'ज्यूडीशियरी का अपमान करने का कोई इरादा नहीं', NCERT विवाद पर मोदी के मंत्री ने मांगी माफी, सुप्रीम कोर्ट सख्त
Education minister Dharmendra Pradhan NCERT Row: 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' चैप्टर वाली NCERT की किताब को लेकर उठे विवाद ने अब बड़ा संवैधानिक रूप ले लिया है। एक ओर सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब पर सख्त रुख अपनाते हुए इसे बैन कर दिया है, तो दूसरी ओर केंद्र सरकार ने सफाई देते हुए कहा है कि न्यायपालिका का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। नरेंद्र मोदी सरकार के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पूरे मामले पर माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पूरे मामले पर खेद जताते हुए कहा कि वे न्यायपालिका का "सर्वोच्च सम्मान" करते हैं। उनके मुताबिक, जैसे ही यह मामला उनके संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत NCERT को सभी संबंधित किताबें वापस लेने और उनके वितरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए।

उन्होंने साफ कहा कि सरकार की ओर से न्यायपालिका को बदनाम करने की कोई मंशा नहीं थी। साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच कराई जाएगी और विवादित चैप्टर तैयार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार न्यायपालिका का पूरा सम्मान करती है और कोर्ट के सभी निर्देशों का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ उससे वे बेहद दुखी हैं, लेकिन उन्होंने साफ किया कि न्यायपालिका का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती (Supreme Court Action NCERT Row)
26 फरवरी को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 8 की सोशल साइंस की उस किताब की छपाई और वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी, जिसमें 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' से जुड़ा चैप्टर शामिल था। कोर्ट ने पहले से भेजी गई सभी किताबों को वापस लेने और डिजिटल कॉपियां हटाने का आदेश भी दिया।
साथ ही NCERT के डायरेक्टर और केंद्रीय शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। कोर्ट ने सिलेबस से जुड़ी बैठकों की कार्यवाही, चैप्टर लिखने वाले लेखकों के नाम और उनकी योग्यता की जानकारी भी मांगी है।
CJI की कड़ी टिप्पणी (CJI Remark)
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला न्यायपालिका को बदनाम करने की "सोची-समझी साजिश" जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने साफ किया कि दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी और यह केस इतनी आसानी से बंद नहीं होगा। यहां तक कि NCERT पर अवमानना की कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। अगली सुनवाई 11 मार्च को तय की गई है। बुधवार को CJI की फटकार के बाद NCERT पहले ही माफी मांग चुका है।
सरकारी सूत्रों की दलील और कोर्ट के निर्देश (Government Response & Court Directions)
सरकारी सूत्रों का कहना है कि न्यायपालिका से जुड़े आंकड़े संसदीय रिकॉर्ड और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड में उपलब्ध हैं। हालांकि, इन तथ्यों के क्रॉस वेरिफिकेशन के लिए केंद्र से सलाह नहीं ली गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने चार अहम निर्देश दिए हैं। पहला, केंद्र और राज्यों के शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करें कि किताब स्कूलों, प्रिंट या डिजिटल किसी भी रूप में जनता की पहुंच से तुरंत हटाई जाए। दूसरा, आदेश के बाद वितरण को जानबूझकर अवमानना माना जाएगा। तीसरा, सभी राज्यों के मुख्य सचिव दो हफ्तों में कार्रवाई रिपोर्ट सौंपें। चौथा, जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट एक कमेटी बनाएगा जो जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगी।
स्पष्ट है कि यह मामला अब सिर्फ एक किताब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा और न्यायपालिका के बीच संवेदनशील संतुलन का मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में जांच और सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी।












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