आप भी जीतना चाहते हैं 35 लाख रुपए, तो NASA की इस प्रतियोगिता में लें हिस्सा

नासा ने इस प्रतियागिता का नाम रखा है- सीओटू कन्वर्जन चैलेंज, जिसके विजेता को 35 लाख का ईनाम दिया जाएगा।

नई दिल्ली। मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश में जुटे वैज्ञानिकों के सामने वहां की वायुमंडल में मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड बड़ी चुनौती बन गई है। दरअसल, मंगल ग्रह की हवा में 96 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड है और ऑक्सीजन नहीं के बराबर। ऐसे में बिना ऑक्सीजन के मंगल ग्रह पर जीवन असंभव है। अब इस समस्या से निजात पाने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक प्रतियोगिता का आयोजन किया है। इस प्रतियोगिता में जीतने वाले व्यक्ति को 35 लाख रुपए का ईनाम दिया जाएगा।

प्रतियागिता का नाम- सीओटू कन्वर्जन चैलेंज

प्रतियागिता का नाम- सीओटू कन्वर्जन चैलेंज

नासा ने इस प्रतियागिता का नाम रखा है- सीओटू कन्वर्जन चैलेंज (CO2 Conversion Challenge), जिसके विजेता को 35 लाख का ईनाम दिया जाएगा। दरअसल नासा को मालूम है कि अभियान के दौरान मंगल ग्रह पर सभी जरूरी सामान ले जाना संभव नहीं है। ऐसे में मंगल ग्रह पर उतरने वाले मनुष्यों को आत्मनिर्भर होना होगा। उन्हें खुद ही अपना भोजन पैदा करना होगा, खुद ही पानी का इंतजान करना होगा और उन सभी चीजों को खुद तैयार करना होगा, जो लाल ग्रह पर उसके जीवन के लिए जरूरी हैं। 'सीओटू कन्वर्जन चैलेंज' के तहत लोगों से कहा गया है कि वो ऐसे आइडिया लेकर आएं, जिनसे मंगल ग्रह पर मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड से भरे वायुमंडल को जीवन के लिए उपयोगी बनाया जा सके।

प्रतियोगिता में क्या पूछा गया है?

प्रतियोगिता में क्या पूछा गया है?

प्रतियोगिता में उन तरीकों के बारे में पूछा गया है, जिनसे मंगल ग्रह पर मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड को अन्य उपयोगी यौगिकों में बदला जा सके। इन तरीकों का इस्तेमाल आने वाले समय में मंगल ग्रह पर होने वाले नासा के अनुसंधानों के दौरान भी किया जाएगा। गौरतलब है कि कार्बन और ऑक्सीजन मानव जीवन के लिए आधारभूत जरूरतों में से एक हैं। ये दोनों प्राकृतिक शक्कर बनाने के लिए वे भी आवश्यक हैं। सीओ-2 से ग्लूकोज या चीनी निकालने का तरीका खोजना ना केवल मंगल पर रहने वाले मनुष्यों को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार होगा, बल्कि पृथ्वी पर जैव-निर्माण का एक नया तरीका भी तैयार करेगा।

5 टीमों को 35-35 लाख का ईनाम

5 टीमों को 35-35 लाख का ईनाम

नासा ने अपने सीओटू कन्वर्जन चैलेंज को दो हिस्सों में बांटा है। पहले चरण के तहत, टीमों को कन्वर्जन सिस्टम का एक डिजाइन और ब्यौरा पेश करना होगा, जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड को ग्लूकोज में बदलने के के लिए भौतिक-रासायनिक दृष्टिकोणों की एक विस्तृत डिटेल रिपोर्ट शामिल होगी। नासा ऐसी 5 सफल टीमों को 35-35 लाख रुपए तक ईनाम देगा, जिसकी घोषणा अप्रैल 2019 में होगी। दूसरे चरण में पहले चरण की उन टीमों को आने की अनुमति दी जाएगी, जो चुनौतीपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक व्यवहारिक दृष्टिकोण की रिपोर्ट सौंपेंगी। इस चरण की विजेता टीम को 5.30 करोड़ रुपए का ईनाम दिया जाएगा।

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