Munawwar Rana: 'तहजीब के शहर' से दुनिया को अलविदा कहने वाले शायर, 'माशूका' से ज्यादा 'मां' को किया याद

मुनव्वरा राणा (Munawwar Rana) का नाम भारत के उन दिग्गज शायरों में शामिल है, जिन्हें शायरी सिर्फ प्रेम कविताओं तक ही सीमित नहीं रखा। बल्कि अपने गीत, गजलों के माध्यम से शायरी की एक नई पहचान साहित्य प्रेमियों को सामने प्रस्तुत की। शायर मुनव्वर राणा साहित्य से जुड़ाव रखने वाले लोगों को दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे। दरअसल, राणा की गिनती उन शायरों में होती हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी को मर्यादित शब्दों तक सीमित रखा, और यही वजह है कि उनकी लिखे गीत, गजलें सभी वर्गों लोगों को पंसद हैं।

शायरी में प्रेमिका, पत्नी से ज्यादा मां को महत्व
मुनव्वर राना एक ऐसे शायर हैं, जिन्होंने अपने गीत- गजलों में रिश्तों और संबंधों को सबसे अधिक प्राथमिकता पर रखा। मुनव्वर राना ने अपने जीवन में कई गीत और गजलें लिखीं। राना ने मां, पिता, बेटा, बेटी, बहन और दोस्ती पर खूब शेर लिखे। उनकी मां पर लिखी गई गजल काफी फेमस हुई। गीत-गजलों पर उनका एक संग्रह 'मां' वर्ष 2015 में प्रकाशित किया गया। जिनमें अधिकतर पत्नी पत्नी या फिर प्रेमी प्रमिका के प्रेम से हटकर थीं। राणा के सबसे प्रसिद्ध कविता 'मां' थी। इसमें मुनव्वर ने इसमें गजल शैली का इस्तेमाल किया था।

Munawwar Rana Indian poet says goodbye

गजल 'मां' की कुछ लाइनें इस प्रकार हैं-

कुछ नहीं होगा तो आंचल में छुपा लेगी मुझे
मां कभी सर पे खुली छत नहीं रहने देगी
_

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है
-

मेरी ख्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं,
मां से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊं.......

राणा की कविताओं का बांग्ला में भी अनुवाद
जबरदस्त मां के अलावा उन्होंने 'मुहजिरनामा', 'घर अकेला हो गया' और 'पीपल छांव' शीर्षक से कविताएं लिखीं। उनकी पुस्तक शाहदाबा को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें अमीर खुसरो पुरस्कार, मीर तकी मीर पुरस्कार, गालिब पुरस्कार, डॉ. जाकिर हुसैन पुरस्कार और सरस्वती समाज पुरस्कार मिल चुके हैं। राणा की कविताओं का हिंदी, उर्दू, गुरुमुखी और बांग्ला में भी अनुवाद और प्रकाशन किया गया।

फिल्म और टेलिविजन के लिए भी किया काम
कवि रूप में काम के अलावा, राणा ने फिल्म और टेलीविजन के लिए गीतकार के रूप में भी काम किया है। उन्होंने कई लोकप्रिय फिल्मों और टीवी शो के लिए गीत लिखे हैं। राणा के गीत उनकी भावनात्मक गहराई और शक्तिशाली प्रभाव के लिए जाने जाते हैं।

मूल नाम सय्यैद मुनव्वर अली
राणा साहब हिंदी और उर्दू दोनों में लिखते थे। वे मुशायरों और कवि सम्मेलनों की शान हुआ करते थे। उनका जन्म 26 नवंबर 1952 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली में हुआ था। उनका मूल नाम सय्यैद मुनव्वर अली है।

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