पठानकोट हमला- हमले के इस सबूत को कैसे झुठलाएगा पाकिस्तान
2 जनवरी 2016 को तड़के सुबह करीबन साढ़े तीन बजे का वक्त, पंजाब के पठानकोट एयरफोर्स के बेस पर भारी मात्रा में असलहा और बारूद से लैस आतंकियों ने हमला शुरू कर दिया। इस हमले को मुंबई की तर्ज पर बताया जाने लगा। कई सबूत मिले जिससे साबित हो रहा था कि यह पाकिस्तान की करतूत है।

उदाहरण के तौर पर एक खबर यह भी उड़ी की आतंकियों के जूते जिनमें पाकिस्तान की कंपनी की मुहर (एपकोट कंपनी) थी। तमाम सबूतों के बावजूद पाक सिर झुकाकर बचने का प्रयास करता रहा। लेकिन अमेरिका ने एनआईए ( नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी) को 1000 पन्नों का डॉजियर सौंपा है। जिसके साथ ही दोस्ती की ढ़ेर सारी कवायदों को बिसराकर भारत की नजरों में भी पाकिस्तान के प्रति घृणा पैदा होना लाजिमी है।
आतंक पर पाकिस्तान से कार्यवाही की उम्मीद बेईमानी
प्राप्त जानकारी की मानें तो यह जानकारी 26 नवंबर 2008 को मुंबई हमले से पहले आतंकियों की बातचीत जैसी ही है। कुल मिलाकर कहने का मतलब ये है कि बाकायदा आतंकी सरगनाओं ने अपने प्यादों को स्क्रिप्टेड तरीके से प्लान के बारे में समझाया था। जिससे साफ है कि आतंक के आकाओं ने पाक में बैठकर अपनी पूरी साजिश को रचा था।
हालांकि इस बात में कोई दो राय भी नहीं कि हाफिज सईद, परवेज मुशर्रफ सरीखे लोग टीवी न्यूज डिबेट्स में सरेआम भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं। लेकिन पाक के राजनीतिक लोग हर हमले पर पर्याप्त सबूतों की कमी से करतूतों पर पर्दा डालते रहे हैं। जिसकी वजह से हिंदुस्तान के लोगों की जुबां में पाक से आतंक के खिलाफ किसी बेहतर कार्यवाही की उम्मीद करना खुद के साथ बेईमानी है।
आतंकी सरगनाओं और हमलावरों के बीच बातचीत
कई बार देखा गया है कि जब भी पाकिस्तान के वरिष्ठ लोगों से सीज फायर के उल्लंघन का जिक्र किया जाता है तो वो इस आरोप को उल्टा भारत पर ही चिपकाने लगते हैं। बहरहाल ये तो पाक की नीयत की बात थी। लेकिन पठानकोट हमले के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के चारों फिदायीन नासिर हुसैन, अबू बकर, उमर फारूख, अब्दुल कयूम करीबन 80 घंटे से लगातार पाकिस्तानी सरगनाओं के संपर्क में थे।
NIA कर रहा है विश्लेषण
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अमेरिका द्ववारा भारत को सौंपे गए डॉक्यूमेंट्स में पाक के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और पठानकोट हमलावरों के बीच हुई बातचीत भी है। जिसका विश्लेषण एनआईए अपनी तरीके से कर रही है।












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