सावरकर जयंती पर नए संसद भवन का उद्घाटन, क्या 28 मई को 2024 का बिगुल बजेगा?
30 मई को मोदी सरकार के दोनों कार्यकाल का नौवां साल पूरा होने जा रहा है। उससे दो दिन पहले सावरकर जयंती पर नए संसद भवन का उद्घाटन होगा। लोकसभा चुनाव से एक साल पहले यह बड़ा संदेश देने की कोशिश है।

30 मई को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के चार साल पूरे हो रहे हैं। केंद्र में बीजेपी शासन के 9 साल पूरे होने को लेकर पार्टी और सरकार की ओर से काफी तैयारियां की गई हैं। इसी बीच 28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन की तारीख तय की गई है, जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

सावरकर की जयंती के दिन नए संसद भवन का उद्घाटन
सत्ताधारी दल की विचारधारा देखने से यह महज संयोग नहीं लगता कि जिस दिन नए संसद भवन का उद्घाटन होना है, उसी दिन हिंदुत्व के विचारक विनायक दामोदर सावरकर की 140वीं जयंती भी है। वे वीर सावरकर के नाम से भी लोकप्रिय हैं।

सावरकर के नाम पर भड़कता रहा है विपक्ष
बीजेपी को पता है कि वीर सावरकर का स्थान उसके लिए जितना ही ऊंचा है, उतने ही विपक्ष की राजनीति में वह कभी भी एडजस्ट नहीं कर पाते। यही वजह है कि उनके नाम पर सत्तापक्ष और विपक्ष में हमेशा लड़ाई रही है। वैसे उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले शिवसेना गुट के लिए यह असहज करने वाली स्थिति हो सकती है, क्योंकि वह भी वीर सावरकर को अपना और देश का आदर्श मानती है।

पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है नया संसद भवन
नई पार्लियामेंट बिल्डिंग का निर्माण मोदी सरकार के नाम पर आने वाले कई दशकों की सफलता के तौर पर जुड़ने जा रहा है। क्योंकि, कोरोना महामारी के बावजूद इसे जिन चुनौतियों के बीच पूरा किया गया है, वह निश्चित ही तारीफ के काबिल है। पीएम मोदी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है और इसपर उनकी व्यक्तिगत नजर रही है।

150 वर्षों से ज्यादा की सोच के साथ निर्माण
नए संसद भवन का निर्माण अगले 150 से भी अधिक वर्षों के लिए सोच कर किया गया है। नई इमारत में अभी से 150% से भी अधिक सांसदों के बैठने की क्षमता है। त्रिकोणीय के आकार की नई इमारत की थीम कमल, मोर और वट वृक्ष पर आधारित है, जो राष्ट्रीय प्रतीक हैं। संयोग से भाजपा का चुनाव चिन्ह भी 'कमल' निशान है।
Recommended Video


भारतीय प्रतीकों की पहचान होगी नई संसद
लोकसभा सदन मोर की थीम पर आधारित है, जो कि राष्ट्रीय पक्षी है, तो राज्यसभा सदन कमल की थीम पर आधारित है, जो कि राष्ट्रीय पुष्प है। संसद की नई इमारत में लोकसभा में 888 और राज्यसभा में 300 सांसदों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। जबकि, संयुक्त सत्र की व्यवस्था सिर्फ लोकसभा सदन में होगी, जहां लगभग 1,280 सांसद एकसाथ बैठ सकते हैं।

संसद भवन की ग्रैंड ओपनिंग, 2024 का बिगुल!
28 मई को होने जा रहे नए संसद भवन की ग्रैंड ओपनिंग को इसलिए 2024 के लोकसभा चुनाव का बिगुल कह सकते हैं, क्योंकि 30 मई से मोदी सरकार के कार्यकाल के 9 वर्ष होने पर भाजपा महीने भर की व्यापक अभियान लॉन्च करने जा रही है। मोदी सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं।

भारतीय सभ्यता और भव्यता का प्रतीक है नया संसद भवन
नए संसद की भव्यता निश्चित रूप से मोदी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि है। क्योंकि, मौजूदा संसद करीब 100 वर्ष पुरानी हो चुकी है। इसका निर्माण 1927 में ही पूरा हुआ था, जिसे अंग्रेजी हुकूमत ने बनवाया था। लेकिन, नई संसद के कण-कण में भारतीयता, भारतीय संस्कृति, भारतीय सभ्यता की झलक मौजूद है। निश्चित रूप से मोदी सरकार इसके माध्यम से लोगों के बीच बड़ा संदेश देना चाहेगी।

सरकारी स्तर पर भी हो चुकी है खास तैयारी
जहां तक मोदी सरकार के 9 साल की कामयाबियों की बात है तो आकाशवाणी इसे लोगों तक पहुंचाने के लिए खास सीरीज शुरू कर चुका है। ट्रिपल तलाक, उत्तरपूर्वी राज्यों का विकास जैसी बातों को लोगों के सामने रखा जा चुका है। जबकि, बीजेपी की ओर से महा जनसंपर्क अभियान लॉन्च किया जा रहा है। इसमें सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के साथ ही विकास के कार्यों को जनता के सामने रखने की तैयारी है। पिछले कार्यकाल में भी चार साल पूरे होने के बाद इसी तरह से अभियान की शुरुआत की गई थी।












Click it and Unblock the Notifications