ऑपरेशन देवी शक्ति: अफगानिस्तान से भारतीयों को निकालने के मिशन का यह नाम क्यों पड़ा ? जानिए
नई दिल्ली, 24 अगस्त: भारत अबतक 800 से ज्यादा लोगों को अफगानिस्तान से सुरक्षित निकाल चुका है। मंगलवार को भी काबुल से दुशांबे के रास्ते 78 लोग नई दिल्ली पहुंचे हैं। इन लोगों के साथ पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब की तीन प्रतियां भी अफगानिस्तान से भारत पहुंची हैं, जिसे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने सहयोगियों के साथ एयरपोर्ट जाकर प्राप्त किया है। भारत 16 अगस्त से ही इस रेस्क्यू मिशन को अंजाम दे रहा है, जिसे 'ऑपरेशन देवी शक्ति' का नाम दिया गया है। आइए इस मिशन को यह नाम क्यों दिया गया, इसके पीछे की वजह को समझते हैं।
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काबुल मिशन का नाम 'ऑपरेशन देवी शक्ति' क्यों पड़ा ?
अफगानिस्तान में फंसे भारतीयों को वहां से सुरक्षित निकालने के मिशन को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में अंजाम दिया जा रहा है। इस मिशन को भारत ने 'ऑपरेशन देवी शक्ति' का नाम दिया है। आखिरकार तालिबान के क्रूर आतंकवादियों से लोगों की जान बचाने के इस मुश्किल मिशन को ऐसा नाम क्यों दिया गया, इसकी जानकारी रखने वाले लोग काफी दिलचस्प बातें बता रहे हैं। न्यूज 18 की एक खबर के मुताबिक इस मिशन का नाम 'ऑपरेशन देवी शक्ति' इसलिए रखा गया है, क्योंकि जैसे 'मां दुर्गा' राक्षसों से बेगुनाहों की रक्षा करती हैं, इसीलिए इस मिशन का लक्ष्य बेकसूर नागरिकों को तालिबान के आतंकियों की हिंसा से हिफाजत करना है।

ऑपरेशन देवी शक्ति जारी है- विदेश मंत्री
मंगलवार को काबुल से ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे होते हुए 78 लोगों के भारत पहुंचने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक ट्वीट किया, 'ऑपरेशन देवी शक्ति जारी है। काबुल से 78 लोग दुशांबे होते हुए पहुंचे। इंडियन एयर फोर्स, एयर इंडिया और विदेश मंत्रालय की टीम को उनके अथक प्रयासों के लिए सलाम। हैशटैग देवी शक्ति।' यहां गौर करने वाली बात है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद मां दुर्गा के भक्त हैं और दोनों नवरात्रों में वह 9 दिनों का उपवास भी रखते हैं और सिर्फ गुनगुना पानी पीकर कठिन व्रत पूरा करते हैं।

मानवीय दृष्टिकोण पर पीएम मोदी का जोर
हाल ही में कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में पीएम मोदी ने अपने सहयोगियों को निर्देश दिया था कि अफगानिस्तान से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के ऑपरेशन को पूरी तरह मानवीय दृष्टिकोण से चलाया जाए, उससे जरा भी कम नहीं। उन्होंने कहा था कि भारत जितने भी विमान भेज सका है, उससे अफगानिस्तान से न सिर्फ भारतीय और अल्पसंख्यक हिंदू और सिख निकलकर आ पाए हैं, बल्कि कई अफगान नागरिकों ने भी संकट की इस घड़ी में भारत आने का विकल्प चुना है।

केंद्रीय मंत्री ने प्राप्त की गुरु ग्रंथ साहिब की प्रतियां
मंगलवार को अफगानिस्तान से जो 78 लोग नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर पहुंचे हैं, उनमें 25 भारतीय नागरिकों के अलावा कई अफगान सिख और हिंदू भी शामिल हैं। इन लोगों को सोमवार को काबुल से निकालकर दुशांबे ले जाया गया था। इनके साथ काबुल से पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब के तीन स्वरूप भी पहुंचे हैं, जिसे हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय राज्यमंत्री वी मुरलीधरन और बीजेपी नेता सरदार आरपी सिंह ने रिसीव किया है। गुरु ग्रंथ साहिब की तीनों प्रतियों को भी कल इंडियन एयरफोर्स के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सी-17 से काबुल से दुशांबे ले जाया गया था।
थोड़ी देर पहले काबुल से दिल्ली पहुंचे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के तीन पवित्र स्वरूप को प्राप्त करने और उन्हें प्रणाम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ- हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय मंत्री

अबतक 800 से ज्यादा लोग अफगानिस्तान से निकाले गए
मंगलवार को काबुल से दिल्ली पहुंचे 78 लोगों के साथ 16 अगस्त से चल रहे इस ऑपरेशन के तहत काबुल से भारत लाए गए लोगों की संख्या 800 से ज्यादा हो चुकी है। हवाई जहाज से वहां से लोगों को सुरक्षित निकलने का यह काम काबुल पर तालिबान के कब्जे के अगले दिन से ही जारी है और फिलहाल इसकी सीमा 31 अगस्त तक निर्धारित है, जिस दिन अमेरिका ने वहां से अपना बोरिया-बिस्तर पूरी तरह से समेट लेने की घोषणा कर रखी है। 15 अगस्त को काबुल पर आतंकियों के कब्जे के बाद पहले दो दिनों में ही भारत ने वहां से 200 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया था, जिसमें राजनयिक, दूतावास के कर्मचारी शामिल थे।












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