Nilgiri Mountain Railway: प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर ट्रेन सेवा फिर बहाल, जानिए क्या है खास
ऊटी, 8 सितंबर: नीलगिरी माउंटेन रेलवे ने अपना सफर फिर से शुरू कर दिया है और सेवा बहाल होते ही प्रकृति की गोद में बनी इस रेलवे से यात्रा करने के लिए यात्रियों का मन मचलने लगा है। रेल मंत्रालय ने इस सफर की शुरुआत की जानकारी देते हुए लोगों से इस मनोरम यात्रा का भरपूर आनंद उठाने का आह्वान किया है। यह रेलवे न सिर्फ सुंदर यात्रा के लिए मशहूर है, बल्कि इसकी कल्पना लगभग उतनी ही पुरानी है, जितनी पुरानी भारतीय रेलवे है और इसलिए इस रेलवे की अहमियत और भी बढ़ जाती है।

नीलगिरी पहाड़ों पर फिर से दौड़ पड़ी ट्रेन
रेल मंत्रालय ने नीलगिरी माउंटेन रेलवे की चार खूबसूरत तस्वीरें जारी करके बताया है कि नीलगिरी पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर नजारों का आनंद लेने का वक्त आ गया है। रेल मंत्रालय ने जानकारी दी है कि यह सेवा फिर से बहाल कर दी गई है। मंत्रालय ने लोगों का आह्वान किया है कि रोमांच से भरपूर इस यात्रा का लुत्फ उठाएं और देखें कि इस रूट पर ट्रेन किस तरह से पहाड़ों पर अपना रास्ता बनाती हुई आगे निकलती है। यह रेल रूट चार महीनों तक बंद रहने के बाद शुरू हुआ है। पश्चिमी घाट की खूबसूरत वादियों के बीच से गुजरने वाली यह ट्रेन हमेशा से सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रहा है। (पहली चारों तस्वीर सौजन्य: रेल मंत्रालय ट्विटर)

सेवा शुरू होने के इंतजार में थे लोग
दरअसल, यह ट्रेन सोमवार से ही पटरियों पर दौड़ने लगी है, जिसके बारे में रेलवे ने अब ट्वीट किया है। जिन यात्रियों को इस ट्रेन से सफर का सबसे पहले मौका मिला, वह बहुत ही गदगद हैं। उन्हीं में से त्रिपूर के रहने वाले एम राजेश्वर भी हैं, जिन्होंने अपने परिवार वालों के साथ इस ऐतिहासिक यात्रा का आनंद उठाया है। उन्होंने अपने अनुभव के बारे में बताया है, 'मुझे बताया गया था कि इस ट्रेन से यात्रा के दौरान विशाल चाय के बागानों, वॉटरफॉल्स और घाटियों का नजारा देखने को मिलेगा, जो कि सड़क मार्ग से मिलना मुश्किल है। बीते कई दिनों से मैं इस ट्रेन सेवा के बहाल होने का इंतजार कर रहा था।'

पहले से बुकिंग कराने वालों को ही मौका
नीलगिरी माउंटेन रेलवे न केवल घरेलू पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है, बल्कि विदेशी टूरिस्ट भी इससे यात्रा करने के लिए बहुत ही उत्साहित रहते हैं। पहले यह सेवा कोविड-19 की पहली लहर में निलंबित कर दी गई थी। लेकिन, जब संक्रमण के मामले कम हो गए थे तो इसे फिर से शुरू किया गया था। लेकिन, दूसरी लहर के कहर बरपाने के बाद 21 अप्रैल से इसे फिर से बंद कर दिया गया था। इन चार महीनों में नीलगिरी के बाकी पर्यटन केंद्रों में भी टूरिस्टों का आना रुका हुआ था। लेकिन, अब केस लोड कम होने के बाद पर्यटकों ने एकबार फिर से निकलना शुरू कर दिया है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने के बाद रेलवे ने इस सेवा को बहाल करने का फैसला किया है, लेकिन अभी सिर्फ उन्हीं को इजाजत मिल रही है, जिन्होंने पहले से बुकिंग करा रखी है।

भारतीय रेलवे के जितना ही पुराना है इतिहास
मेट्टुपलियम से ऊटी तक की इस रेलवे लाइन के बारे में जानेंगे तो आपको काफी हैरानी होगी। भारत में पहली ट्रेन सेवा मुंबई से ठाणे के बीच 1853 में शुरू हुई थी। उसके एक साल बाद ही यानी 1854 में ही मेट्टुपलियम से नीलगिरी हिल्स तक माउंटेन रेलवे के निर्माण की पहली योजना तैयार हो गई थी। लेकिन, लालफीताशाही के चलते इस रेलवे के निर्माण का सपना साकार होने में 45 साल लग गए थे। यह रेलवे लाइन पहलीबार जून 1899 में चालू हुई थी और बाद में इसे ऊटी तक विस्तार दिया गया।

क्या है नीलगिरी माउंटेन रेलवे की विशेषता ?
मेट्टुपलियम से ऊटी तक इस लाइन की कुल दूरी 45.88 किलोमीटर है। यह रेलवे लाइन तमिलनाडु के दो जिलों कोयम्बटूर और नीलगिरी को जोड़ती है, जो पश्चिमी घाट की पूर्वी ढलान पर बनी हुई है। मेट्टुपलियम स्टेशन समुद्र तल से करीब 330 मीटर है और ऊटी 2,200 की ऊंचाई पर स्थित है। इस रेलवे लाइन पर कुल 250 पुल बने हुए हैं, जिसमें 32 बड़े हैं। खास बात ये है कि कलार से ऊटी के बीच कुल 16 सुरंगें हैं, जो आज भी अच्छी हालात में बताई जाती हैं। इस रेलवे लाइन पर यात्री गाड़ी के लिए अधिकतम स्पीड 13 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित है। (अंतिम तस्वीर सौजन्य: विकीपीडिया)












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