नरोदा पाटिया दंगे के दोषियों की सज़ा पर फ़ैसला

नरोदा पाटिया दंगा
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नरोदा पाटिया दंगा

2002 के नरोदा पाटिया मामले में गुजरात हाई कोर्ट दोषी क़रार दिए गए तीन अभियुक्तों को सोमवार को सज़ा सुना सकता है.

ये अभियुक्त हैं उमेश सुराभाई भरवाड़, पदमेंन्द्र सिंह जसवंत सिंह राजपूत और राजकुमार उर्फ़ राजू गोपीराम चौमल.

साल 2012 के एक फ़ैसले में तीनों दोषियों- पीजी राजपूत, राजकुमार चौमल और उमेश भरवाडॉ समेत 29 दूसरे को एसआईटी की विशेष अदालत ने बरी कर दिया था.

लेकिन इसके बाद याचिकाओं की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस साल 20 अप्रैल को इन तीनों को इन्हें आगज़ानी करने और हिंसक भीड़ का हिस्सा बनने का दोषी पाया जबकि बाक़ी 29 लोगों को बरी कर दिया था.

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माया कोडनानी
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नरोदा पाटिया दंगाः घटनाक्रम

गुजरात के गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के कुछ डिब्बे जलाए जाने के बाद जो दंगे भड़के उनमें नरोदा पाटिया में हुई हिंसा सबसे जघन्य दंगों में से एक है. देखिए इस मामले में कब क्या हुआ.

  • 25 फरवरी 2002: अयोध्या से बड़ी संख्या में कारसेवक साबरमती एक्सप्रेस से अहमदाबाद जाने के लिए सवार हुए.
  • 27 फरवरी 2002: अहमदाबाद जाने के दरम्यान गोधरा पहुंची ट्रेन के कुछ डिब्बों में भीड़ ने आग लगाई, जिसमें 59 कारसेवकों की जान चली गई.
  • 28 फरवरी 2002: विश्व हिंदू परिषद ने गोधरा कांड के विरोध में गुजरात बंद बुलाया. इसी दौरान ग़ुस्साई भीड़ ने नरोदा पाटिया इलाक़े में हमला कर दिया. अहमदाबाद के नरोदा पाटिया में हुए दंगों में मुस्लिम समुदाय के 97 लोगों की मौत हुई थी और करीब 33 लोग घायल हुए थे. आरोप है कि इस भीड़ का नेतृत्व राज्य की बीजेपी सरकार में मंत्री रहीं माया कोडनानी ने किया था और बजरंग दल के नेता रहे बाबू बजरंगी इसमें शामिल थे.
  • 2007 में एक स्टिंग ऑपरेशन में बाबू बजरंगी ने कथित तौर पर ये माना था कि वे दंगों में शामिल थे.
  • 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच पुलिस की बजाय कोर्ट की गठित की गई कमिटी यानी स्पेशल जांच टीम करे.
  • अगस्त 2009 में नरोदा पाटिया में हुए दंगे पर मुक़दमा शुरू हुआ और 62 आरोपियों के ख़िलाफ़ आरोप दर्ज किए गए. सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त विजय शेट्टी की मौत हो गई. सुनवाई के दौरान 327 लोगों के बयान दर्ज किए गए. इनमें पीड़ितों के अलावा डॉक्टर और पुलिस अधिकारी और सरकारी अधिकारी भी शामिल थे.
  • 29 अगस्त 2012 को कोर्ट ने नरोदा पाटिया दंगों के मामले में बाबू बजरंगी और माया समेत 32 लोगों को दोषी ठहाराया, जबकि 29 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया. सज़ा सुनाई गई 31 अगस्त को.
  • 31 अगस्त 2012 को कोर्ट ने तत्कालीन विधायक और मोदी सरकार की पूर्व मंत्री कोडनानी को "नरोदा इलाके में दंगों की सरगना" क़रार दिया था और 28 साल क़ैद की सज़ा सुनाई थी. बाबू बजरंगी को आजीवन कारावास की सज़ा और बाक़ी दोषियों को 21 सालों की सज़ा दी गई.
  • 20 अप्रैल 2018 को गुजरात हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फ़ैसले को पलटते हुए इस मामले में माया कोडनानी समेत 18 लोगों को बरी कर दिया. अदालत का कहना था कि पुलिस ने कोई ऐसा गवाह पेश नहीं किया जिसने माया कोडनानी को कार से बाहर निकलकर भीड़ को उकसाते देखा हो. कोर्ट ने बाबू बजरंगी की सज़ा को भी आजीवन कारावास से कम कर 21 साल कर दिया था. बाबू बजरंगी समेत 11 लोगों को 21 साल की सज़ा सुनाई गई थी जबकि एक व्यक्ति को 10 साल की सज़ा सुनाई गई थी.
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