NCP और कांग्रेस में खटास! सोनिया गांधी ने उद्धव ठाकरे को लिखा पत्र तो NCP ने कसा तंज

NCP और कांग्रेस में खटास! सोनिया गांधी ने उद्धव ठाकरे को लिखा पत्र तो NCP ने कसा तंज

NCP On Sonia Gandhi letter to CM Uddhav Thackeray: कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों के कल्याण के उपाय के लिए पत्र लिखा था। इस पत्र को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने कांग्रेस पर तंज कसा है। एनसीपी ने कहा है कि सोनिया गांधी का लिखा गया सीएम ठाकरे का पत्र कांग्रेस नेताओं के बीच गलतफहमी का नतीजा हो सकता है। उन्होंने ये भी कहा है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर उनके नेताओं के बीच मतभेद है, यही वजह है कि पार्टी नेता एक-दूसरे से बात नहीं करते हैं। इसलिए सोनिया गांधी ने सीएम उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा है।

सोनिया गांधी ने पत्र में की ये मांग

सोनिया गांधी ने पत्र में की ये मांग

वहीं शिवसेना ने कहा है कि राज्य में उनके और कांग्रेस के बीच सबकुछ ठीक चल रहा है। सोनिया गांधी ने पत्र लिखते हुए सीएम उद्धव ठाकरे को महा विकास अघड़ी (एमवीए) सरकार को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) की याद दिलाई है। जिसमें एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस की भागीदारी है। इस पत्र में सोनिया गांधी ने सीएम ठाकरे से दलित और आदिवासी समुदायों के सदस्यों के कल्याण के लिए कुछ उपायों को लागू करने को कहा है।

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    सोनिया गांधी के पत्र NCP नेता नवाब मलिक ने क्या कहा?

    सोनिया गांधी के पत्र NCP नेता नवाब मलिक ने क्या कहा?

    सोनिया गांधी के पत्र प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी मंत्री और प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा, ''पत्र कांग्रेस के भीतर संचार की कमी का परिणाम हो सकता है। महामारी के कारण सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं का कामकाज बाधित हुआ। इसके अलावा, आदिवासी विकास विभाग का नेतृत्व एक कांग्रेस मंत्री करते हैं। पार्टी के नेताओं को संबंधित मंत्री से पूछना चाहिए कि वास्तविकता क्या है?''

    महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने दी प्रतिक्रिया

    महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने दी प्रतिक्रिया

    महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने कहा कि सोनिया गांधी का पत्र नाराजगी से नहीं, बल्कि एक संवाद प्रक्रिया के हिस्से के रूप में था। बालासाहेब थोरात ने कहा, ''कांग्रेस का रुख हमेशा समाज के गरीब और वंचित वर्गों के उत्थान के पक्ष में रहा है और सोनिया गांधी का पत्र बातचीत का हिस्सा था कि कल्याणकारी उपाय कैसे किए जा सकते हैं। कोई नाराजगी नहीं है।''

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