हिंदी साहित्य का मंच सूना, मशहूर साहित्यकार राजेन्द्र यादव का निधन

Noted Hindi author, pioneer of ‘Nayi Kahani’ Rajendra Yadav passes away
नई दिल्ली। भारतीय साहित्य का एक बड़ा नाम आज दुनिया को अलविदा कहकर चला गया जी हां आज हमारे बीच में हंस पत्रिका के संपादक राजेन्द्र यादव नहीं रहे, उन्होंने सोमवार रात को दुनिया को अलविदा कह दिया।

अपनी कलम से महिलाओं के हक और अधिकारों की बात करने वाले अनुपम लेखक राजेन्द्र यादव ने दिल्ली में रात 12 बजे अंतिम सांस ली, वह 84 साल के थे और काफी समय से सांस की बीमारी से ग्रस्त थे। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम दर्शन उनके मयूर विहार स्थित आवास पर रखा हुआ है और दिन में तीन बजे उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा।

मुशी प्रेमचंद की लेखनी से शुरू हुई हंस पत्रिका के संपादक पद की कमान संभालने वाले राजेन्द्र यादव देश के अग्रणी लेखकों में से एक थे उनकी ओर से हिंदी साहित्य के एक अलग मुकाम देने की वजह से ही उन्हें 1999-2001 के लिए उन्हें प्रसार भारती का बोर्ड मेंबर चुना गया।

उनके लिखे उपन्यास सारा आकाश, उखड़े हुए लोग, एक इंच मुस्कान और कुल्टा और कहानी संस्करण 'नई कहानी' हिंदी साहित्य के अनमोल हीरे हैं निसंदेह उनके जाने से आज हिंदी साहित्य का मंच सूना हो गया है। उनके लिखे उपन्यास 'सारा आकाश' पर बाद में बासु चटर्जी ने फिल्म भी बनाई थी जिसे बाद में कई पुरस्कारों से नवाजा गया।

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