तीन नए प्रस्तावित क्रिमिनल लॉ बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में विपक्ष
लोकसभा में तीन नए क्रिमिनल लॉ बिल को पास कर दिया गया है। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने इन तीनों नए बिल में संभावित बदलाव की बात कही है और इसमे खामी की बात कही है। यही वजह है कि विपक्ष इन तीनों ने बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रहा है।
विपक्षी सदस्यों का कहना है कि दोनों सदनों में बिल के पास हो जाने के बाद राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर सकते हैं। मंगलवार को इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद इस मसले पर चर्चा हुई।

मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर आयोजित इस बैठक में तीनों नए बिल पर चर्चा हुई। इस दौरान नेताओं में यह सहमति बनी कि अगर तीनों बिल पास होते हैं तो इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।
टीएमसी सांसद सौगत राय ने कहा कि हमने बिल पर चर्चा की है, जिसमे तय हुआ कि इसमे खामी है, लिहाजा इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। भारतीय सांख्य बिल, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता को ध्वनि मत से लोकसभा में बुधवार को पास कर दिया गया।
इस बिल को ऐसे समय पास किया गया जब लोकसभा 51 और राज्यसभा के 47 सांसद निलंबित हैं। इन तीनों बिल को पहले से मौजूद कानून आईपीसी, सीआरपीसी और इविडेंस एक्ट की जगह लाया जा रहा है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि नए कोड में कई तरह के प्रावधान किए गए हैं। इसमे यह प्रस्ताव है कि यह एसपी स्तर के अधिकारी तय करेंगे कि किसी मामले में आतंक विरोधी कौन सी धाराएं लगेंगी। इसमे यह गाइडलाइन नहीं है कि किस आधार पर दो कानूनों में से एक को तय किया जाएगा।
सिंघवी ने कहा कि इन लोगों ने इसी तरह की चीज अपराध के कानून में भी की है। महाराष्ट्र में मकोका है राजस्थान में रकोका है, नए कानून में फिर से दो तरह के कानून हैं। गौर करने वाली बात है कि नए कानून में मॉब लिंचिंग के लिए फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है।












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