नीतीश सरकार बोली- लॉकडाउन में फंसे बिहार के छात्रों को वापस लाना संभव नहीं
पटना। देश में कोरोना महामारी को रोकने के लिए लॉकडाउन लागू है। जिसके चलते लाखों प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। लोग लगातार राज्य में वापस लौटने की सरकार से गुहार लगा रहे हैं। वहीं बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पटना हाईकोर्ट में एक शपथ पत्र दायर कर साफ कर दिया है कि, वे लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों और छात्रों को वापस लाने में असमर्थ हैं। नीतीश ने प्रवासी बिहारियो को ना लाने में अपनी मजबूरी का कारण राज्य सरकार ने लॉकडाउन का कानून और इसका सख्ती से पालन करना बताया हैं।
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कोटा में फंसे बिहारी छात्रों वापस बुलाना को संभव नहीं
कोटा समेत अन्य राज्यों में लॉकडाउन के कारण फंसे बिहार के छात्रों को वापस लाने के मामले में राज्य सरकार ने पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को रिपोर्ट पेश कर दिया है। बिहार सरकार द्वारा कोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार के लॉकडाउन निर्देशों के आलोक में छात्रों को वापस लाना संभव नहीं है। हालांकि बिहार सरकार ने अपने जवाब में विस्तृत रूप से अपने अब तक उठाये हर कदम की चर्चा की हैं। जिसमें प्रवासी मजदूरों के लिए उनके खाते में एक हजार रुपए डालने के अलावा विभिन्न शहरों में उनके लिए चलाये जा रहे कैम्प की चर्चा की गयी हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ने कोटा में फंसे छात्रों को मदद का दिया आश्वसन
राज्य सरकार द्वारा छात्रों को वापस बुलाने की असमर्थता के बाद गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष और कोटा से सांसद ओम बिड़ला ने एक वीडियो जारी कर कहा कि जिन राज्य सरकारों ने कोरोना संकट के बीच कोटा में कोचिंग कर रहे विद्यार्थियों को गृह राज्य ले जाने की व्यवस्था की, उन्हें साधुवाद। जो बच्चे अब भी कोटा में हैं, उनके माता-पिता को आश्वस्त करता हूं कि स्थानीय अभिभावक के रूप में, मैं हर समय प्रत्येक बच्चे के साथ हूं।

कई राज्यों ने अपने छात्रों को वापस बुलाया
बता दें कि, लॉकडाउन के कारण राजस्थान के कोटा में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अपने घर वापस नहीं आ पा रहे थे। वहां कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों ने अपने छात्रों को बसों द्वारा लाने की व्यवस्था की। लेकिन बिहार सरकार की ओर से छात्रों को वापस लाने की अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।












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