सर्वे का सार: मोदी की वापसी की संभावना कम, नीतीश को डबल ऑफर संभव

नई दिल्ली। 2019 में आम चुनाव के बाद अगला प्रधानमंत्री कौन होगा? मगर, इसी सवाल से जुड़ा सवाल ये है कि क्या नरेंद्र मोदी दोबारा देश के प्रधानमंत्री नहीं होंगे? दरअसल पहला सवाल ही इसलिए पैदा हो रहा है क्योंकि दूसरे सवाल का जवाब सकारात्मक होने की संभावना क्षीण हो गयी है। यह कोई व्यक्तिगत आकलन नहीं है और न ही मनगढ़ंत सवाल है बल्कि इस सवाल का आधार है एबीपी-सी वोटर का ताजा सर्वेक्षण।

सर्वे में त्रिशंकु सदन के आसार

सर्वे में त्रिशंकु सदन के आसार

एबीपी-सी वोटर के ताजा सर्वेक्षण पर एक नज़र डालें तो 543 सीटों वाली लोकसभा में 272 का जादुई आंकड़ा पाता न कोई दल दिल दिख रहा है, न गठबंधन। दो प्रमुख गठबंधन के बीच त्रिशंकु सदन बनता दिख रहा है। एनडीए के खाते में 233, यूपीए के खाते में 167 और अन्य को 143 सीटें मिलती दिख रही हैं। 2019 की भावी लोकसभा सर्वेक्षण रिपोर्ट

कुल सीट: 543

जादुई आंकड़ा:272

एनडीए :233

यूपीए :167

अन्य :143

कौन करेगा देश का नेतृत्व?

कौन करेगा देश का नेतृत्व?

यहीं ये सवाल बनता दिख रहा है कि कौन देश का नेतृत्व करेगा? यानी प्रधानमंत्री कौन होगा? 2014 के आम चुनाव के मुकाबले 2019 में यह चुनाव परिणाम का अनुमान सत्ता विरोधी है इसलिए एनडीए का नेतृत्व करने वाली पार्टी बीजेपी के लिए नैतिक और वास्तविक दोनों स्तर पर नेतृत्वकारी भूमिका खत्म होती दिख रही है। फिर भी अगर बीजेपी को नेतृत्व करने का मौका मिले, तो नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने को शायद पार्टी प्राथमिकता ना दे। क्योंकि, जिस व्यक्ति के नेतृत्व में इतनी बड़ी पराजय होगी, उसे नेतृत्व का मौका पार्टी कैसे दे सकती है? आरएसएस की राय भी निश्चित रूप से निवर्तमान प्रधानमंत्री को तब बदलने की ही रहेगी। ऐसे में बीजेपी दूसरे नाम पर विचार करने को विवश रहेगी।

बीजेडी, टीआरएस और वाइएसआर कांग्रेस देंगे मोदी को समर्थन?

बीजेडी, टीआरएस और वाइएसआर कांग्रेस देंगे मोदी को समर्थन?

अगर ये मान लिया जाए कि अमित शाह-नरेंद्र मोदी की जोड़ी प्रधानमंत्री का चेहरा यानी नरेंद्र मोदी को बदलने को तैयार नहीं होती है, तो क्या होगा? तब भी बीजेपी के लिए ये सम्भावना रहेगी कि वह बीजेडी 6, टीआरएस 16 और वाईएसआर कांग्रेस 19 की मदद से जादुई आंकड़ा हासिल कर ले। यह योग एनडीए के 237 में 6+16+19=41 को जोड़ दें तो 278 का आंकड़ा बनता है जो जादुई आंकड़ा 272 से ज्यादा है। फिर भी ये सवाल बना रहेगा कि क्या ये तीनों दल जनादेश के ख़िलाफ़ नरेंद्र मोदी को समर्थन देने के लिए तैयार होंगे? या कि उनकी पसंद नितिन गडकरी या कोई अन्य दक्षिण के नेता रहेंगे? शिवसेना भी दक्षिण और खासकर महाराष्ट्र के नाम पर दांव चलेगी।

