पद्मावती विवाद: संसदीय पैनल के 2 भाजपा और एक शिवसेना सदस्य की फिल्म पर बैन की मांग
नई दिल्ली। फिल्म 'पद्मावती' की रिलीज के लिए फिल्म के बीच निर्देशक संजय लीला भंसाली और सेंसर बोर्ड के प्रमुख प्रसून जोशी गुरुवार को संसदीय पैनल के सामने पेश हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, 14 सदस्यीय इस कमेटी में से 8 सदस्य इस दौरान मौजूद रहे। कमेटी के दो भाजपा सदस्यों ने फिल्म पर बैन की मांग की, वहीं शिवसेना के सदस्य ने बैन का समर्थन किया। वहीं कमेटी के दूसरे सदस्यों ने फिल्म को बिना देखे और सेंसर बोर्ड के फिल्म को मंजूरी मिलने से पहले बैन को गलत कहा।

प्रोमो भी वापस लेने की मांग
भाजपा-शिवसेना के जिन तीन सदस्यों ने फिल्म को बैन करने की मांग की है। उनमें भाजपा के ओम बिडला और सीपी जोशी हैं। वहीं इनका समर्थन करने वाले शिवसेना के राजन विचारे हैं। इन तीन सदस्यों ने फिल्म का प्रोमो भी वापस लेने की मांग की। चित्तौड़गढ से भाजपा सांसद सीपी जोशी ने कहा, हमने पद्मावती फिल्म पर प्रतिबंध की मांग की है, क्योंकि इस फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है। सेंसर बोर्ड ने फिल्म के प्रोमों को पास किया लेकिन उस प्रोमों में घूमर डांस दिखाया है जिस पर आपत्ति है। हमने ये बात भी कमिटी के सामने रखी।

प्रसून जोशी ने कहा- मैंने फिल्म नहीं देखी
संसदीय कमेटी के सामने प्रसून जोशी ने कहा कि अभी फिल्म पर फैसला लेने की प्रक्रिया चल रही है, केवल फिल्म के प्रोमो को इजाजत मिली है, फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पास नहीं किया है। संसदीय कमेटी के सामने प्रसून जोशी ने कहा कि उन्होंने अभी तक फिल्म नहीं देखी है। फिल्म को पहले रीजनल कमेटी देखेगी और फिर सेंट्रल कमेटी। सेंसर बोर्ड पहले एक्सपर्ट्स की राय लेगा फिर किसी नतीजे पर पहुंचेगा।

संजय लीला भंसाली की सफाई
संसदीय कमेटी के सामने अपनी बात रखने के बाद पद्मावती के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं की है। उन्होंने कहा कि मेरी फिल्म पद्मावती की कहानी इतिहास पर आधारित नहीं है. यह मलिक मोहम्मद जायसी के अवधि में 'पद्मावत' नाम से रचे महाकाव्य के किरदार रानी पद्मिनी की कहानी है।












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