कितना खतरनाक है कोरोना वायरस का नया वेरिएंट JN.1, अमेरिकी CDC ने चेतावनी के साथ बताया

कोरोना वायरस ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इसका नया वेरिएंट जेएन1 (JN.1) दुनियाभर में फैल रहा है। इसके फैलने की रफ्तार और इससे जुड़े खतरे को देखते हुए अमेरिकी संस्थान ने रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने चेतावनी जारी की है।

सीडीसी ने चिंता जताते हुए कहा कि इस वेरिएंट का तेजी से प्रसार अमेरिकी अस्पतालों को बड़ी संख्या में मरीजों को भर्ती करने के लिए मजबूर कर सकता है। कोविड और फ्लू के संयुक्त प्रभाव को देखते हुए अमेरिकी मेडिकल सिस्टम पर भारी दबाव पड़ने को लेकर संस्थान चिंतित है।

Corona JN1

सीडीसी का कहना है कि कोविड के मरीजों की अस्पताल में भर्ती होने की संख्या काफी ज्यादा बढ़ रही है। गर्मियां खत्म होने के बाद से सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएस-सी) पर भी नजर बनाई हुई है। यह कोरोना की वजह से ही होता है। देश के अधिकांश हिस्सों में इन्फ्लूएंजा बढ़ रहा है और कई क्षेत्रों में रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) एक्टिविटी भी बहुत ज्यादा देखी जा रही है। सीडीसी को ऐसा लग रहा है कि आने वाले समय में हालात बहुत मुश्किल हो सकते हैं।

हॉस्पिटल्स पर फ्लू और कोविड दोनों का डबल दवाब
सीडीसी की माने तो देश के कुछ हिस्सों में बच्चों के अस्पताल में पिछले साल के जितने ही बेड भरे थे। लेकिन इस सप्ताह की शुरुआत में इमरजेंसी रूम के आंकड़ों से पता चला कि पिछले सप्ताह की तुलना में अस्पताल में भर्ती स्कूली उम्र के बच्चों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। संसथान ने बताया कि फ्लू के मामलों में भी तेजी देखि जा रही है। ज्यादा उम्र के लोगों में कोरोना वायरस की दर फ्लू से अधिक है। फ्लू और कोरोना दोनों की वजह से मिडवेस्ट एरिया सहित देश भर में कई नर्सिंग होम की ऑक्यूपेंसी पिछले साल की दरों को पार कर चुकी है। इस कारण स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ी हुई है। सीडीसी ने यह भी अनुमान जताया है कि JN.1 के मामलों में बढ़ोतरी होती रहेगी।

कोरोना वायरस का नया वेरिएंट जेएन.1 कोविड-19 की नई लहर की वजह बनता मालुम पड़ राह है। इसे BA.2.86 वैरिएंट के जैसा माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों के एक समूह के अनुसार JN.1 में परिवर्तन इतने जरुरी नहीं हैं कि मौजूदा टीकों के नए संशोधन की जरुरत हो। हालांकि शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि ये वैक्सीन कम प्रभावी थे।

भारत में भी JN.1 के कई मामले सामने आ चुके हैं। इसका सबसे पहला मामला केरल से सामने आया था। तेजी से फैलते इस संक्रमण ने एक बार फिर लोगों की नींद उड़ा दी है।

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