Opinion: तेलंगाना के लोगों के लिए चमत्कार है T वॉलेट, G20 देशों ने भी सराहा
तेलंगाना में टी वॉलेट की शुरुआत करना केसीआर सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि रही है। इसके करीब 14 लाख सब्सक्राइबर हो चुके हैं। जी20 के आर्थिक सम्मेलन में सदस्य देशों ने इसकी खूब तारीफ की है।

तेलंगाना ने आईटी और लाइफ साइंस के अलावा अब इनोवेशन के क्षेत्र में भी दुनिया में उदाहरण पेश किया है। तेलंगाना डिजिटल वॉलेट बनाने वाला देश का पहला राज्य है। तेलंगाना सरकार की ओर से बनाए गए देश के इस पहले डिजिटल वॉलेट को लेकर राज्य को जी20 कॉन्फ्रेंस में भी चौतरफा सराहना मिली है। तेलंगाना को इसके माध्यम से ऑनलाइन सेवा गांवों तक पहुंचाने में मदद मिली है। राज्य में कल्याणकारी योजनाओं के तहत लाभार्थियों को इसी वॉलेट के जरिए पैसे उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। यह वॉलेट कई तरह की पेमेंट के लिए उपयोगी है, जिसे लोग आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। इस एक डिजिटल वॉलेट में 1,169 तरह की सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। 2017 में लॉन्च हुए इस वॉलेट के अब करीब 14 लाख सब्सक्राइबर हो चुके हैं और इसके माध्यम से 3.5 करोड़ ट्रांजैक्शन भी पूरे किए जा चुके हैं।

तेलंगाना में जबर्दस्त लोकप्रिय है टी वॉलेट
टी वॉलेट के नाम वाली इस डिजिटल पेमेंट नेटवर्क की लोकप्रियता प्रदेश में जबर्दस्त तरीके से बढ़ी है। तेलंगाना सरकार ने इस वॉलेट की शुरुआत इसलिए की थी, ताकि राज्य में कोई भी, किसी भी समय, कहीं से भी डिजिटल भुगतान कर सके। बड़ी बात ये है कि राज्य के मंत्री केटी रमा राव के द्वारा लॉन्च की गई इस टी वॉलेट का ग्रामीण इलाकों में भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। आज यूपीआई पेमेंट के विकल्पों की कोई कमी नहीं है, लेकिन फिर भी तेलंगाना में इस वॉलेट की लोकप्रियता इस वजह से है, क्योंकि यह एक सरकारी ऐप है, जिसे राज्य सरकार चलाती है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिससे कई संस्थाओं की भुगतान सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सके। नोटबंदी के बाद टी-वॉलेट लॉन्च करने का मकसद डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना था, जो कि आज की तारीख में सरकारी योजनाओं की भुगतान का मुख्य जरिया बन चुका है। राशन की दुकानों में भी टी वॉलेट का इस्तेमाल हो रहा है।

टी वॉलेट के 13.9 लाख सब्सक्राइबर
आज टी वॉलेट के माध्यम से ऑनलाइन सर्विस तेलंगाना के गांवों में भी सुलभ हो सकी है। सरकारी योजनाओं के पैसे लाभार्थियों को सिर्फ टी वॉलेट के माध्यम से ही दिए जा रहे हैं। खासकर स्त्रीनिधि लोन। सहायता पेंशन की राशि भी इसी के माध्यम से दी जाती है। यही नहीं जन-सुविधाओं को भी इसी वैलेट से जोड़ दिया गया है। लेकिन, जहां तक इसके इस्तेमाल में सुरक्षा की बात है तो उसके लिए सभा आवश्यक सावधानियां बरती गई हैं। QR कोड स्कैन करके या कार्ड स्वाइप करके भुगतान किया जा सकता है। स्टूडेंट को स्कॉलरशिप भी टी वॉलेट के माध्यम से ही दिए जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने छात्र-छात्राओं को तेलंगाना में विभिन्न मीसेवा केंद्रों पर बैंक अकाउंट की जगह वॉलेट के माध्यम से ही कैश निकालने की अनुमति दी है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि राज्य में टी वॉलेट के 13.9 लाख सब्सक्राइबर हो चुके हैं और इसके जरिए 3.5 करोड़ लेन-देन भी किए जा चुके हैं।

डिजिटल सेक्टर में केस स्टडी की तरह है टी वॉलेट- एक्सपर्ट
हैदराबाद में आयोजित जी-20 देशों के इकोनॉमिक कॉन्फ्रेंस में टी-वॉलेट के माध्यम से राज्य के लोगों को दी जा रही बैंकिंग सेवाओं को लेकर भी चर्चा हुई। राज्य के आईटी विभाग के मुख्य सचिव जयेस रंजन ने कॉन्फ्रेंस में बताया कि टी-वॉलेट एक चमत्कार की तरह है। उन्होंने बताया कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर देश में पहली बार टी-वॉलेट लाया गया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के दूर-दराज गांवों में भी जाइए, टी वॉलेट वहां भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि टी वॉलेट के माध्यम से पैसे किसी भी बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए जा सकते हैं और राज्य सरकार इसके लिए कोई सर्विस चार्ज भी नहीं लेती। इस मौके पर 40 देशों के प्रतिनिधियों के अलावा केंद्रीय आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव अजय सेठ भी मौजूद थे। इस कॉन्फ्रेंस में मौजूद जानकारों का कहना था कि तेलंगाना के टी वॉलेट को डिजिटल सेक्टर में केस स्टडी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।












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