पाक सेना नहीं चाहती भारत के साथ कोई भी बातचीत हो
नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ 23 और 24 अगस्त को होने वाली नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर यानी एनएसए स्तर की वार्ता मुश्किल में पड़ती नजर आ रही है। अब सवाल सिर्फ इस बात का है कि भारत और पाकिस्तान दोनों में से कौन इस वार्ता को कैंसिल करेगा। पिछले 48 घंटों में जो कुछ भी हो रहा है उससे तो यही लगता है कि दोनों में से कोई भी पक्ष अब बातचीत के लिए तैयार नहीं है।

जहां तक वार्ता को कैंसिल करने का सवाल है तो पिछले कई दिनों से पाक की ओर से इस तरह के इशारे किए जा रहे हैं कि भारत इस वार्ता को कैंसिल कर दे। इसलिए ही पाक उच्चायोग की ओर से अलगावादियों को मिलने का न्यौता दिया गया।
भारत इस बात को लेकर पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है कि पाक को अलगाववादियों से बात नहीं करनी चाहिए।
दोनों में से कोई भी पक्ष पहले झुकना नहीं चाहता है और अगले पक्ष की ओर से आने वाली ना का इंतजार कर रहे हैं। पाक विदेश मंत्रालय की ओर से आए एक बयान को पाक के न्यूजपेपर ट्रिब्यून ने छापा है। इसमें लिखा है कि यह दूसरी बार है जब भारत बातचीत के अपने फैसले से पीछे हटा है।
पाकिस्तान में एक वर्ग ऐसा भी है जो नहीं चाहता है कि दोनों देशों के बीच बातचीत हो। पाक में सेना और आईएसआई दोनों देशों की बातचीत के खिलाफ है। जैसे ही बातचीत की संभावना बनती है दोनों पक्ष इसके खिलाफ माहौल तैयार करने लगते हैं।
पाक की सेना ने यह साफ कर दिया है कि कश्मीर पर हर हाल में बातचीत होनी ही चाहिए। इस्लामाबाद में जो मीटिंग हुई थी जिसमें प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी मौजूद थे उसमें सेना प्रमुख राहील शरीफ भी थे।
उसी मीटिंग में यह फैसला हुआ कि कश्मीर मुद्दे को बातचीत के केंद्र में रखा जाए और सभी द्विपक्षीय मुद्दें इसमें शामिल होने चाहिए।
फिलहाल अब रविवार और सोमवार को क्या होगा यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन यह साफ है कि इस बार दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पहले ही काफी रोचक हो गई है।












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