मोदी पर ‘मन’ बदलने लगे : विदेशी कैमरून से देशी अय्यर तक!
अहमदाबाद। भारतीय जनता पार्टी द्वारा नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के साथ ही अब धीरे-धीरे उन्हें लोगों का समर्थन मिलता जा रहा है। आश्चर्य तो तब होता है, जब मोदी की तारीफ में ऐसे लोग भी कूद पड़ते हैं, जो वर्तमान में विरोधी दलों के हैं। उससे भी बड़ा आश्चर्य यह है कि कई ऐसे लोग भी मोदी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवार का समर्थन करते देखे जा रहे हैं, जो कभी 2002 के गुजरात दंगों को लेकर उनका विरोध जता चुके हैं।
नरेन्द्र मोदी गुजरात दंगों के बाद लगातार विवादों में रहते आए हैं और इन दंगों को लेकर जहाँ वे चौतरफा आलोचनाओं का शिकार होते रहे हैं, तो उनका समर्थन करने वाले भी लाइमलाइट में अनायास ही आ जाते हैं। गुजरात विधानसभा चुनाव 2012 के बाद तो मोदी का कद लगातार बढ़ता गया, तो निंदकों के साथ ही समर्थकों की संख्या भी तेजी से बढ़ती गई। हालात ये हो गए कि आज मोदी भारत के भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किए जा रहे हैं। उनका विरोध करना तो एक फैशन कहलाता है और साथ ही कई लोगों की आदत में भी यह चीज सुमार हो चुकी है, लेकिन आश्चर्य तब होता है, जब कई ऐसे लोग मोदी के समर्थन में आ खड़े हो जाते हैं, जो कभी उनके कट्टर विरोधी रहे हैं।

भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने से पहले भी जहाँ मोदी अक्सर अपने आलोचकों में प्रशंसनीय रहे हैं, वहीं खुलेआम मोदी की प्रशंसा करने के कथित अपराध में अनेक विरोधी दलों के नेताओं को अपने दल में ही आलोचना, अनुशासनात्मक कार्रवाई से लेकर निलंबन और निष्कासन तक का दंड झेलना पड़ा है, लेकिन अब जबकि मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं, तो अनेक ऐसे लोगों की भी पसंद बनते जा रहे हैं, जो कभी उनके कट्टर विरोधी और आलोचक रहे हैं।
मोदी के उभरते कद को भले आज अमरीका भाँपते हुए भी नजरअंदाज कर रहा हो, परंतु वह गुजरात और भारत के साथ बेहतर द्विपक्षीय सम्बंध बनाए रखने की बात से कभी पीछे नहीं हटा है। भले ही अमरीका दंगों पर अटक कर मोदी को वीजा देने की नीति बदलने पर विचार न करने की बात करता हो, परंतु फिर भी अमरीका में ही मोदी समर्थकों की कमी नहीं है और अमरीका को इस बात का इल्म भी है कि मोदी जिस प्रकार तेजी से बढ़ रहे हैं, वे प्रधानमंत्री बन भी सकते हैं और उन परिस्थितियों में उसे कोई न कोई रास्ता जरूर निकालना होगा। दूसरी तरफ ब्रिटेन तो पहले ही मोदी की आभा और गुजरात को लेकर नरम रुख अपनाने लगा है। अब जबकि मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं, तब स्वयं ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी से दोस्ताना संबंध विकसित करने पर इच्छा जताई है। जबकि अमेरिका के शीर्ष राजनयिक रहे कार्ल एफ इंडरफर्थ ने ओबामा सरकार को सलाह दी है कि वह भी नमो से संपर्क कायम करने का रास्ता खोजे, क्योंकि भाजपा ने 2014 के चुनावों के लिए उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
इधर देश में भी मोदी का समर्थन करने वालों की तादाद बढ़ने लगी है। राजनेताओं के अलावा अन्य क्षेत्रों के लोग, जो कभी मोदी विरोधी रहे हैं, भी मोदी को लेकर अपना मन बदलने लगे हैं। इनमें ताजा नाम जुड़ा है सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर का। अय्यर ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने का स्वागत किया और कहा कि यह सही समय पर कदम उठाया गया है। 2002 के दंगों को लेकर कभी मोदी के आलोचक रहे अय्यर ने गत अप्रेल में ही मोदी पर यू-टर्न ले लिया था, जब मोदी केरल के नारायण गुरु शिवगिरी मठ गए थे। अब अय्यर ने मोदी के जन्म दिवस पर उन्हें एक पत्र लिख कर कहा कि उनका राजनीति के साथ कोई संबंध नहीं है। लेकिन इसके बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर वह इस चयन का स्वागत करते हैं। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री को सकारात्मक राष्ट्रीयता से परिपूर्ण और वैश्विक व्यक्तित्व करार दिया है।
जस्टिस कृष्ण अय्यर ने कहा कि देश में एकमात्र गुजरात ने सबसे बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा का विनियोग करके श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सोलर स्टेट बनाया है। उन्होंने इस कार्य की सराहना करते हुए कहा कि महात्मा गांधी और संविधान के आदर्शों के अनुरूप शराबबंदी के विचार का पालन करके एकमात्र गुजरात ने ही शराबबंदी पर अमल किया है। गुजरात के सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार खत्म हुआ है और उन सभी सत्कार्यों के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व की प्रशंसा होनी ही चाहिए।
अय्यर ने कहा कि मोदी के प्रशासनिक कौशल्य को राष्ट्रीय समर्थन मिल रहा है। भारत के भावी प्रधानमंत्री के तौर पर श्री नरेन्द्र मोदी स्वराज के महान सिद्धांतों को चरितार्थ करेंगे और देश में से गरीबी दूर करेंगे। मैं समाजवादी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हूं और श्री नरेन्द्र मोदी का समर्थन इसलिए करता हूं क्योंकि वह भी समाजवादी हैं और मानवीय मूल्यों, अधिकारों की रक्षा, भारत में बंधुत्व, न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में गांधी मूल्यों के संवाहक रहे हैं। मोदी प्रधानमंत्री पद पर राष्ट्रीय गरिमा और भारत के लोगों की आशा-आकांक्षाओं को परिपूर्ण करेंगे।
उल्लेखनीय है कि जस्टिस अय्यर की छवि एक एक्टिविस्ट जज की रही है. जस्टिस अय्यर ने ही 24 जून, 1975 को इंदिरा गांधी की अपील पर ये फैसला सुनाया था कि वो बतौर प्रधानमंत्री काम तो कर सकती हैं, लेकिन संसद में बतौर सांसद बहस में हिस्सा नहीं ले सकतीं और न ही वोट कर सकती हैं।












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