आतंकियों को स्मगलर बता कर किया जा रहा कोस्ट गार्ड का अपमान
नई दिल्ली। पोरबंदर में 31 दिसंबर को जो कराची के केती बंदर से जो नाव आई थी, उसमें आतंकी थे या फिर स्मगलर्स, इसे लेकर देश में एक नया विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी जो 26/11 के समय केंद्र की सत्ता संभाल रही थी, उसने तो यहां तक बयान दे डाला है कि हो सकता है कि पाक से आने वाली नाव में आतंकी न हो बल्कि स्मगलर हों। इस बयान के साथ ही कांग्रेस उस कोस्ट गार्ड का अपमान करने से भी नहीं चूकी जिसने देश को एक बड़े खतरे से समय रहते बचा लिया। फिलहाल इस घटना से जुड़ा जो वीडियो आया है उसकी जांच डिफेंस लैब में चल रही है और जो भी बातें सही होंगी वह सिर्फ इस जांच के पूरा होने के बाद ही सामने आ पाएंगी।

पाक की पुरानी आदत
- इस पूरी घटना के बाद से ही लोग इसे आतंकवाद या फिर स्मगलिंग के नजरिए से देखने लगे हैं।
- दोनों ही तरह की गतिविधियों से देश को नुकसान होता है।
- पोरबंदर में जो कुछ हुआ उसके बाद से साफ है कि समंदर के जरिए स्मगलर्स हथियार और गोला बारूद ड्राप करते हैं।
- 1993 के मुंबई ब्लास्ट के समय भी इस तरह से देश में दाऊद ने स्मगलिंग का रास्ता बनाकर ब्लास्ट के लिए हथियार देश में पहुंचाए थे।
- इस पूरे एपिसोड में जो संकेत मिल रहे हैं उससे कहीं न कहीं इसी बात का अंदाजा लगाया जा सकता है आतंकी पोरबंदर के नेवी बेस को निशाना बनाने आए थे।
- वहीं जो दूसरा एंगल जो जांच में सामने आ रहा है उससे लगता है कि आतंकी नाव के जरिए हथियारों को ड्रॉप करने आए थे जिन्हें बाद में किसी और को हासिल करना था।
- पाक हमेशा से ही कई बार एजेंसियों का ध्यान भटकाने के लिए डमी नावों को भेज चुका है।
- इन नावों के जरिए कभी डीजल तो कभी ड्रग्स की स्मगलिंग को अंजाम दिया जाता है।
- कई बार इस तरह की बातें सामने आई हैं कि पाक इस तरह के हथकंडों को अपनाकर एजेंसियों का ध्यान भटकाने की कोशिश करता रहा है।
तारीफ के काबिल कोस्ट गार्ड
विशेषज्ञों की मानें तो आतंरिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर देश को जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी होगी। 26/11 की घटना जब हुई तो उस समय कोस्ट गार्ड को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। कोस्ट गार्ड पर आरोप लगे थे कि उसकी लापरवाही का नतीजा था कि आतंकी समंदर के रास्ते मुंबई में दाखिल हो गए थे।
इस हमले के बाद नेवी ने भी खुद को एक अलग ही अंदाज में तैयार किया और फिर पाक की ओर से आनी वाली हर नाव को आतंकी या फिर जेहादी खतरे के तौर पर ही देखा। नेवी पाक की हर गतिविधियों पर करीब से नजर रख रही है और किसी भी तरह के मामले को हल्के में नहीं लेना चाहती है।
जब कभी भी कोस्ट गार्ड को संदिग्ध गतिविधियों के बारे में पता चलता है तो उसकी पहली कोशिश होती है कि वह इसे तुरंत रोके। पोरबंदर वाले मामले में कोस्ट गार्ड ने सबकुछ किया जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि नाव में सवार चार लोग आत्मसमर्पण कर सकें और उनकी जांच हो सके।
विशेषज्ञों की मानें तो गहरे समंदर के बीच इस तरह के ऑपरेशन को चलाना काफी मुश्किल होता है। रॉ के पूर्व अधिकारी वी बालाचंद्रन की मानें तो इन स्थितियों में कोस्ट गार्ड ने जो कुछ भी किया वह वाकई तारीफ के काबिल है।
फिर से आलोचना का शिकार
वहीं कोस्ट गार्ड की मानें तो कभी-कभी उनके काम को वह सराहना नहीं मिलती जो मिलनी चाहिए। 26/11 के हमले के बाद उनकी खूब आलोचना हुई थी और अब जबकि पोरबंदर में उन्होंने दुश्मन की नाव को खत्म कर डाला तो भी उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पोरबंदर में हुई घटना के बाद साफ हो गया है कि कोस्ट गार्ड किस हद तक चौकस है और अपनी ड्यूटी को कितनी बेहतरी से अंजाम दे रही है। कोस्ट गार्ड ने जिस ऑपरेशन के बाद बहादुरी से दुश्मन को खत्म कर डाला है तो भी उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।












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