ओडिशा ट्रेन दुर्घटना की जांच में CBI का क्या काम? जानिए
Odisha Train accident: बालासोर ट्रेन हादसे की वजह को लेकर रेलवे किसी तरह की आशंकाओं को खारिज नहीं कर रहा है। इसलिए सीबीआई जांच हो रही है, ताकि यह पता चले कि किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं हुई?

ओडिशा के बालासोर जिले में हुई ट्रेन दुर्घटना की जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को दी जा रही है। इसके साथ ही कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की भी तकीकात जारी रहेगी और संभावना है कि वह दो हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट रेलवे को सौंप देंगे। लेकिन, सवाल उठाए जा रहे हैं कि इस हादसे में सीबीआई की क्या जरूरत पड़ गई?

सीबीआई जांच पर हो रही है हैरानी
बालासोर ट्रेन हादसे में जिसमें तीन-तीन ट्रेन दुर्घटना की चपेट में आईं और कोरोमंडल एक्सप्रेस तो बुरी तरह दुर्घटनाग्रस्त हो गई, इसकी जांच सीबीआई जैसी एजेंसी से कराने का फैसला सरसरी तौर पर हैरान करने वाला जरूर लग रहा है। गौरतलब है कि इस हादसे में 1200 के करीब लोग जख्मी हुए और 275 लोगों की जान चली गई।

हादसे की आपराधिक दृष्टिकोण से जांच करेगी सीबीआईे
लेकिन, विषय की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि क्या प्वाइंट मशीन या इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ कोई छेड़छाड़ हुई? क्या ट्रेन ने रिकॉन्फिग्रेशन की वजह से ट्रैक चेंज किया या सिग्नल में कोई गड़बड़ी हुई? देश की टॉप जांच एजेंसी इसी को लेकर आपराधिक दृष्टिकोण से तहकीकात करेगी। मतलब, इस दुर्घटना में किसी तरह का अपराध तो शामिल नहीं है?

जिम्मेदार लोगों की पहचान हो गई है- रेल मंत्री
यहां यह गौर करने वाली बात है कि रविवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दूरदर्शन से कहा था कि हादसे का 'मूल कारण' और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान हो गई है। रेल मंत्री के मुताबिक ट्रैक की कॉन्फिग्रेशन में बदलाव हादसे की वजह हो सकती है, 'जिसने भी इसे किया है, उसे बख्शा नहीं जाएगा।' उससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया था कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
रेलवे के एक्सपर्ट के मुताबिक रेलवे के सिग्नलिंग के लिए इलेक्ट्रिक प्वाइंट मशीन बहुत ही महत्वपूर्ण उपकरण है, प्वाइंट स्विचों की लॉकिंग के लिए यह जरूरी है और ट्रेनों की सुरक्षा के लिए यह बहुत ही अहम है।
मसलन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (बैंगलोर) के पूर्व छात्र और रेल स्टार्टअप एल2एम के फाउंडर एसके सिन्हा ने एनडीटीवी को बताया है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के द्वारा स्टेशन-इंचार्ज ट्रेन की रूट सेट करता है।
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उन्होंने कहा, 'एक बार जब रूट सेट हो जाता है और लॉक कर दिया जाता है, इसे तबतक नहीं बदला जा सकता, जबतक कि ट्रेन उससे गुजर नहीं जाती। उस रूट का सिग्नल हरा रहता है और लॉक किया जाता है, जिससे कि ड्राइवर जान सके कि वह रूट उसी की ट्रेन के लिए रिजर्व है और वह आगे बढ़ सकता है।'

सारी गतिविधियों का रहता है रिकॉर्ड- एक्सपर्ट
उन्होंने बताया कि 'सारी चीजें रिकॉर्ड की जाती हैं और बाद में विश्लेषण के लिए उपलब्ध होती हैं......भारतीय रेलवे जो इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम इस्तेमाल करता है, वह काफी सुदृढ़ और सुरक्षा के उच्च मानक के अनुरूप है और इसकी संभावना नहीं लगती कि यह खुद से फेल हो गया होगा।'

कुछ भी खारिज नहीं कर रहे- रेलवे बोर्ड
इससे पहले रेलवे बोर्ड की मेंबर (ऑपरेशंस एंड बिजनेस डेवलपमेंट) जया वर्मा सिन्हा ने रविवार को कहा था, 'हालांकि, जैसा कि संदेह जाहिर किया जा रहा है, सिग्नलिंग सिस्टम में किसी तरह की बाधा थी।' जब उनसे पूछा गया कि क्या रेलवे को किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका है तो उन्होंने कहा था कि कुछ भी खारिज नहीं कर रहे।
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