अंबानी के घर के बाहर विस्‍फोटक बरामद होने के केस में NIA ने की सचिन वजे से पूछताछ

मुंबई। मुकेश अंबानी के घर के पास खड़ी एसयूवी कार से विस्‍फोटक बरामद होने के संबंध में मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वजे से एनआईए ने आज पूछताछ की। एनआईए ने उनसे ये पूछताछ बिजनेसमैन मनसुख हिरेन की मौत और अंबानी के घर के बाहर मिले विस्‍फोटक के मामले में कर रही है। वहीं सचिन विज पर यह भी आरोप है कि अंबानी के घर के बाहर जो एसयूवी बरामद हुई थी उसका उपयोग सचिन वजे ने नवंबर 2020 और 5 फरवरी 2021 के बीच किया था। इस पूछताछ से पहले ही वाजे ने गिरफ्तारी से बचने के लिए ठाणे सेशंस कोर्ट में एंटीसिपेटरी बेल एप्लीकेशन दायर की थी। जानकारी के मुताबिक ये एप्‍लीकेशन उन्होंने कल यानी 12 मार्च को दायर की थी। लेकिन कोर्ट की तरफ से गिरफ्तारी को लेकर कोई राहत नहीं दी गई है।

अंबानी के घर के बाहर विस्‍फोटक बरामद होने के केस में NIA ने की सचिन वजे से पूछताछ

आपको बता दें कि 25 फरवरी को मुकेश अंबानी के आवास के पास जिलेटिन की छड़ें वाली एक एसयूवी कार खड़ी मिली थी। जांच में पता चना कि यह कार ऑटो पार्टस व्‍यवसायी मनसुख हिरने के पास थी। उसके बाद 5 मार्च को मनसुख की लाश मुंबई के बाहर एक खाई से बरामद की गई। पुलिस को मनसुख कर पत्‍नी विमला ने कहा कि उन्‍हें सचिन वजे पर शक है जो कथित तौर पर उनके पति को गिरफ्तार होने के लिए मजबूर कर रहे थे। विमला ने अधिकारियों को बताया कि ये एसयूवी पीटर न्‍यूटन का था जो उनके पति को जानते थे। तीन साल पहले ये कार उनके पति के कब्‍जे में थी। विमला ने बताया कि मनसुख सचिन को बहुत अच्‍छी तरह से जानते थे। मनसुख ने सचिन को नवंबर 2020 में एसयूवी दिया था उसके बाद 5 फरवरी को वजे के ड्राइवर ने 5 फरवरी, 2021 को ठाणे में हिरेन की दुकान पर गाड़ी लाकर छोड़ दी थी।

सचिन वजे ने Whatsapp पर लगाया स्‍टेटस- दुनिया को अलविदा कहने का वक्त आ गया है

मनसुख केस में नाम आने के बाद मुंबई पुलिस में असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वजे ने अपना व्‍हाट्सऐप स्‍टेटस में लिखा है दुनिया को अलविदा कहने का वक्त आ गया है। सचिन का कहना है कि उन्‍हें झूठे केस में फंसाया जा रहा है। सचिन के स्‍टेटस के मुताबिक , 3 मार्च 2004। CID के साथी अधिकारियों ने मुझे झूठे केस में गिरफ्तार किया। यह अब तक अनिर्णायक है। इतिहास को दोहराया जा रहा है। सचिन ने लिखा मेरे साथी अधिकारी मुझे गलत तरीके से फंसा रहे हैं। उन्‍होंने आगे लिखा कि इस बार थोड़ा अलग है। क्‍योंकि तब मेरे पास 17 साल की आशा धैर्य, जीवन और सेवा भी थी। अब मेरे पास न तो 17 साल का जीवन है और न ही सेवा और न ही जीने के लिए धैर्य। मुझे लगता है कि दुनिया को अलविदा कहने का समय नजदीक आ रहा है।

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