One Nation, One Tariff क्या है? पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में इस पर अमल क्यों मुमकिन है
BJP Allies demands in PM Modi 3.0: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल शुरू होने से पहले सहयोगियों की मांगों की लिस्ट भी लंबी होने लगी है। इसमें से एक बिजली क्षेत्र में 'वन नेशन, वन टैरिफ' या 'वन नेशन, वन ग्रिड, वन प्राइस' जैसी मांगें भी सामने आनी शुरू हो गई हैं।
दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार पूरे देश के लिए एक बिजली दर की मांग की वकालत पहले से करते आए हैं। अब जिस तरह से पीएम मोदी की तीसरी एनडीए सरकार में टीडीपी और जेडीयू जैसी सहयोगी पार्टियों पर निर्भरता बढ़ गई है, उनकी इस मांग पर भी चर्चा शुरू हो गई है।

पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में नई भूमिका में होंगे नीतीश!
ईटी ने नीतीश के करीबियों और जेडीयू के अंदर के कुछ लोगों के हवाले से एक रिपोर्ट दी है, जिससे मोदी सरकार में उनकी नई भूमिका को लेकर कई तरह के संकेत मिल रहे हैं। मसलन, बिहार के सीएम के एक करीबी ने कहा, 'भाजपा नेतृत्व के साथ केंद्रीय मंत्री परिषद में पार्टी के हिस्से को लेकर वह उचित समय पर बात करेंगे। एक सहयोगी के रूप में उनका बीजेपी के साथ लंबा अनुभव है, इसलिए वे शांत हैं।'
उस नेता का कहना है कि नीतीश का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बहुत ही सौहार्दपूर्ण रिश्ता है, इसलिए वे बहुत ज्यादा बार्गेंनिंग करेंगे, इसकी भी संभावना नहीं है। साथ ही पार्टी नेता ये भी मानते हैं कि मुख्यमंत्री के मन को समझ पाना बहुत मुश्किल है।
'एक राष्ट्र, एक बिजली दर' की मांग कर सकते हैं नीतीश
नीतीश एनटीपीसी और केंद्र सरकार की अन्य बिजली उत्पादक कंपनियों से कम दर पर बिजली की मांग करते रहे हैं। एक वरिष्ठ जेडीयू नेता का कहना है, 'बिहार बहुत महंगी दर पर बिजली खरीदता है। जबकि यह अपने उपभोक्ताओं को कम दरों पर बिजली आपूर्ति करता है। वे बिजली के लिए 'एक राष्ट्र, एक दर' की मांग कर सकते हैं।'
नीतीश पहले से करते रहे हैं एक समान बिजली दर की वकालत
नीतीश पूरे देश में बिजली की कीमतों की एकरूपता की मांग पहले से करते आए हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल मार्च में उन्होंने बिहार विधानसभा में कहा था कि राज्य केंद्र की बिजली उत्पादक कंपनियों से अन्य राज्यों की तुलना में महंगी दरों पर बिजली खरीदता है, जबकि उपभोक्ताओं को बहुत ही कम दरों पर बिजली उपलब्ध करवाता है। उनका कहना था कि 'एक राष्ट्र, एक बिजली दर' के बारे में केंद्र सरकार को जरूर सोचना चाहिए।
'वन नेशन, वन पावर टैरिफ' क्या है?
'एक राष्ट्र, एक बिजली दर' के तहत पूरे देश में सभी राज्यों को समान कीमत पर बिजली उपलब्ध करवाने की नीति अपनाए जाने की मांग की जाती है। इसके पक्ष में यह दलील दी जाती है कि पहले बिजली का उत्पादन पर्याप्त नहीं था। लेकिन, अब हम सरप्लस बिजली उत्पादन कर रहे हैं। इसलिए, अब एक ऐसा मेकेनिज्म तैयार करने की जरूरत है, ताकि इसकी कीमतों में एकरूपता आ सके।
सस्ती बिजली बीजेपी के लिए भी फायदे का सौदा!
बिहार विधानसभा का चुनाव 2025 में ही होने की संभावना है। नीतीश की कोशिशों से अगर वहां बिजली की दरें कम होती हैं तो यह भाजपा के लिए भी राजनीतिक तौर पर फायदे का सौदा साबित हो सकती है, क्योंकि वो वहां सत्ताधारी गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी है।
बिहार के एक नेता ने कहा भी है, 'यदि वे (नीतीश) केंद्र को बिजली की एक समान दर के लिए राजी कर लेते हैं, तो बिजली के दाम कम हो जाएंगे और भाजपा को भी 2025 के विधानसभा चुनावों में इसका राजनीतिक लाभ मिलेगा।'












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