इस्‍लामाबाद में ही नहीं दिल्‍ली के हाइवे पर भी हो सकती है फाइटर जेट की लैंडिंग

नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान की राजधानी इस्‍लामाबाद में गुरुवार को मोटर वे पर फाइटर जेट्स लैंड कराए गए और फिर उन्‍होंने वहीं से टेक ऑफ किया। लोगों में थोड़ी सी घबराहट और थोड़ा सा डर का माहौल था।

क्‍या है हाइवे स्ट्रिप

ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी हाइवे पर जेट्स लैंड कराए गए हों। कई देश ऐसा करते आ रहे हैं और आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) भी ऐसा करने में सक्षम है। इसके लिए तकनीकी तौर पर हाइवे स्ट्रिप शब्‍द का प्रयोग करते हैं।

  • हाइवे स्ट्रिप या रोड रनवे को खासतौर पर मिलिट्री एयरक्राफ्ट की लैंडिंग के लिए तैयार किया जाता है।
  • इमरजेंसी की हालत में यह रनवे मिलिट्री एयरबेस में तब्‍दील हो जाते हैं।
  • युद्ध की हालत में एयरबेस के पूरी तरह से खत्‍म हो जाने पर यहां से ही एयरक्राफ्ट ऑपरेट होते हैं।
  • पहली हाइवे स्ट्रिप को वर्ल्‍ड वॉर टू के दौरान निर्मित किया गया था।
  • उस समय मोटरवेज को एयरक्राफ्ट की लैंडिंग के लिए बड़े पैमाने पर प्रयोग किया गया था।
  • चीन, नॉर्थ कोरिया, स्‍वीडन, फिनलैंड, स्विटजरलैंड, पोलैंड और चेकोस्‍लोवाकिया की एयरफोर्स प्रयोग कर रहीं।
  • यह हाइवे स्ट्रिप साधारणतौर पर दो से 3.5 किलोमीटर तक लंबी होती है।
  • यह हाइवे स्ट्रिप मोटाई में ज्‍यादा होती है और इसका बेस ठोस कंक्रीट से तैयार होता है।
  • एयरबेस के लिए प्रयोग के समय इसके पास ही एयरफील्‍ड तैयार कर ली जाती है।
  • एयरक्राफ्ट लैंडिंग के लिए जरूरी स्‍थान को कोटोबार सिस्‍टम के जरिए नियंत्रित किया जाता है।
इ‍ंंडियन एयरफोर्स

इ‍ंंडियन एयरफोर्स

जुलाई 2015 में यमुना एक्‍सप्रेस हाइवे पर मिराज-2000 की लैंडिंग कराई गई थी। देश के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी हाइवे को सैन्‍य मकसद के लिए प्रयोग किया गया। आईएएफ ने नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई अनुरोध किया था कि देश को आठ नेशनल हाइवे को फाइटर जेट्स और दूसरे एयरक्राफ्ट की लैंडिंग के लिए मंजूरी दी जाए। अगर ऐसा होता है तो फिर आईएएफ भी पंजाब, राजस्‍थान और गुजरात में मौजूद हाइवे इंडियन एयरफोर्स प्रयोग में ला सकेगी।

पाकिस्‍तान

पाकिस्‍तान

पाकिस्‍तान एयरफोर्स, पीएफए पेशावर से इस्‍लामाबाद और इस्‍लामाबाद से लाहौर दो मोटरवे या हाइवे को वर्ष 2000 में ही लैंडिंग के लिए प्रयोग कर लिया था। पाक ने उस समय एफ-7पी फाइटर जेट की लैंडिंग कराई थी। इसके बाद उसने इस्‍लामाबाद से लाहौर तक जाने वाले हाइवे पर 2010 में सी-130 की लैंडिंग कराई। फिर उसी वर्ष यानी 2010 मे पाक ने एक एक्‍सरसाइज के दौरान एफ-7पी और मिराज की लैंडिंग कराई।

स्‍वीडन

स्‍वीडन

स्‍वीडन ने 150 0 मीटर की स्ट्रिप का निर्माण वर्ष 1949 में शुरू किया था। फिर वर्ष 1967 छह दिनों तक चले युद्ध में इसका प्रयोग हुआ। आज भी स्‍वीडन की सेना कभी-कभी हाइवे को अभ्‍यास के दौरान प्रयोग करती है। हालांकि वहां के विशेषज्ञों का कहना है कि हाइवे को मरम्‍मत की जरूरत है।

जर्मनी

जर्मनी

सन 1945 में वर्ल्‍ड वॉर टू के दौरान जर्मनी में पहली हाइवे स्ट्रिप का निर्माण हुआ। उस समय नाजी सेना इसका प्रयोग कर रही थी। आज भी आपको यकीन नहीं होगा कि सात दशक के बाद भी जर्मन हाइवे को ए-10 थंडरबोल्‍ट्स, एफ-16 और यहां तक कि कभी-कभी हरक्यूलिस जैसे कार्गो एयरक्राफ्ट को लैंड कराने के लिए प्रयोग किया जा रहा है।

 साउथ कोरिया

साउथ कोरिया

साउथ कोरिया साउथ कोरिया ने अमेरिका के साथ जारी ज्‍वाइंट वॉर एक्‍सरसाइज के दौरान हाइवे को लैंडिंग स्ट्रिप की तरह प्रयोग किया और फेयरचाइल्‍ड सी-123के की सफल लैंडिंग करवाई।

 24 से 48 घंटे के अंदर बन रनवे रेडी

24 से 48 घंटे के अंदर बन रनवे रेडी

24 से 48 घंटे में तैयार किसी भी हाइवे स्ट्रिप या मोटर वे को 24 से 48 घंटों के अंदर एयरबेस में तब्‍दील कर लिया जाता है।नाटो ने जर्मनी के एक हाइवे ए-29 पर सी-130 जैसे भारी-भरकम एयरक्राफ्ट तक की लैंडिंग कराई है।

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