जम्मू-कश्मीर: उमर अब्दुल्ला ने वो ही किया जो 12 साल उनके अब्बा ने किया था
जम्मू। जम्मू-कश्मीर के कार्यवाहक मुख्यमंत्री का पद छोड़कर उमर अब्दुल्ला ने अपने पिता फारूक अब्दुल्ला का 12 साल पुराना इतिहास दोहरा दिया है। अक्तूबर 2002 में फारूक ने भी तत्कालीन राज्यपाल जीसी सक्सेना को कार्यवाहक मुख्यमंत्री का पद छोड़ने का फैसला सुनाया था और फारूख के इस फैसले के चलते उस समय भी 15 दिन के लिए राज्यपाल शासन लागू किया गया था।

फारूक की दलील थी कि पीडीपी और कांग्रेस सरकार गठन का तालमेल बिठाने में काफी वक्त लगा रहे हैं। लिहाजा उन्हें पद से मुक्त किया जाए, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की गुजारिश के बावजूद फारूक ने अपना फैसला नहीं बदला था।
जम्मू-कश्मीर में छठी बार लगा राज्यपाल शासन
अक्सर राजनीतिक उथलपुथल का सामना करने वाले जम्मू कश्मीर की कमान एक बार फिर राज्यपाल के हाथों में आ गई है। यह छठां मौका है, जब रियासत में सरकारी कामकाज राजभवन से संचालित होगा, रियासत में जब भी राज्यपाल शासन लागू हुआ, उसके बाद जम्मू कश्मीर की सियासत में अहम स्थान रखने वाला अब्दुल्ला परिवार नई शक्ति बनकर उभरा है।
पहले पांच बार लगे राज्यपाल शासन में एक मौके को छोड़ हर बार अब्दुल्ला परिवार का सदस्य मुख्यमंत्री बनकर लौटा है। सिर्फ 2002 में पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बनकर लौटे, खास बात यह है कि वर्तमान राज्यपाल एनएन वोहरा दूसरी बार सीधे तौर पर प्रशासन का कामकाज देखेंगे, इससे पहले 11 जुलाई 2008 को जब रियासत में राज्यपाल शासन लागू किया गया था, उस वक्त भी वोहरा राज्यपाल थे
न पूर्ण बहुमत, न ही गठबंधन
रियासत को पहली बार 26 मार्च 1977 को राज्यपाल शासन के अधीन किया गया था, जब कांग्रेस के समर्थन वापस लेने पर शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कांफ्रेंस की सरकार संख्या बल पूरा न करने पर गिर गई थी, उस समय रियासत में लक्ष्मीकांत झा के नेतृत्व में 06 दिनों तक राज्यपाल शासन लगा था। मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला एक बार फिर जीतकर सरकार बनाने में सफल रहे, लगभग नौ साल बाद छह मार्च 1986 में एक बार फिर रियासत में राज्यपाल शासन लागू किया गया था।
न तो बहुमत था और न ही गठबंधन
इस बार किसी दल के पास न तो पूर्ण बहुमत था और न ही किसी तरह का गठबंधन हो पाया था। इस बार राज्यपाल जगमोहन के नेतृत्व में 215 दिनों तक राज्यपाल शासन लगा। इसके बाद नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बनकर सरकार बनाने में कामयाब रहे। वर्ष 1990 में जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद पूरी तरह चरम पर पहुंच गया और कानून-व्यवस्था भंग हो गई थी। 19 जनवरी 1990 को जगमोहन को एक बार फिर राज्यपाल बनाया गया और उसी दिन से तीसरी बार राज्यपाल शासन लागू किया गया।
उस वक्त एनएन वोहरा ही राज्यपाल थे
तीसरी बार छह साल के लिए राज्यपाल शासन लागू हुआ, जो सबसे लंबा रहा। इस बार फिर नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला सरकार बनाने में कामयाब रहे।
18 अक्तूबर 2002 में हुए चुनाव के बाद फिर दुविधा की स्थिति उत्पन्न हुई और रियासत में चौथी बार राज्यपाल शासन लागू किया गया। हालांकि तत्कालीन राज्यपाल गिरीश चंद्र सक्सेना के नेतृत्व में सिर्फ 16 दिन के लिए राज्यपाल शासन लागू किया गया।
16 दिन के लिए राज्यपाल शासन
इस बार पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद नए मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता में आसीन हुए। वर्ष 2008 में एक बार फिर सियासी उठा पटक के बीच पीडीपी ने उस वक्त गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद ने अमरनाथ श्रद्धालुओं के लिए जमीन स्थांनतरित करने का फैसला लिया।11 जुलाई 2008 को लगा राज्यपाल शासन 178 दिनों के लिए लगा। उस वक्त एनएन वोहरा ही राज्यपाल थे। इस बार हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बनकर लौटे।












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