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उत्तर पूर्वी दिल्ली में जमीन पर किसके पक्ष में है माहौल, मनोज तिवारी या कन्हैया कुमार?

North East Delhi Lok Sabha Election: राजधानी दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों में से सिर्फ उत्तर पूर्वी दिल्ली ही है, जहां से बीजेपी ने अपने दो बार के सांसद मनोज तिवारी पर फिर से भरोसा किया है। उनके मुकाबले में कांग्रेस ने सीपीआई से आए जेएनयू के पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार को आजमाने की कोशिश की है।

उत्तर पूर्वी दिल्ली ही वह इलाका है, जो कोविड महामारी से पहले 2020 में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगे का केंद्र था, जिसमें 53 जानें चली गई थीं और 583 लोग जख्मी हुए थे। दंगे का दाग आज भी इस लोकसभा क्षेत्र में देखा जा सकता है और राजनीतिक पार्टियां भी उसपर अपने-अपने हिसाब से रोटियां सेंक लेने की उम्मीद में हैं।

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सबसे ज्यादा मुस्लिम वोटरों वाली सीट है उत्तर पूर्वी दिल्ली
यह लोकसभा दिल्ली का सबसे ज्यादा मुस्लिम मतदाताओं वाला क्षेत्र है। यहां के 20.7% वोटर मुसलमान हैं और इलाके के मतदाता सांप्रदायिक आधार पर बंटे हुए महसूस किए जा सकते हैं। पिछली बार इस सीट पर जब कांग्रेस से शीला दीक्षित मैदान में थीं और आम आदमी पार्टी से दिलीप पांडे तो बीजेपी के मनोज तिवारी को यहां 53.86% वोट मिले थे। जबकि, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के प्रत्याशियों को मिला कुल वोट करीब 41% रहा था।

केजरीवाल मॉडल पूरे देश में लागू- सीलमपुर का वोटर
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीलमपुर जैसे मुस्लिम-बहुल इलाके में रहने वाले 21 साल के युवक रमजान को लगता है कि यह चुनाव बदलाव के लिए होगा। इग्नू से मास्टर्स कर रहे इस युवक के मुताबिक, 'हमें उम्मीद है कि केजरीवाल मॉडल पूरे देश में लागू किया जा सकता है। बदलाव की जरूरत है। हमें रोजगार चाहिए। अगर सरकारी रोजगार नहीं है तो अन्य उद्यम का अवसर मिलना चाहिए, कुछ उस तरह से जिस तरह केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के स्कूलों के लिए सोचा है।'

कांग्रेस मुसलमानों को आरक्षण देना चाहती है- तिमारपुर का मतदाता
वहां से करीब 8 किलोमीटर दूर तिमारपुर में चाय की दुकान चलाने वाले प्रतीक कहते हैं, 'हमें एमपी और एमएलए से सिर्फ रोजगार के अलावा कोई उम्मीद नहीं है। मैं ग्रेजुएट हूं और मैं क्या कर रहा हूं? सबसे बड़ी बात तो यह है कि कांग्रेस मुसलमानों को आरक्षण देना चाहती है। इससे ज्यादा क्या होगा?'

उत्तर पूर्वी दिल्ली में कांग्रेस के सामने क्या है चुनौती?
कांग्रेस उम्मीदवार कन्हैया के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी प्रचार कर गए हैं और राहुल गांधी ने भी वोट मांग लिए हैं। लेकिन, जमीन पर सबसे बड़ी दिक्कत ये दिखी है कि कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं का अभाव है। बुराड़ी में तो लगता ही नहीं कि चुनाव कांग्रेस ही लड़ रही है। यही नहीं आम आदमी पार्टी के कैडर भी उस तालमेल के साथ काम नहीं करते दिखे हैं, जैसा कि चांदनी चौक या उत्तर पश्चिमी दिल्ली में दिखा है।

दिल्ली में कांग्रेस का कोई विधायक नहीं है, इसलिए वह पूरी तरह से इंडिया ब्लॉक में अपनी सहयोगी के भरोसे ही नजर आ रही है। वहीं कांग्रेस से तालमेल की कमी को लेकर आम आदमी पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया, 'वे (कन्हैया) तो हमारे विधायकों से मिले तक नहीं कि बेहतर तालमेल के लिए अनुरोध कर सकें। इससे वोटिंग के दिन उम्मीदवार पर बहुत असर पड़ता है।'

अलबत्ता कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान से कन्हैया के लिए कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं का जुगाड़ जरूर किया है। राजस्थान के एक पार्टी एमएलए ने अपनी पहचान नहीं जाहिर होने देने का अनुरोध करते हुए बताया, 'कैंपेन अव्यवस्थित है। कई कैंसिलेशन हुईं, जिसके बारे में हमें बताया तक नहीं गया।'

प्रचार अभियान में भाजपा दिखी आगे
दूसरी तरफ मनोज तिवारी ने बहुत ही सधा हुआ प्रचार अभियान चलाया। उन्होंने खुलकर प्रेस वालों से बात की और आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल की पिटाई वाले मामले से लेकर दिल्ली और देश से जुड़े हर मुद्दों को उठाने की कोशिश की है। हालांकि, उनका टारगेट सेट है, इसीलिए वह पूरे अभियान के दौरान काफी आश्वस्त नजर आए हैं।

उन्होंने वन इंडिया से विशेष बातचीत में कहा, "इस बार का फासला (जीत का मार्जिन) पांच लाख पार का होगा। क्योंकि, वे एक ही जगह पर सोच रहे हैं..कि मेरी पांच लाख से शुरुआत होगी...मतलब वे समझते हैं, उनको सारे मुस्लिम लोग वोट देंगे..तो अगर इस तरह की बात करेंगे तो मैं भी कहूंगा कि उनकी पांच लाख से शुरुआत होगी तो हमारी 20 लाख से शुरुआत होगी।"

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