पासवान-कुशवाहा ने बिहार में BJP की टेंशन बढ़ाई, कम सीटों पर चुनाव लड़ने को नहीं हैं तैयार
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नई दिल्ली। बिहार में एनडीए के घटक दलों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर घमासान जारी है। बिहार में एलजेपी और आरएलएसपी आगामी लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं। दोनों ही दलों ने यह साफ कर दिया है कि वे अगले लोकसभा चुनाव में उतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं जितनी सीटों पर वे 2014 में लड़े थे। इसके पहले ऐसी खबरें आ रही थीं कि बीजेपी और जेडी (यू) 17-17 सीटों चुनाव लड़ेंगी जबकि और शेष 6 सीटें लोजपा और आरएलएसपी को दी जा सकती हैं।

एनडीए में सीटों के बंटवारे पर घमासान
बीजेपी ने 2014 के चुनाव में बिहार में 22 सीटें जीती थीं, जबकि केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान की एलजेपी ने सात में से छह सीटों पर जीत हासिल की थी और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया था। एलजेपी के बिहार इकाई प्रमुख पशुपति पारस ने उन अटकलों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि अमित शाह और नीतीश कुमार की बैठक के बाद दोनों दल बराबर सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं जबकि इसके लिए एलजेपी और आरएलएसपी कुछ सीटों का बलिदान देने को तैयार हैं।

7 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहेंगे- एलजेपी
पासवान के छोटे भाई पारस ने कहा कि सब मीडिया में हवा-हवाई बातें हो रही हैं। सीटों के बंटवारे पर बात तब तक नहीं बनेगी जब तक एनडीए के सभी चार घटक दलों के प्रमुख एक साथ बैठें। उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा हुआ नहीं है। उन्होंने कहा कि बेशक वे 7 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहेंगे क्योंकि 6 पर उनकी पार्टी ने जीत दर्ज की थी और एक सीट पर वे 7000 वोटों से ही हारे थे। उन्होंने कहा कि उनका जनादेश लोकसभा चुनाव के बाद से कम नहीं हुआ है।

3 सीटों से कम पर आरएलएसपी तैयार नहीं
वहीं, आरएलएसपी ने भी संकेत दिया है कि तीन सीटों से कम पर चुनाव लड़ने की बात वे नहीं मानेंगे। पार्टी के महासचिव ने माधव आनंद ने कहा, 'तीन सीटों से कम पर चुनाव लड़ने के समझौते को स्वीकार करने की बात ही नहीं है। यही बात उपेंद्र कुशवाहा ने बीजेपी के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव से कही थी।'












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