रीयल लाइफ ‘वीर-जारा’ से कम नहीं है ये प्रेम कहानी: आतंक के झूठे आरोप में 14 साल जेल में रहे आमिर, आलिया ने नहीं छोड़ा साथ

नई दिल्‍ली। शाहरुख खान और प्रिटी जिंटा अभिनीत फिल्म 'वीर-जारा' तो सबने देखी होगी। इस लाजवाब लव स्‍टोरी सबको याद भी होगी। लेकिन क्‍या आपने बिल्‍कुल ऐसी ही कोई लव स्‍टोरी रीयल लाइफ में देखी है। शायद नहीं। हम आपको बताते हैं दिल्ली, रोहतक, सोनीपत और गाजियाबाद में दिसंबर 1996 से दिसंबर 1997 के बीच 20 बम धमाकों में 5 लोगों की मौत मामले में झूठे फंसाये गये मोहम्मद आमिर खान के बारे में। आमिर का कहना है कि उनकी जिंदगी भी फिल्म 'वीर-जारा' से प्रेरित है। आमिर को इस मामले में फंसने के बाद जेल से बाहर निकलने में 14 साल लग गये। बरी होने से पहले आमिर ने आतंक के आरोप झेले और लंबा वक्त जेल की सलाखों के पीछे गुजारा। लेकिन इस दौरान प्रेमिका आलिया के प्यार ने उनके जख्मों पर मरहम लगाने का काम किया। विस्‍तार से जानिए सबकुछ

आलिया ने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा, हमारी कहानी वीर-जारा जैसी

आलिया ने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा, हमारी कहानी वीर-जारा जैसी

आमिर ने एक पाकिस्तानी लड़की और जेल में बंद एक भारतीय व्यक्ति के दशकों बाद फिर से मिलने की कहानी वाली फिल्म वीर-जारा को याद करते हुए न्‍यूज एजेंसी पीटीआई से खास बातचीत की। उन्‍होंने कहा कि इन परिस्थितियों में जब पूरा देश आतंकवादी कह रहा था आलिया ने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आमिर को अपनी तरह के पहले मुआवजे के तहत पांच लाख रुपये देने का फैसला किया था। अब आमिर ने शादी कर ली है और उनकी चार साल की एक बेटी है।

जानिए कब और कैसे परवान चढ़ा था आमिर-आलिया का प्‍यार

जानिए कब और कैसे परवान चढ़ा था आमिर-आलिया का प्‍यार

आमिर और आलिया का प्यार दो दशक से भी पहले परवान चढ़ा था जब वे दिल्ली में एक ही ट्यूशन क्लास में साथ जाते थे। दो युवा दिलों की कहानी में 1998 में फरवरी की रात को मोड़ आ गया जब उस समय 18 साल के छात्र रहे आमिर का पुरानी दिल्ली की एक सड़क से पुलिस ने अपहरण कर लिया। 2012 में 14 साल बाद जब वह 32 साल की उम्र में रोहतक जेल से निकले, उसके बचपन का प्यार तब भी उसका इंतजार कर रही थी। आमिर ने दिल्ली और गाजियाबाद की जेलों में भी समय काटा।

बिना ज़ुर्म किये आतंकवादी बना दिए गए आमिर

बिना ज़ुर्म किये आतंकवादी बना दिए गए आमिर

आमिर 1998 में गिरफ्तार हुए। 2012 में बरी कर दिया गया। दिल्ली, रोहतक, सोनीपत और गाजियाबाद में दिसंबर 1996 और अक्टूबर 1997 के बीच 10 कम-तीव्रता वाले बम विस्फोटों में मुख्य आरोपी। सबूतों की कमी के कारण दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया। पुस्तक लिखी, "Framed as a Terrorist: My 14-year Struggle to Prove My Innocence"

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+