पी चिदंबरम का दावा- तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण पिछली UPA सरकार की कूटनीति का नतीजा, मोदी सरकार ले रही श्रेय
Tahawwur Rana Extradition: मुंबई आतंकी हमलों में मुख्य आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) को भारत लाया जा चुका है। आतंकी तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण लगातार सुर्खियां बना हुआ है। मुंबई आतंकी हमले के लगभग 17 साल बाद तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को मोदी सरकार की कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है।
लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने राणा के प्रत्यर्पण का श्रेय मोदी सरकार नहीं पूर्व की यूपीए सरकार को दिया है। यूपीए कार्यकाल के दौरान गृह मंत्री रहे चिदंबरम ने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रत्यर्पण कांग्रेस के प्रतिनिधित्व वाली यूपीए सरकार के समय में अमेरिका के सहयोग से एक दशक से अधिक समय तक किए गए लगातार प्रयासों का परिणाम है।

पी चिदंबरम ने कहा प्रत्यर्पण की सफलता का श्रेय नरेंद्र मोदी प्रशासन को नहीं दिया जा सकता, बल्कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार द्वारा की गई आधारभूत कूटनीतिक, कानूनी और खुफिया प्रयास को दिया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि 26 नवंबर, 2008 को दस पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुंबई में हमले कर तबाही मचाई थी, जिसमें 166 लोग मारे गए थे। मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली के करीबी मददगार पाकिस्तान में जन्मे कनाडाई नागरिक राणा को अमेरिका ने भारत को प्रत्यर्पण किया है, क्योंकि वहां के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतिम अपील खारिज कर दी थी।
चिदंबरम ने बताया कि तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण अचानक हुई सफलता नहीं थी, बल्कि यूपीए सरकार द्वारा शुरू किए गए वर्षों के कूटनीतिक और कानूनी प्रयासों का परिणाम है। चिदंबरम ने यूपीए सरकार द्वारा की गई कूटनीतिक रणनीति और कानूनी कार्रवाइयों के बारे में चर्चा की जिसकी शुरूआत 11 नवंबर, 2009 से हुई, जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने राणा और 26/11 हमलों में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
चिंतबरम ने बताया कि यूपीएम सरकार की बदौलत अंतराष्ट्रीय सहयोग की मदद से 2009 में शिकागो में राणा की गिरफ्तारी के साथ ये शुरू हुआ था, जब कोपेनहेगन में लश्कर की एक असफल साजिश का समर्थन करने के लिए एफबीआई ने राणा को गिरफ्तार किया था।
मुंबई हमलों में प्रत्यक्ष संलिप्तता के लिए 2011 में एक अमेरिकी अदालत द्वारा राणा को बरी किए जाने के बावजूद, उसे अन्य आतंकवाद-संबंधी आरोपों में 14 साल की सजा सुनाई गई थी। बरी किए जाने से विचलित हुए बिना यूपीए सरकार ने कूटनीतिक चैनलों और कानूनी तंत्रों के माध्यम से न्याय के लिए दबाव बनाना जारी रखा।
चिदंबरम ने इसके बाद की कानूनी प्रक्रियाओं का भी ब्यौरा दिया, जिसमें 2011 में अमेरिका में हेडली से एनआईए टीम की पूछताछ और महत्वपूर्ण साक्ष्यों का हस्तांतरण शामिल था, जिसके कारण आरोपी के लिए गैर-जमानती वारंट और इंटरपोल रेड नोटिस जारी किए गए।
उन्होंने बताया कूटनीतिक प्रयासों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय चर्चा हुई, जिसके परिणामस्वरूप 2013 में हेडली को सजा सुनाई गई और अबू जुंदाल के खिलाफ मामले में एक सरकारी गवाह के रूप में भारतीय अधिकारियों के साथ उसका सहयोग हुआ। चिदंबरम के अनुसार, ये प्रयास 26/11 हमलों के अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए यूपीए सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है।












Click it and Unblock the Notifications