नीतीश को पीएम बना सकती है बीजेपी

नीतीश को पीएम बना सकती है बीजेपी

दूसरी सम्भावना ये है कि बीजेपी किंगमेकर की भूमिका निभाए। ऐसा वह दो तरीकों से कर सकती है- एक एनडीए के घटक दल का नाम आगे बढ़ाकर और दूसरा एनडीए से बाहर किसी दल को अपने साथ जोड़कर। यह सम्भावना इसलिए अधिक बलवती है क्योंकि फेडरल मोर्चा बनाने की कोशिश करने वाले टीआरएस नेता व अन्य के लिए यह पसंदीदा विकल्प रहेगा। मगर, चंद्रशेखर राव, बीजू पटनायक, जगन मोहन रेड्डी या किसी अन्य के मुकाबले बीजेपी के लिए नीतीश कुमार का नाम आगे बढ़ाना अधिक मुफीद रहेगा। इसकी तीन वजह हैं- एक, नीतीश कुमार एनडीए के घटक दल हैं। नीतीश के प्रधानमंत्री बनने के बाद बीजेपी कह सकती है कि एनडीए सरकार बरकरार। दूसरा, नीतीश कुमार से बीजेपी हर्जाना भी वसूल सकती है। बिहार सरकार में बीजेपी के लिए नेतृत्व का मौका मांग सकती है। तीसरा, बिहार में एनडीए के दमदार प्रदर्शन की सम्भावना सर्वे में है। इस वजह से भी बिहार का दावा एनडीए में मजबूत रहेगा

नीतीश के लिए यूपीए से भी रहेगा ऑफर

नीतीश के लिए यूपीए से भी रहेगा ऑफर

अगर बीजेपी इस रास्ते पर चलने में देरी करती है या फिर कोई अड़चन आती है तो नीतीश कुमार के लिए यूपीए के पास भी ऑफर रहेगा। यूपीए ने अगर नीतीश कुमार को अपने साथ जोड़ लिया, तो जहां एनडीए कमजोर होगा, वहीं नयी सरकार के लिए मजबूत बहुमत का आधार भी बनाया जा सकता है। नीतीश को समर्थन देने में न तीसरा मोर्च के पैरोकारों को दिक्कत होगी, न फेडरल मोर्चा की वकालत करने वालों को। यहां तक कि यूपीए के कहने पर वामपंथी भी सहमत हो सकते हैं। इसके अलावा यूपीए आरजेडी के लिए बिहार सरकार में हिस्सेदारी भी मांग सकती है।

नीतीश के पास डबल ऑफर मायावती के लिए भी है सम्भावना

नीतीश के पास डबल ऑफर मायावती के लिए भी है सम्भावना

इस तरह नीतीश के लिए डबल ऑफर है यानी दोहरा अवसर है। उनके प्रधानमंत्री बनने के आसार किसी और के मुकाबले सबसे ज्यादा प्रबल है। मगर, यह बात भी सच है कि अगर एसपी और बीएसपी ठान ले कि नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनने नहीं देंगे, तो थोड़ी मुश्किल हो सकती है। एसपी-बीएसपी के पास 51 सीटें जरूर हैं लेकिन नीतीश को रोकने वाला फिगर नहीं है। ये दोनों दल ये जरूर कर सकते हैं कि मायावती के नाम पर सहमति बनाने के लिए अभियान तेज कर दें। शरद पवार के सहयोग से यूपीए पर दबाव डालें और ममता बनर्जी की मदद से दूसरे दलों को अपने नाम पर सहमत करें।

अगर मायावती के प्रधानमंत्री बनने की सम्भावना को देखें तो एबीपी-सी वोटर के सर्वेक्षण में एसपी-बीएसपी के 51, यूपीए के 167, टीएमसी के 34, टीआरएस 16, वाइएसआर 19 और बीजेडी 6 सीटों को जोड़ देने भर से बहुमत हासिल हो जाता है। यह कोई मुश्किल सम्भावना नहीं है। महिला और वह भी दलित महिला के नाम पर यह सम्भावना मजबूत है। फिलहाल एसपी-बीएसपी के साथ यूपीए के संबंध अच्छे हैं और ममता बनर्जी भी इस बात पर सहमत हो सकती हैं। हालांकि ममता बनर्जी के पीएम बनने के लिए भी सम्भावना यही रहेगी।

मायावती के लिए क्या है गणित

मायावती के लिए क्या है गणित

SP+BSP = 51

UPA =167

TMC = 34

TRS = 16

YSR CONG = 19

BJD = 06 (कुल 293)

एबीपी न्यूज और सी वोटर के सर्वे कोई चुनाव परिणाम नहीं कि इसके आधार पर किसी सरकार के बनने की भविष्यवाणी की जाए, मगर इस सर्वे से एक सम्भावना दिखती नज़र आती है कि अगर जनता ने त्रिशंकु सदन दिया, तो देश का नेतृत्व करने के लिए जो सबसे प्रमुख दो नाम सामने दिख रहे हैं उनमें नीतीश कुमार और मायावती सबसे आगे हैं। इनमें भी नीतीश कुमार के लिए दोहरा अवसर है। यानी वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह सर्वे दोबारा प्रधानमंत्री बनने की सम्भावना को लगभग खारिज करता है।

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