किसान नेताओं ने ली ट्रैक्टर हिंसा की नैतिक जिम्मेदारी, रद्द किया 1 फरवरी को होने वाला संसद मार्च
नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों के उग्र आंदोलन की चौतरफा आलोचना हो रही है। दिल्ली पुलिस ने कई किसान नेताओं पर मुकदमा दर्ज किया है। इसके बाद बुधवार को किसान नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेताओं ने हिंसा की नैतिक जिम्मेदारी ली और आम बजट (1 फरवरी) वाले दिन प्रस्तावित संसद मार्च स्थगित कर दिया है। सिंघु बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए किसान नेताओं ने दिल्ली हिंसा की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि किसान संगठनों ने 1 फरवरी का संसद मार्च स्थगित कर दिया है।
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किसान नेता दर्शन पाल ने कहा कि 30 जनवरी को देश भर में आम सभाएं व भूख हड़ताल आयोजित की जाएंगी, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। ट्रैक्टर रैली सरकारी साजिश से प्रभावित हुयी। एक फरवरी को बजट पेश किए जाने के दिन संसद मार्च की योजना रद्द कर दी गयी है। किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुयी हिंसा पर स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि लाल किला की घटना पर हमें खेद है और हम इसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं।
अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि किसान आंदोलन को पहले दिन से ही बदनाम करना शुरू किया गया। 70 करोड़ किसान जो मेहनत कर देश को अन्न देता है वह देशद्रोही है, इस तरह देशद्रोही बोलने की हिम्मत किसकी होती है, जो देशद्रोही होता है, वही किसानों को देशद्रोही बोलते हैं।












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