Monsoon rainfall deficiency: आधा भारत निराश, अब बंगाल की खाड़ी से बची है आस?
मानसून ने अबतक लगभग आधे भारत को निराश किया है। देश के 716 जिलों में से आधे से ज्यादा मानसूनी बारिश की भारी कमी झेल रहे हैं। अन्य 19 फीसदी जिलों में भी मानसूनी वर्षा का अबतक अभाव ही देखा जा रहा है।
भारतीय मौसम विभाग के बुधवार के डेटा के मुताबिक पूरे देश में 1 जून से लेकर 14 जून के बीच मानसूनी बारिश में 53 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के पैटर्न पर अल-नीनो का पूरा प्रभाव नजर आने लगा है।

भारत का बड़ा हिस्सा भयंकर गर्मी की चपेट में
मसलन, पूरा महाराष्ट्र अभी तक मानसूनी बारिश की राह देख रहा है। राज्य के सभी सब-डिविजनों में 79 से 80 फीसदी तक बारिश की कमी है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, देश के बाकी हिस्सों में भी बारिश की इस कमी का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में अबतक 30 फीसदी बारिश की कमी रिकॉर्ड की गई है।
मानसून पर अल-नीनो का असर आगे भी दिखने के आसार- वैज्ञानिक
वहीं पूर्वी यूपी में 97 फीसदी, पश्चिमी यूपी में 83 फीसदी, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 73 फीसदी और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी 80 फीसदी बारिश की कमी बताई गई है। दक्षिणी-पश्चिमी मानसून पर नजर रखने वाले यूनाइडेट किंगडम स्थित रीडिंग यूनिवर्सिटी के रिसर्च साइंटिस्ट अक्षय देवरस ने टीओआई को बताया है, 'अल-नीनो के पहले शुरू होने का मतलब है कि यह पूरे मौसम में मानसून को प्रभावित करेगा।'
बंगाल की खाड़ी से बची है मौसम वैज्ञानिकों को आस
वहीं प्राइवेट वेदर फोरकास्टर स्काईमेट के प्रेसिडेंट जीपी शर्मा ने बताया है, 'बिपारजॉय चक्रवात की वजह से मानसून की शुरुआत देर हुई, लेकिन यह आगे भी कमजोर है। मानसून के एक हफ्ते और कमजोर रहने की संभावना है। जब तक बंगाल की खाड़ी के ऊपर अच्छा सिस्टम नहीं बनेगा, यह कमजोर रह सकता है।' उनके मुताबिक बिपारजॉय की वजह से होने वाली बारिश गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ के इलाकों तक ही सीमित रह सकती है।
चक्रवात बिपारजॉय की गिरफ्त से निकल चुका है मानसून
राहत की बात ये है कि भारतीय मौसम विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्रा पहले ही इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि चक्रवात बिपारजॉय अब मानसून के प्रवाह को खुद से पूरी तरह से अलग कर चुका है। इसलिए अब इस चक्रवात का आगे मानसून के प्रवाह पर किसी तरह का सकारात्मक या नकारातमक असर नहीं पड़ेगा।
इस बार एक हफ्ते देर से आया है मानसून
इससे पहले अरब सागर में अपनी मौजूदगी के चलते चक्रवात बिपारजॉय ने भारत में मानसून की शुरुआत में देरी की थी और इसकी तीव्रता को भी कम कर दिया था। इसके चलते हवा में नमी और संवहन दोनों की कमी आ गई थी, जिसके चलते पूरा मानसूनी सिस्टम गड़बड़ हो गया और केरल में एक जून के बदले 8 जून को मानसून पहुंचा पाया।
वैसे मौसम विज्ञानियों को उम्मीद है कि 18 से 21 जून के बीच मानसून के अनुकूल परिस्थियां बन सकती हैं।












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