कस्टडी में मौत: कैमरे पर कबूलनामे के बाद मुंबई पुलिस बोली- नहीं मिला पूर्व DCP के खिलाफ सबूत
मुंबई। मुंबई पुलिस द्वारा एक कस्टोडियल डेथ के लगभग 30 साल बाद एक रिटायर डीसीपी को हिरासत में हुई एक हत्या का विवरण खोलते हुए कैमरे पर कैद इसमें वो खुद की बता रहे हैं कि किस तरह से उन्होंने इस हादसे को खुदकुशी बताते हुए खुद को बचा लिया था। यह वीडियो क्लिप हाल ही में मुंबई पुलिस को एक बिजनेसमैन राजेंद्र ठक्कर ने सौंपी है। सेवानिवृत्त डीसीपी इस बिजनेसमैन के कार्यालय में इसका खुलासा करते हुए नजर आ रहे हैं। लेकिन अब मुंबई पुलिस ने कहा कि रिटायर डीसीपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं है।

फिलहाल पुलिस ने इस मामले को वर्ली पुलिस स्टेशन को सौंप दिया है। क्योंकि यह मामला इसी अधिकार क्षेत्र के तहत आता है। पुलिस ने ठक्कर को पूछताछ के लिए बुलाया था, ठक्कर ने एक रिट याचिका दायर की और बॉम्बे हाईकोर्ट के समझ सोनवणे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। सोनवणे जो कि कथित तौर पर घटना के दौरान वर्ली पुलिस स्टेशन में निरीक्षक थे, ने दावा किया है कि वह एक कहानी बना रहे थे और उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है।
जो वीडियो पुलिस को सौंपा गया है उसमें सोनवणे ये बताते हुए नजर आ रहे हैं कि किस तरह से रत्तू गोसावी को 1 मई, 1990 को गिरफ्तार किया गया था। साथ में यह बता रहे है कि वह काफी समय से उसे पकड़ना चाहते थे। उसके खिलाफ 27 मामले थे, वह वर्ली से था मैंने उसके अंडकोष में जोर से मारा। सोनवणे ने कहा कि मैं जब भी किसी आरोपी पकड़ता था तो पहले उसे कुत्ते की तरह मारता था। इसके बाद उसे एसीपी ने कुछ समय बाद बताया कि गोसावी की मौत हो गई। साथ में यह भी बताया कि आखिर किस तरह से उन्होंने इस केस को एक घटना करार दिया।
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