एनआरआई देश के भविष्य पर निराश न हों : प्रधानमंत्री

उन्होंने अनिवासी भारतीयों से कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य के बारे में कई सवालों और सामाजिक चुनौतियों की चिंता के बाद भी वे आशान्वित रहें। सिंह ने कह, "बाहर कुछ समूहों में यह धारणा बनी है कि पिछले एक दशक में हासिल देश की विकास दर थोड़ी घटी है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से इसे और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, जिसकी आवाज चुनावी वर्ष में और बढ़ जाती है।" उन्होंने कहा, "मैं आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि वर्तमान और भविष्य के बारे में चिंता करने का कोई कारण नहीं है।"
उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि राजनीतिक समर्थन के अभाव में कई वित्तीय और बीमा सुधार के कदम नहीं उठाए जा सके, लेकिन जो भी कदम उठाए गए हैं, उनके परिणाम आने लगे हैं और भारत फिर से आकर्षक निवेश स्थल के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में इसका प्रमाण मिल जाएगा। शिक्षा क्षेत्र में हुई तरक्की पर उन्होंने कहा कि देश में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की संख्या 17 से बढ़कर 44 हो गई है और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तथा भारतीय प्रबंधन संस्थानों की संख्या बढ़कर दोगुनी हो गई है।
देश के अधोसंरचना विकास पर उन्होंने कहा, "राजमार्ग में हमने 17 हजार किलोमीटर का विस्तार किया है और गांवों की संड़कों में दो लाख किलोमीटर विस्तार किया गया है। हमारी बिजली उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है।" सिंह ने कहा कि विकास में तेजी तो आई ही है यह समावेशी भी हुआ है। उन्होंने कहा, "गरीबी तेजी से घट रही है। कृषि विकास में तेजी आई है और गांवों में मजदूरी 2004 के बाद से तीन गुना बढ़ी है।"
स्वच्छ और पारदर्शी सरकार देने के बारे में सिंह ने कहा कि यह एक कठिन काम है। क्योंकि इसके लिए एक ओर जहां वर्षो पुरानी तौर तरीकों और प्रणालियों को बदलना होगा, वहीं अपनी राजनीति के संघीय चरित्र का सम्मान भी करना होगा। उन्होंने कहा, "शासन व्यवस्था को सशक्त करना एक निरंतर जारी रहने वाली प्रक्रिया है और हम यह कभी नहीं कह सकते हैं कि हमने काफी काम कर लिया है, लेकिन हमें विश्वास है कि हम सही दिशा में जा रहे हैं।"












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