इन राज्यों में मोदी लहर फेल, 2014 से घटकर 2019 में BJP की सीटें हुईं जीरो

नई दिल्ली- ऐसा नहीं है कि नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की चुनावी सुनामी में बीजेपी (BJP) को हर राज्य में कामयाबी ही मिली है। कुछ राज्यों में जहां 2014 के मोदी लहर में पार्टी को सीटें मिली थीं, इसबार पार्टी वहां अपना खाता भी नहीं खोल पाई है। इन राज्यों में पार्टी कई दशकों से लगातार कुछ न कुछ सीटें जीत रही थीं। हैरानी की बात तो ये है कि एक राज्य तो ऐसा है, जहां बीजेपी को 1984 में भी कामयाबी मिली थी, जब उसके सिर्फ 2 उम्मीदवार ही जीतकर संसद पहुंचे थे। लेकिन, 2019 के मोदी सुनामी के बावजूद वहां बीजेपी को बिग जीरो (0) का सामना पड़ा है।

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश

मोदी ने 23 तारीख को अपनी दूसरी और पहले से भी विराट जीत पर कहा था कि हम 'दो से दोबारा' आ गए। बीजेपी के लिए यह दो का आंकड़ा बहुत ही अहम है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) बनने के बाद 1984 के चुनाव में उसके सिर्फ 2 सांसद लोकसभा पहुंचे थे। इन दो सीटों में से 1 सीट पार्टी ने आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में ही जीती थी। 2014 के मोदी लहर में भी पार्टी को वहां में 3 सीटें मिली थी, लेकिन इसबार मोदी सुनामी आने के बावजूद वह अपनी भी सारी सीटें हार गई। 1998, 1999 और 2014 में पार्टी को आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में क्रमश: 4, 7 और 3 सीटें मिली थीं। इन तीनों चुनावों में पार्टी का चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी (TDP) के साथ गठबंधन हुआ था। लेकिन, इसबार दोनों का गठबंधन टूट गया और मोदी सुनामी में भी भाजपा का खाता नहीं खुला।

तमिलनाडु

तमिलनाडु

तमिलनाडु (Tamilnadu) में बीजेपी (BJP) का हाल इसबार 2004 और 2009 के बीजेपी-विरोधी लहर जैसा हुआ है। पार्टी को यहां एक भी सीटें नहीं मिली हैं। 2014 में उसने यहां की प्रतिष्ठित कन्याकुमारी सीट जीती थी। पार्टी ने यहां आजादी के 47 साल बाद पहली सफलता 1998 में पाई थी, जब उसे तमिलनाडु (Tamilnadu) में 3 सीटें मिली थीं। एक साल बाद उसने अपना प्रदर्शन और बेहतर करते हुए 4 सीटें जीत ली थी। दोनों बार वहां पार्टी ने एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ तालमेल किया था। यह तालमेल इसबार भी हुआ था, लेकिन 39 सीटों में से एक भी सीट नहीं जीत पाई।

केरल में इसबार भी नहीं खुला खाता

केरल में इसबार भी नहीं खुला खाता

भारत में आम चुनावों की शुरुआत के 68 सालों बाद भी भाजपा केरल (Kerala) में लोकसभा का अपना खाता नहीं खोल सकी है और इसबार भी तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी सफलता सिफर रही। हकीकत ये है कि वहां आरएसएस (RSS) की दशकों से मौजूदगी के बावजूद भी पार्टी अपने वोट शेयर को लोकसभा में एंट्री लायक बदलने में नाकाम रही है। इसबार पार्टी कम से कम 1 सीट जीतने की उम्मीद लेकर चली थी, लेकिन उसे फिर शून्य का ही सामना करना पड़ा। 2014 के चुनाव में तिरुवनंतपुरम सीट पर बीजेपी के प्रत्याशी ओ राजगोपाल 32% वोट हासिल करने में तो सफल हो गए, लेकिन 34% वोट लाने वाले कांग्रेस के उम्मीदवार शशि थरूर से पिछड़ गए। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को वहां सफलता जरूर मिली थी और पार्टी ने 1 सीट जीतने में कामयाबी पाई थी।

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