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Niira Radia को सीबीआई ने क्लीन चिट दी, फोन टैपिंग और 2जी Scam से जुड़ा था नाम

फोन टैपिंग केस में नीरा राडिया को सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी है। 2जी घोटाला, नीरा राडिया बनाम रतन टाटा का मामला गत 2010 से ही सुर्खियों में है। Niira Radia phone tapping cbi clean chit

नई दिल्ली, 21 सितंबर : Nirra Radia को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने क्लीन चिट दे दी है। कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया 8,000 फोन टैप करने के मामले में आरोपी हैं। दिग्गजों की बातचीत टेप करने से संबंधित मामले में सीबीआई ने कहा कि 14 'प्रारंभिक पूछताछ' के बाद कोई मामला नहीं बनने का निष्कर्ष निकला। इस कारण प्रारंभिक पूछताछ बंद कर दी गई। केंद्रीय एजेंसी को आयकर विभाग द्वारा टेप की गई फोन की बातचीत की पड़ताल करनी थी।

अंबानी-टाटा जैसे दिग्गजों से जुड़ा मामला

अंबानी-टाटा जैसे दिग्गजों से जुड़ा मामला

कॉरपोरेट जगत में रिलायंस और रतन टाटा जैसे दिग्गजों संग काम करने वालीं Nirra Radia 2010 में सुर्खियों में आई थीं। 12 साल पुराने इस केस के एक पहलू पर देश की सबसे बड़ी अदालत को भी फैसला करना है। रतन टाटा ने प्राइवेसी के आधार पर नीरा राडिया के खिलाफ याचिका दायर की है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ में सुनवाई होनी है।

रतन टाटा की क्या चिंता है

रतन टाटा की क्या चिंता है

सुप्रीम कोर्ट में Nirra Radia केस में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच के समक्ष 84 वर्षीय उद्योगपति टाटा ने लॉबिस्ट नीरा राडिया और टाटा समूह के बॉस सहित अन्य व्यक्तियों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत सार्वजनिक न करने की अपील की है। नीरा राडिया बनाम रतन टाटा मामले में टाटा ग्रुप के कुछ लोगों की बातचीत प्रकाशित हो गई है। ऐसे में टाटा ने निजता के अधिकार की मांग की है। अपील की गई है कि फोन पर हुई बातचीत का कंटेंट मीडिया आउटलेट्स में प्रकाशित किए जाने पर रोक लगाई जाए।

सुप्रीम कोर्ट में बहस किस बात पर होगी

सुप्रीम कोर्ट में बहस किस बात पर होगी

Nirra Radia, 2जी स्पेक्ट्रम, रतन टाटा का मामला कितना हाईप्रोफाइल है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट में सिद्धार्थ लूथरा, एडिशनल सॉलिसीटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी और प्रशांत भूषण जैसे वकील पैरवी कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान ASG भाटी ने कहा, निजता के अधिकार का फैसला आने के बाद इस केस में कुछ भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा, मामले में पहले भी सीबीआई जांच करने का आदेश दिया गया था। हालांकि, टाटा की पैरवी कर रहे वकील प्रशांत भूषण ने इस केस में बहस की मांग की है। अदालत ने सुनवाई की तारीख नहीं दी है।

फोन पर हुई बातचीत लीक

फोन पर हुई बातचीत लीक

अक्टूबर 2013 में रतन टाटा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कॉर्पोरेट प्रतिद्वंद्विता के कारण राडिया और शीर्ष राजनेताओं, नौकरशाहों और व्यवसायियों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत की टेप मीडिया में लीक हो गई थी। बाद में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में नीरा राडिया, तमिलनाडु से आने वाले डीएमके नेता ए राजा और करुणानिधि की बेटी कनिमोझी का नाम भी सामने आया था।

300 करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया

300 करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया

2007 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की डॉ मनमोहन सिंह सरकार के दौर में 16 नवंबर, 2007 को वित्त मंत्री ने शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि नौ साल के भीतर उसने 300 करोड़ रुपये का व्यापारिक साम्राज्य खड़ा कर लिया। इसके बाद Nirra Radia के फोन की निगरानी हुई। इसी के एक हिस्से के रूप में राडिया और कॉरपोरेट और राजनीतिक हस्तियों की बातचीत को रिकॉर्ड किया गया।

180 दिनों तक फोन टैपिंग

180 दिनों तक फोन टैपिंग

तत्कालीन UPA सरकार ने राडिया की 180 दिनों की बातचीत रिकॉर्ड की। शुरुआत 20 अगस्त 2008 से हुई। 60 दिनों तक फोन टैपिंग की गई। इसके बाद 19 अक्टूबर से 60 दिनों तक फोन टैप किया गया। तीसरे चरण में 11 मई 2009 से 60 दिनों के लिए Nirra Radia का फोन निगरानी में रखा गया। इसके लिए 8 मई 2009 को नया आदेश जारी हुआ था।

केंद्रीय मंत्री ए राजा को जेल जाना पड़ा, बाद में बरी

केंद्रीय मंत्री ए राजा को जेल जाना पड़ा, बाद में बरी

2जी स्पैक्ट्रम आवंटन को भारत के सबसे बड़े घोटालों में एक माना गया। हालांकि, सीबीआई की विशेष अदालत ने घोटाले के आरोपों का सामना कर रहे तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए राजा, द्रमुक सांसद कनिमोझी और कई अन्य लोगों को बरी कर दिया गया था। 1.76 लाख करोड़ के इस घोटाले में विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओ पी सैनी ने दिसंबर 2017 में सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज अलग-अलग मामलों में फैसला सुनाया था।

https://hindi.oneindia.com/news/india/2g-scam-cbi-case-verdict-likely-today-437203.html

क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला

क्या है 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सुनवाई आज से करीब 11 साल पहले 2011 में शुरू हुई। स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। इससे पहले 2010 में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में साल 2008 में बांटे गए 2जी स्पेक्ट्रम पर सवाल खड़े हुए थे। रिपोर्ट में बताया गया था कि स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं की गई। कंपनियों को 'पहले आओ, पहले पाओ' आधार पर टेलीकॉम स्पेक्ट्रम आवंटित किए गए। इससे सरकार को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ। इस मामले में कनिमोझी और ए राजा के अलावा कई और हाईप्रोफाइल लोगों के नाम भी उछले।

2जी केस के प्रमुख आरोपियों पर एक नजर-

2जी केस के प्रमुख आरोपियों पर एक नजर-

  • पूर्व दूरसंचार मंत्री, ए राजा
  • डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि (निदेशक, कलैगनार टीवी प्रा. लि.)
  • रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड
  • पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा
  • दूरसंचार मंत्री के सचिव IAS आरके चंदोलिया

इनके अलावा दर्जनभर से अधिक लोगों पर भी गंभीर आरोप लगे।

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