कंधार विमान हाईजैक पर NSA अजीत डोवाल का बड़ा खुलासा

एनएसए अजीत डोवाल का बड़ा दावा, कंधार हाईजैक में आईएसआई का था हाथ, आईएसआई के चलते भारत को हाईजैकर्स के साथ समझौता करने में हुई थी काफी मुश्किल

नई दिल्ली। कांधार विमान हाईजैक पर देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने बड़ा खुलासा किया है। डोवाल ने दावा किया है कि एयर इंडिया के विमान आईसी-814 जिसे हाईजैक किया गया था उसमें आतंकियों की मदद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने मदद की थी, जिसके चलते भारत को आतंकियों पर दबाव डालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और आखिरकार देश को खुंखार आतंकियों को छोड़ना पड़ा था।

ajit doval

खत्म हो सकता था बंधक संकट
कंधार विमान हाईजैक के वक्त जो टीम आतंकियों के साथ बातचीत करने व यात्रियों को छुड़ाने के लिए काम कर रही थी उसका अजीत डोवाल भी हिस्सा थे। इस विमान क्रू मेंबर के अलावा कुल 180 यात्री थे, जिसे हाईजैक करने के बाद 24 दिसंबर 1999 को कंधार ले जाया गया था जोकि भारत के इतिहास में यह सबसे बड़ा बंधक संकट है। इस हाईजैक पर डोवाल ने कहा कि अगर तालिबान के अपहरणकर्ताओं को आईएसआई की मदद ना प्राप्त होती तो हम इस संकट को खत्म कर सकते थे। डोवाल ने यह बयान एक पुस्तक के विमोचन के मौके पर कही।

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ISI के कर्नल और लेफ्टीनेंट थे शामिल
कंधार विमान हाईजैक को मौलाना मसूद अजहर, अहमद उमर शेख और मुश्ताक जरगार जैसे आतंकियों को रिहा करने के बाद खत्म हुई थी। डोवाल ने एक और बड़ा दावा किया है कि जब समझौते की बात करने वाली टीम विमान के अंदर गई तो कई तालिबानी अपहरणकर्ता हथियारों के साथ विमान मे थे। यही नहीं विमान में दो आईएसआई के भी सदस्य थे, जिनमें से एक लेफ्टिनेंट व दूसरा कर्नल था। डोवाल ने कहा कि आईएसआई के चलते हमें आतंकियों के साथ बात करने में काफी मुश्किल हो रही थी और उनपर दबाव डालने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

बाहर के हालात की दी जा रही थी जानकारी
डोवाल ने दावा किया कि हाईजैकर्स को बाहर से मदद मिल रही थी और उन्हें काफी खुफिया जानकारी मुहैया कराई जा रही थी कि बाहर क्या हो रहा है। अगर इन लोगों को आईएसआई की ओर से बाहर की जानकारियां नहीं मिल रही होती तो हम उस संकट को खत्म कर सकते थे। उन्होने कहा कि हमें पहले दिन से इस बारे में पता था और यह हमारे लिए आश्चर्य की बात नहीं थी, इसकी वजह थी कि पाकिस्तान कारगिल में मुंह की खा चुका था इन हाईजैकर्स को इस बात का भी आश्वासन दिया गया था कि उन्हें सुरक्षित बाहर जाने दिया जाएगा, जिसके चलते वह किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं थे, सामान्य स्थिति मे ऐसा होता है कि आतंकी सबसे ज्यादा इस बारे में सोचते हैं कि कैसे जल्दी से जल्दी बाहर निकला जाए। डोवाल ने बताया कि तत्कालीन एनडीए सरकार पर जनता का काफी दबाव था कि इस बंधक संकट को 1 जनवरी तक खत्म किया जाए, इस दबाव की वजह से समझौता और मुश्किल हो गया।

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