पहले व्‍यक्ति हैं नरेंद्र मोदी जिन्‍हें एक कानून की वजह से अमेरिका ने नहीं दिया वीजा

narendra modi-USA
नई दिल्‍ली। नरेंद्र मोदी को अमेरिका की ओर से वीजा न मिलने की खबर खूब राजनीति हुई और कई तरह की बातें की गई लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि नरेंद्र मोदी दुनिया के पहले ऐसे व्‍यक्ति हैं जिन्‍हें अमेरिका वहां पर बने एक कानून की वजह से एंट्री नहीं दे रहा है।

वर्ष 1998 का 'हास्‍यास्‍पद' कानून

इस कानून की वजह से पहले वर्ष 2005 में उस समय के अमेरिकी राष्‍ट्रपति जॉर्ज डब्‍ल्‍यू बुश को झुकना पड़ा तो अब बराक ओबामा इस कानून के आगे मजबूर हैं। वॉल स्‍ट्रीट जनरल ने सोमवार को लिखा कि कभी-कभी अमेरिकी नीतियां काफी हास्‍यास्‍पद साबित होती हैं और उन्‍हें समझ पाना काफी मुश्किल है।

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अगले कुछ हफ्तों में भारत जो कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है अपने प्रधानमंत्री को चुन लेगा और इस बात की पूरी संभावना है कि जिस व्‍यक्ति को अमेरिका की ओर से वीजा देने से इंकार किया जा रहा है वही इस देश का प्रधानमंत्री बनेगा।

नरेंद्र मोदी जो कि बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार हैं उन्‍हें नौ वर्ष पहले अमेरिकी अधिकारियों की ओर से उस समय वीजा देने से साफ इंकार कर दिया था जब वह न्‍यूयॉर्क के मैडीसन स्‍क्‍वॉयर गार्डन पर

भारतीय-अमेरिकियों की एक रैली को संबोधित करने वाले थे। मोदी इस रैली में जाने के लिए तैयारी कर रहे थे और तभी उन्‍हें खबर मिली कि अमेरिका ने उन्‍हें वीजा देने से साफ इंकार कर दिया है।

वर्ष 2005 में आया वह फैसला इसलिए आया क्‍योंकि नरेंद्र मोदी वर्ष 2002 में गोधरा दंगों को रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहे थे।

खुद अमेरिका में नहीं है लोगों का इस कानून की जानकारी

दरअसल वर्ष 1998 में अमेरिकी स्‍टेट डिपार्टमेंट की ओर से एक ऐसा कानून पास किया गया था जिसकी जानकारी आज भी बहुत लोगों को नहीं है। अमेरिकी स्‍टेट डिपार्टमेंट की ओर से पास किए गए इस कानून के तहत अमेरिकी राजदूतों में तैनात विदेशी अधिकारी किसी भी ऐसे व्‍यक्ति को वीजा की मंजूरी नहीं दे सकते जिस पर धार्मिक स्‍वतंत्रता के उल्‍लंघन की जिम्‍मेदारी हो।

नरेंद्र मोदी दुनिया के पहले ऐसे व्‍यक्ति हैं जिन्‍हें अमेरिका की ओर से इस कानून के तहत वीजा देने से इंकार किया गया था। अमेरिकी अधिक‍ारियों ने खुद इस बात की पुष्टि की है।

वर्ष 2005 में जॉर्ज डब्‍लूय बुश के प्रशासन की ओर से वीजा को मंजूरी न देने के उस फैसले ने अब बराक ओबामा को भी बांधकर रखा है। अमेरिका अभी तक नरेंद्र मोदी को वीजा देने से इंकार करता आया है लेकिन अगर मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो फिर उसे अपना फैसला वापस लेकर मोदी को अमेरिकी वीजा देना पड़ेगा।

बुश के दूसरे शासनकाल में पूर्व अमेरिकी स्‍टेट विभाग में सचिव रहे निकोलस बर्न की मानें तो अब ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे और ऐसे में ओबामा प्रशासन को उन्‍हें वीजा देना होगा।

अमेरिका में ही हुआ था इस कानून का विरोध
वर्ष 1998 में जब कांग्रेस ने इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम एक्‍ट को पास किया तो अमेरिका ने इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम पर एक स्‍टैंडिंग कमीशन बनाई ताकि धार्मिक आत्‍याचार से लड़ा जा सके।

उस समय कांग्रेस के कई सदस्‍य इस बात से चिंतित थे कि चीन और सूडान जैसी जगहों पर क्रिश्चियन को कई तरह के आत्‍याचारों को सामना करना पड़ता है।

नेशनल काउंसिल ऑफ चर्च की ओर से उस समय चेतावनी भी दी गई कि नए कानून की वजह से क्रिश्चियनों को दूसरे धर्मों को मानने वाले लोगों की ओर से बहिष्‍कार का सामना तक करना पड़ सकता है।

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