CM Mohan Majhi News: शिकायतों से समाधान तक! सीएम माझी के जनसंवाद मॉडल ने बदला शासन का चेहरा
Odisha CM Mohan Charan Majhi: ओडिशा की राजनीति में वर्ष 2024 में आए परिवर्तन ने केवल सत्ता नहीं बदली, बल्कि एक ऐतिहासिक सामाजिक पहचान को भी स्थापित किया। बीजू जनता दल के लंबे शासन के अंत के साथ, राज्य को उसका पहला आदिवासी मुख्यमंत्री मिला मोहन चरण माझी।
यह बदलाव एक गहरे सामाजिक अर्थ के साथ आया, क्योंकि ओडिशा देश का वह राज्य है जहां आदिवासी जनसंख्या एक बड़ा हिस्सा है। मुख्यमंत्री माझी का अब तक का एक साल का कार्यकाल देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

जहां भाजपा उनकी उपलब्धियों की प्रशंसा करती है, वहीं विपक्ष कमियों की ओर इशारा कर रहा है। लेकिन एक बात जिस पर कोई विवाद नहीं है - मुख्यमंत्री माझी की लोकप्रियता जो अब तेजी से बढ़ रही है। उन्हें आमजन का मुख्यमंत्री यानी "People's CM" कहा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने शासन को जमीन से जोड़ने का काम किया है।
CM Mohan Majhi: जन सहभागिता का नया चेहरा
अपने कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद, माझी ने 1 जुलाई 2024 को "जन शिकायत सुनवाई" की व्यवस्था को फिर से शुरू किया। यह सुनवाई हर सोमवार सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक मुख्यमंत्री शिकायत प्रकोष्ठ, भुवनेश्वर में आयोजित होती है। इस पहल की खास बात यह है कि खुद मुख्यमंत्री, उनके मंत्रीगण और वरिष्ठ अधिकारी इसमें प्रत्यक्ष रूप से भाग लेते हैं।
मुख्यमंत्री शिकायतों को न केवल ध्यान से सुनते हैं, बल्कि कई मामलों में वहीं पर तत्काल समाधान भी देते हैं। इससे शासन के प्रति आम जनता का भरोसा मजबूत हुआ है।
CM Mohan Majhi ने सुनी मासूम प्रत्युशा की पीड़ा
5 अगस्त 2024 को बौध जिले से आए एक दंपत्ति ने अपनी छह वर्षीय बेटी, प्रत्युशा गिरी के इलाज के लिए सहायता मांगी। बच्ची के जन्म के तुरंत बाद उसके शरीर पर घाव विकसित हो गए थे, लेकिन परिवार इलाज करवाने में असमर्थ था। मुख्यमंत्री ने स्वयं उनकी बात सुनी और मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) से इलाज के लिए वित्तीय सहायता स्वीकृत की।
इस प्रकार के मामलों में जुलाई 2024 से अब तक कुल ₹30.5 लाख की सहायता 24 गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को दी गई है। यह एक बड़ा संकेत है कि माझी शासन, केवल नीति निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जमीन पर कार्रवाई में विश्वास करता है।
परिवार को मिलाया: महिला डॉक्टर का तबादला
1 जुलाई 2024 को आयोजित पहली जनसुनवाई के दौरान भुवनेश्वर निवासी पी.के. आचार्य ने अपनी बहू, जो केओंझर जिले में चिकित्सक के रूप में कार्यरत थीं, के तबादले की मांग की। उनके पुत्र पुरी में कार्यरत थे, और वर्षों से दंपति अलग-अलग रह रहे थे।
मुख्यमंत्री ने खुद मामले की समीक्षा की और तुरंत संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दिन कुल 1,540 शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिनमें से अधिकांश नौकरी नियमितीकरण, स्वास्थ्य और स्थानांतरण से संबंधित थीं।
CM Mohan Majhi ने किया विवादों का समाधान
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार जून 2024 से मई 2025 तक 85,650 शिकायतों में से 68,756 (लगभग 80%) का समाधान किया जा चुका है। यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री माझी की सीधी भागीदारी और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी से व्यवस्था पहले से कहीं अधिक प्रभावी हो गई है।
विशेष रूप से भूमि और संपत्ति से जुड़े विवादों को त्वरित समाधान दिया गया। विकलांग, वरिष्ठ नागरिक और अन्य हाशिए के वर्गों के लोग शिकायत प्रकोष्ठ में पहुँच रहे हैं, जिससे यह साबित होता है कि यह प्रणाली सबकी पहुँच में है।
CMRF और एकल खिड़की प्रणाली: त्वरित वित्तीय सहायता की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री माझी ने मुख्यमंत्री राहत कोष के अंतर्गत एक एकल-खिड़की प्रणाली लागू की, जिसके अंतर्गत पात्र मामलों में उसी समय वित्तीय सहायता स्वीकृत की जाती है। संबलपुर और अन्य क्षेत्रों में हुए क्षेत्रीय जनसुनवाइयों के दौरान यह प्रणाली बेहद प्रभावी रही।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सात दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाए, जिससे जरूरतमंद लोगों को समय पर सहायता मिल सके। यह व्यवस्था विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्गों के लिए एक वरदान बन गई है।
CM Mohan Majhi ने जनसुनवाई को क्षेत्रीय स्तर तक पहुँचाया गया
भुवनेश्वर पर बोझ कम करने के लिए मुख्यमंत्री ने जिला स्तर पर जनसुनवाई कार्यक्रम को बढ़ावा दिया। संबलपुर, बेरहामपुर जैसे शहरों में क्षेत्रीय जनसुनवाइयां आयोजित की गईं, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के लोगों को भी शिकायत दर्ज करने का अवसर मिला।
इसके अलावा जना सुनानी पोर्टल और ई-अभियोग ऑनलाइन प्रणाली की शुरुआत ने पारदर्शिता और ट्रैकिंग व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया।
CM Mohan Majhi ने जीता जनता का भरोसा
राज्य के विभिन्न कोनों से जनता ने माझी की इस पहल की खुलकर सराहना की है। सोशल मीडिया पर भी मुख्यमंत्री की सरलता, सुलभता और सक्रियता की खूब चर्चा हो रही है। बहुत से लोगों ने इसे पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में अधिक संवेदनशील और जनता-केन्द्रित करार दिया है।
मुख्यमंत्री मोहन माझी की यह पहल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक मानसिकता में परिवर्तन का प्रतीक है। वह यह संदेश दे रहे हैं कि एक मुख्यमंत्री केवल कार्यालय में बैठकर नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर ही वास्तविक समस्याओं को समझ और सुलझा सकता है।
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