कश्‍मीर बाढ़ राहत कार्य में क्‍या था नरेंद्र मोदी का राेल

नई दिल्‍ली।जम्‍मू-कश्‍मीर में आई भयानक बाढ़ में जो राहत कार्य चलाया जा रहा था, उसकी कमान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हाथों में ले रखी थी। युद्धस्‍तर पर राहत कार्य चलाया जाए, इस बात को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनिश्चित किया था।

सिर्फ इतना ही जम्‍मू कश्‍मीर बाढ़ में राहत कार्य पिछले वर्ष उत्‍तराखंड में आई त्रासदी की तुलना में कहीं ज्‍यादा तेज थे।

रात में बुलाई मोदी ने विशेष मीटिंग
कश्‍मीर बाढ़ से जुड़े राहत कार्यों में मोदी के शामिल होने और इससे जुड़ी कई जानकारियां कैबिनेट सचिव अजि‍त सेठ ने टीवी टुडे को दिए इंटरव्‍यू में दी है।

अजित सेठ ने इस इंटरव्‍यू में बताया है कि जहां बतौर कैबिनेट सचिव उन्‍होंने सेनाओं के साथ तालमेल बनाया तो वहीं मोदी ने पूरे राहत कार्य पर दिन और रात अपनी नजर रखी।

कश्‍मीर घाटी में जब पानी दाखिल होना शुरू हुआ, उसी समय मोदी सरकार ने रात में क्राइसिस मैनेजमेंट की एक टीम के साथ रात में ही मीटिंग बुलाई।

इस मीटिंग में उन्‍होंने बाढ़ की गंभीरता के बारे में जानकारी ली और फिर उन्‍होंने अजित सेठ और सभी अधिकारियों को राहत कार्य से जुड़े निर्देश जारी किए।

मोदी के निर्देश पर 65 एयरक्राफ्ट पहुंचे घाटी

सात सितंबर को जब घाटी और श्रीनगर बाढ़ के पानी में डूब गया तब देश की चिंताएं और बढ़ गईं। सेना और वायुसेना के 65 एयरक्राफ्ट्स को डेप्‍लॉय किया गया ताकि राहत कार्य तेजी से शुरू हो सकें।

सेनाओं की ओर से अब तक का यह सबसे बड़ा बेड़ा था जिसे किसी राहत कार्य में लगाया गया था। यह सबकुछ नरेंद्र मोदी के एक आदेश के बाद संभव हो सका।

करीब 1,300 टन खाने के सामान के साथ ही 30 डाक्‍टरों की एक टीम को श्रीनगर में भेजा गया। मोदी रात-रात जागकर राहत कार्य पर अपनी नजर रखते थे और इससे जुड़ी जानकारियां हासिल करते थे।

ओएनजीसी के तेल कुओं से एयरलिफ्ट कराए गए पंप

सबसे बड़ी चुनौती श्रीनगर से पानी को बाहर करना था। श्रीनगर में बड़े पंप न होने की वजह से फैसला लिया गया कि ओएनजीसी के तेल के कुओं में लगे पंपों के साथ ही कोयले की खदान में लगे पंपों को एयरलिफ्ट कर वहां पर पहुंचाया जाए।

इसके साथ ही मोदी ने भी अधिकारियों को सख्‍त आदेश दे दिए हैं कि सभी बैंक और इंश्‍योरेंस कंपनियां जल्‍द से जल्‍द बाढ़ पीड़‍ितों को उन्‍हें और उनके परिवार को क्‍लेम की राशि अदा कर दें।

इसके साथ ही मोदी ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी तरह से फंड की कोई कमी न हो और अतिरिक्‍त 1,000 करोड़ रुपए राहत के लिए मुहैया करा दिए गए हैं।

तस्‍वीरों में देखिए बाढ़ के बाद घाटी का हाल

दुकानों में कीचड़

दुकानों में कीचड़

श्रीनगर में अपनी दुकान से कीचड़ साफ करता दुकानदार। शुक्रवार से घाटी में जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौटती नजर आई।

बाढ़ ने लगाई करोड़ों की चपत

बाढ़ ने लगाई करोड़ों की चपत

बाढ़ की वजह से श्रीनगर के व्‍यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। किसी तरह से वह फिर से अपना काम शुरू करने की जद्दोजहद में जुट गए हैं।

सदमें में लोग

सदमें में लोग

माना जा रहा कि अकेले श्रीनगर के व्‍यापारियों को बाढ़ की वजह से करीब 350 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

यासीन मलिक भी मौजूद

यासीन मलिक भी मौजूद

शुक्रवार को श्रीनगर के बादशाह ब्रिज में एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन हआ। इस प्रार्थना सभा में बाढ़ में मारे गए लोगों के लिए दुआएं मांगी गईं। इस प्रार्थना सभा में यासीन मलिक भी मौजूद था।

श्रीनगर के गुरुद्वारे में सेवा

श्रीनगर के गुरुद्वारे में सेवा

श्रीनगर के संत नगर स्थित एक गुरुद्वारे में विशेष लंगर अोयोजित किया गया। इस लंगर में बाढ़ में फंसे लोगों को भोजन कराया गया।

डॉक्‍टरों की टीम मौजूद

डॉक्‍टरों की टीम मौजूद

घाटी में इस समय डॉक्‍टरों की टीम मौजूद है। इस टीम की ओर से बाढ़ पीड़‍ितों को विशेष मेडिकल सहायता मुहैया कराई जा रही है।

लगे हुए हैं पंप

लगे हुए हैं पंप

श्रीनगर के कई हिस्‍सों में अभी भी पानी भरा हुआ है। वहां पर बड़े-बड़े पंपों को लगा‍कर पानी निकाले जाने का काम अभी भी जारी है।

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