मुंबई: कोरोना मरीज मिलने से चॉल में रहने वालों में खौफ, संक्रमित के परिवार को भी जांच में आ रही दिक्कत
नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई भारत का सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित शहर है। महाराष्ट्र में 17 हजार से ज्यादा तो अकेले मुंबई में 11 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए हैं। शहर में एक बड़ी आबादी चॉल और झुग्गियों में रहती है। इससे भी परेशानियां बढ़ रही हैं। चॉल में बहुत छोटे घरों में परिवार रहते हैं, कई-कई परिवार बाथरूम और टॉयलेट साझा करते हैं। ऐसे में यहां रहने वाले परिवारों को होम क्वारंटीन में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं टेस्ट ना किए जाने, या देर किए जाने की शिकायत भी लोगों की है।

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इंडिया टुडे ने वकोला पाइपलाइन सांताक्रूज ईस्ट इलाके के सुहागम सिंह चॉल में एक कोरोना मरीज के परिवार को लेकर रिपोर्ट की है। यहां रहने वाले 55 साल के बब्बन का 6 मई को निधन हो गया था। उनकी बेटी ने बताया कि वो एक क्लीनिक में क्लीनर के रूप में काम करते थे। कई दिन बुखार आने और हालत बिगड़ने पर 3 मई को उन्हें भाभा अस्पताल ले गए। 5 मई को उनके कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई और 6 मई को उनकी मौत हो गई।
परिवार ने बताया कि जिस दिन उनके पिता का निधन हुआ, उस दिन भी हम 3 से 4 घंटे तक अस्पताल में अपना टेस्ट कराने के लिए लाइन में खड़े रहे फिर दूसरे अस्पताल जाने को कह दिया गया लेकिनएम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई जिसके बाद हम घर लौट आए। परिवार को क्वारनटीन करने के लिए कोई नहीं पहुंचा। 7 मई को पूरा परिवार कूपर अस्पताल गया लेकिन छह में से केवल पांच का ही टेस्ट किया गया। जांच के बाद चार दिन में रिपोर्ट आने की जानकारी देकर हमें घर जाने को कह दिया गया है।
वो बताती हैं कि चॉल में करीब 2000 लोग रहते हैं और सब सार्वजनिक टॉयलेट का उपयोग करते हैं। पूरा मोहल्ला कोरोना के खौफ में है लेकिन हम क्या कर सकते हैं। ना बीएमसी मदद कर रही है और ना पुलिस। बता दें कि मुंबई में धारावी में लगातार कोरोना के केस सामने आए हैं। वहीं वर्ली इलाके की बीडीडी चॉल इमारतों में भी कई कोरोना पॉजिटिव मरीज मिल चुके हैं।












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