कंपनी कराएगी सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम तो देना होगा डबल पैसा,जॉब वाले लोगों के लिए लागू होगा धांसू नियम
New Labour Code: भारत में जल्द लागू होने जा रहे नए लेबर कोड (New Labour Code) ने कामकाजी दुनिया में हलचल मचा दी है। कई लोगों के मन में डर है कि इससे काम का बोझ बढ़ेगा, लेकिन बारीकी से समझने पर यह बदलाव कर्मचारियों की जेब और उनके अधिकारों के लिए एक बड़ा कदम नजर आता है।
नए 'ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSHWC) कोड 2020' का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल वर्किंग आवर्स (Working Hours) का प्रबंधन नहीं, बल्कि ओवरटाइम की नई परिभाषा है। पुराने कानूनों के मुकाबले अब नियमों को अधिक पारदर्शी और कर्मचारी-हितैषी बनाने की कोशिश की गई है। यह बदलाव न केवल फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों पर लागू होगा, बल्कि अब आईटी सेक्टर और कॉर्पोरेट ऑफिस में काम करने वाले करोड़ों प्रोफेशनल भी इसके दायरे में आएंगे।

Labour Law: पुराना नियम बनाम नया नियम, क्या है बड़ा अंतर?
पुराने 'फैक्ट्रीज एक्ट 1948' और नए लेबर कोड के बीच का मुख्य अंतर ओवरटाइम की गणना में छिपा है:
| विवरण | पुराना कानून (Factories Act) | नया लेबर कोड (OSHWC 2020) |
|---|---|---|
| दैनिक कार्य सीमा | अधिकतम 9 घंटे | अधिकतम 8 घंटे |
| ओवरटाइम की शुरुआत | 9 घंटे के बाद | 8 घंटे के बाद ही |
| साप्ताहिक सीमा | 48 घंटे | 48 घंटे |
बड़ा बदलाव: पहले कर्मचारियों को 9वें घंटे के काम के लिए सामान्य वेतन ही मिलता था। अब जैसे ही आप अपने दिन के 8 घंटे पूरे करेंगे, 9वां घंटा 'ओवरटाइम' माना जाएगा और कंपनी को इसके लिए अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
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फैक्ट्री ही नहीं, अब ऑफिस और IT सेक्टर भी दायरे में
पहले वर्किंग आवर्स और ओवरटाइम के कड़े नियम मुख्य रूप से फैक्ट्रियों तक सीमित थे। नए लेबर कोड ने इस दायरे को व्यापक बना दिया है। अब निम्नलिखित सभी संस्थान इन नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे:
- कॉर्पोरेट ऑफिस
- आईटी (IT) कंपनियां
- व्यावसायिक दुकानें
- सभी कमर्शियल एस्टेब्लिशमेंट
'वर्कर' नहीं अब 'एम्प्लॉई' को मिलेगा फायदा
नए नियमों की सबसे बड़ी खूबी इसकी परिभाषा है। कानून में अब केवल "वर्कर" शब्द की जगह "एम्प्लॉई" (Employee) शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
सैलरी लिमिट खत्म: पहले ओवरटाइम के लिए अक्सर एक सैलरी लिमिट तय होती थी, जिससे सीनियर या ज्यादा वेतन वाले लोग बाहर रह जाते थे।
सबके लिए समान अधिकार: अब बिना किसी वेतन सीमा के, हर कर्मचारी ओवरटाइम का हकदार होगा।
कंपनियों की बढ़ेगी चुनौती और खर्च
नया लेबर कोड लागू होने से कॉर्पोरेट जगत और इंडस्ट्री पर वित्तीय बोझ बढ़ना तय है। कंपनियों को अब दो मोर्चों पर काम करना होगा:
वित्तीय बोझ: 9वें घंटे से ही ओवरटाइम भुगतान करने के कारण लेबर कॉस्ट में बढ़ोतरी होगी।
मैनेजमेंट: कंपनियों को अपना वर्क शेड्यूल इस तरह रिडिजाइन करना होगा कि काम भी प्रभावित न हो और ओवरटाइम का खर्च भी सीमित रहे।
कुल मिलाकर, ये नए नियम काम के घंटे बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि काम के बदले मिलने वाले पैसे के सही मूल्यांकन के लिए लाए गए हैं। इससे कर्मचारियों को सीधे आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
कब से लागू होंगे नए लेबर लॉ?
नए लेबर कोड संसद से पास तो हो चुके हैं, लेकिन इन्हें अभी पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। केंद्र सरकार ने चारों कोड - कोड ऑन वेजेस 2019, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और ओएसएचडब्ल्यूसी कोड 2020 को लागू करने के लिए नियम तैयार कर लिए हैं, लेकिन असल लागू होने की तारीख राज्यों की तैयारी पर निर्भर है।
भारत में नए श्रम कानून (Four New Labour Codes) 1 अप्रैल 2026 से पूरी तरह से लागू होने की संभावना है, क्योंकि सरकार इस समय नियमों को अंतिम रूप दे रही है और राज्यों के साथ परामर्श कर रही है।
With AI Inputs
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