2019 का पूरा आंकड़ा बदल सकता है ये Mega Survey,अप्रैल से शुरू होगा काम
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नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार एक बड़ा सर्वे कराने जा रही है। सर्वे का कार्य अप्रैल के पहले हफ्ते से शुरू किया जाएगा। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सर्वे का मकसद जॉब क्रिएशन/रोजगार सृजन से जुड़ा डेटा कलेक्ट करना है। सर्वे में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम उद्यमों में पैदा हुए रोजगार पर फोकस होगा और सबसे ज्यादा फोकस होगा, उन उद्यमों पर जिनमें 10 से कम लोग कार्यरत हैं। जानकारी के मुताबिक, सर्वे का काम पूरा होने में करीब 1 साल का वक्त लगेगा। मतलब सरकार अगले लोकसभा चुनाव में इस सर्वे को बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेगी।

सर्वे में असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों पर होगा पूरा फोकस
सातवीं तिमाही के एम्प्लॉयमेंट सर्वे के मुताबिक, जुलाई-अक्टूबर के बीच 1.36 लाख जॉब्स क्रिएट हुए। इनमें 81 प्रतिशत संगठित क्षेत्र में सृजित हुए रोजगार शामिल हैं। 2013-14 के इकनॉमिक सेंसियस के मुताबिक, देशभर में कुल 13 करोड़ नौकरीपेशा हैं। इनमें से करीब 2.4 तो संगठित क्षेत्र में ही काम करते हैं, जहां 10 से ज्यादा कर्मचारी कार्य करते हैं। संगठित क्षेत्र में कार्यरत लोगों की बात छोड़ दें तो भी 10 करोड़ से ज्यादा लोग अब असंगठित क्षेत्र में ही रोजगार चला रहे हैं। ऐसे में सरकार इस सर्वे में असंगठित क्षेत्र में रोजगार पाने वालों पर ज्यादा फोकस कर रही है।

एसपी मुखर्जी बनाए गए हैं सर्वे कमेटी के अध्यक्ष
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, श्रम मंत्रालय के तहत आने वाले लेबर ब्यूरो को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे एरिया के हिसाब से सर्वे कराएं और उन उद्यमों पर ज्यादा ध्यान दें, जहां 10 से कम लोग कार्य करते हैं। सर्वे कराने के लिए कलकत्ता यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एसपी मुखर्जी के नेतृत्व में एक हाई-लेवल कमेठी गठित की गई है। इसमें एसपी मुखर्जी के अलावा 7 अन्य सदस्य भी शामिल रहेंगे। इस कमेटी की 26 मार्च यानी आज एक मीटिंग रखी गई है, जिसमें इस बात पर चर्चा की जाएगी कि सर्वे में क्या सवाल पूछे जाने हैं। अफसरों को किस तरह से ट्रेनिंग दी जाएगी। सर्वे को कैसे अंजाम दिया जाएगा।

श्रम मंत्रालय ने सर्वे के लिए जारी किया 27 करोड़ का बजट
श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह एक बड़ा ऑपरेशन होगा। पहले फेज में कम से कम एक उद्यमों को कवर किया जाएगा। इस सर्वे के लिए श्रम मंत्रालय ने करीब 27 करोड़ बजट किया है। अधिकारी ने कहा कि हमारे देश में एक बड़ा तबका ऐसा है, जो उन उद्यमों में कार्य कर रहा है, जहां 10 से कम लोग कार्यरत हैं। ऐसे ज्यादातर उद्यमों को सर्वे में कवर नहीं किया जाता है। इस लिहाज से अगर कहा जाए कि करीब 80 प्रतिशत लोगों को कवर ही नहीं किया जा रहा है।

क्या रोजगार सृजन के आंकड़ों का जनता पर होगा असर?
पिछले काफी समय से मोदी सरकार से रोजगार सृजन को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने टीवी इंटरव्यूज में इस सवाल का जवाब दिया था। ऐसे में केंद्र की ओर से रोजगार सृजन को लेकर नया सर्वे कराने के ऐलान से बीजेपी के नेताओं ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन विपक्ष का ध्यान इस बात पर है कि इस सर्वे में कौन-कौन से क्षेत्रों को शामिल किया गया है। पिछली सरकारों को भी रोजगार के सवाल पर घेरा जाता रहा है। अब इस सर्वे में कैसे आंकड़े निकलकर आते हैं? बीजेपी चुनाव में उन्हें कैसे इस्तेमाल करती है? विपक्ष सर्वे पर किस प्रकार से सवाल उठाएगा? यह सर्वे का क्या वाकई जनमानस पर कोई असर होगा? यह तो भविष्य ही बताएगा?












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