ओडिशा में किसानों ने गलत सैटेलाइट सर्वे का लगाया आरोप, मजबूरन सस्ते में बेचना पड़ा धान
खरीफ फसल के सीजन के दौरान धान की खरीद के लिए खेतों का सैटेलाइट सर्वेक्षण किया गया था, लेकिन इसमे कथित तौर पर कई तरह की खामियां सामने आई हैं जिसकी वजह से किसानों को मजबूरन फसल की जल्दबाजी में प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को बिक्री करनी पड़ी।
सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन ने चालू खरीब सीजन के दौरान 12.63 लाख क्विंटल से अधिक धान को इखट्ठा करने का लक्ष्य रखा है। गौर करने वाली बात है कि तकरीबन 50092 किसानों ने अपना धान बेचने के लिए 105 पैक्स में अपना नाम रजिस्टर कराया है। साथ ही 10 स्वयं सहायता समूहों को खरीद की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रावधान के अनुसार प्रति एकड़ 19 क्विंतल धान पैक्स के जरिए बिक्री का लक्ष्य रखा गया है।

उपग्रह सर्वेक्षण में खामियों की वजह से धान खरीद की निर्धारित मात्रा 19 क्विंटल प्रति एकड़ से कम हो गई है। किसानों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी समस्या को सहकारी समितियों के सहायक रजिस्ट्रार और नागरिक आपूर्ति विभाग के पास लेकर गए थे, लेकिन उन्होंने हमारी किसी भी समस्या का उन्होंने समाधान नहीं दिया।
अलसुधा के निवासी गगन बिहारी दास ने आरोप लगाया कि उनके पास तकरीबन डेढ़ एकड़ जमीन है, इस सीजन में उन्हें तकरीबन 29 क्विंटल धान बेचना था, जिसके लिए उन्होंने रजिस्ट्रेशन कराया था। लेकिन विभाग ने केवल 8 क्विंटल धान की खरीद का फैसला लिया। इसी तरह की शिकायतें सैनपुर के हिमांशु, नीपुर के ब्रूंदाबन स्वैन सहित अन्य किसानों ने की है।
किसानों का कहना है कि सामान्य धान के लिए निर्धारित कीमत 2183 रुपए प्रति क्विंटल है और ए ग्रेड की गुणवत्ता वाले धान के लिए 2203 रुपए प्रति क्विंटल की दर तय की गई है। लेकिन लोग पैक्स में अपनी उपज बेचने में विफल रहे। जिसकी वजह से उन्हें स्थानीय व्यापारियों को अपना धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। व्यापारियों को मजबूरन 1400 और 1500 रुपए प्रति क्विंटल अपना धान बेचना पड़ा।










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