पाकिस्तान जीता या हारा? IIT मद्रास में जनरल द्विवेदी ने बताया ऑपरेशन सिंदूर का पूरा सच
Operation Sindoor: भारतीय सेना के इतिहास में 7 मई 2025 को दर्ज हुआ 'ऑपरेशन सिंदूर' सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि रणनीति, साहस और तकनीक का अनोखा संगम है। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए दर्दनाक आतंकी हमले के बाद देश में गुस्से का माहौल था। अगले ही दिन सरकार ने तीनों सेनाओं को खुली छूट दी - "जो करना है, करो।" इसके बाद शुरू हुई ऐसी योजना, जिसमें दुश्मन की हर चाल का जवाब शतरंज की बिसात पर महारथी खिलाड़ी की तरह दिया गया।
IIT मद्रास में आयोजित कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस पूरे अभियान की कहानी सुनाई। इसे उन्होंने 'ग्रे ज़ोन' का युद्ध बताया - यानी ऐसा संघर्ष जो पारंपरिक युद्ध से एक कदम पीछे, लेकिन जीत के एक कदम आगे था।

ऑपरेशन सिंदूर को बताया 'शतरंज का खेल'
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रविवार को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई चुनौतियों को याद करते हुए कहा कि यह बिल्कुल शतरंज के खेल जैसा था। उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता था कि दुश्मन अगली चाल क्या चलेगा, और हमें भी अपनी चाल उसी के अनुसार बदलनी पड़ रही थी।"
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#WATCH | During an address at IIT Madras, Chief of Army Staff (COAS) General Upendra Dwivedi says, "In Operation Sindoor, we played chess... We did not know what the enemy's next move was going to be, and what we were going to do. This is called greyzone. Greyzone means that we… pic.twitter.com/MfLScTMbG7
— ANI (@ANI) August 9, 2025
IIT मद्रास में दिया संबोधन
जनरल द्विवेदी IIT मद्रास में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने 'अग्निशोध' - इंडियन आर्मी रिसर्च सेल (IARC) का उद्घाटन किया। यह पहल रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इसका उद्देश्य सैन्य कर्मियों को एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग, वायरलेस कम्युनिकेशन और ड्रोन सिस्टम जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना है।
'ग्रे ज़ोन' में हुआ ऑपरेशन
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर पारंपरिक युद्ध से अलग, 'ग्रे ज़ोन' में किया गया था। इसमें एक तरफ दुश्मन चाल चल रहा था, तो दूसरी तरफ भारतीय सेना भी अपनी चालें बदलते हुए कभी 'चेकमेट' दे रही थी और कभी जोखिम उठाकर दुश्मन पर सीधा हमला कर रही थी।
पहलगाम हमले के बाद मिला फ्री हैंड
COAS ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले ने देश को हिला दिया था। अगले ही दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा - "अब बस।" तीनों सेनाओं के प्रमुखों को साफ निर्देश दिए गए कि जो करना है, आप तय करें। इस तरह का राजनीतिक भरोसा और स्पष्टता पहली बार देखने को मिली, जिससे सेना का मनोबल बढ़ा।
7 मई को शुरू हुआ सबसे बड़ा हमला
सुबह-सुबह 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकियों के 9 ठिकानों पर वार किया गया। यह 1971 के बाद भारत का पहला संयुक्त सैन्य अभियान था, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने मिलकर कार्रवाई की।
9 में से 7 ठिकाने तबाह
द्विवेदी ने बताया कि 25 अप्रैल को नॉर्दर्न कमांड में योजनाबद्ध तरीके से 9 में से 7 ठिकानों को तबाह किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए। 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई और 'ऑपरेशन सिंदूर' का नाम पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।
तकनीक और सटीक कार्रवाई पर जोर
'अग्निशोध' के उद्घाटन पर उन्होंने कहा कि यह सहयोग IIT मद्रास रिसर्च पार्क, AMTDC और प्रवरतक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन तक फैलेगा। ऑपरेशन सिंदूर को उन्होंने एक सोच-समझकर की गई, खुफिया जानकारी आधारित कार्रवाई बताया, जो भारत की नई सुरक्षा रणनीति को दर्शाती है। उन्होंने स्वदेशी तकनीक और सटीक सैन्य कार्रवाई की भूमिका को देश की सुरक्षा के लिए अहम बताया।
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