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हरियाणा में नहीं चला 'मोदी मैजिक' आत्मविश्‍वास में डूबी भाजपा की बढ़ी सिरदर्दी

महाराष्‍ट्र और हरियाणा राज्यों के चुनाव परिणाम ने आत्मविश्‍वास में डूबी भाजपा की अगले विधानसभा चुनावों को लेकर सिददर्दी बढ़ा दी है।

बेंगलुरु। हरियाणा विधानसभा चुनाव में '75 पार'का लक्ष्य लेकर चली लेकिन हरियाणा भाजपा 40 का आंकड़ा भी बड़ी मुश्किल से छू पाई। लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी मैजिक ने हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी को रिकार्ड जीत दिलावाई वहीं महज पांच माह बाद हुए इस विधान सभा चुनाव में मोदी मैजिक काम नहीं किया। हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणाम ने मोदी मैजिक के सहारे चुनाव लड़ सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को झकझोर कर रख दिया है। हरियाणा ही नहीं महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा महज चार महीने पहले लोकसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत का माहौल बरकरार रखने में बुरी तरह नाकाम रही।

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हरियाणा में भाजपा विपक्ष के बुरी तरह बंटे होने के बावजूद स्थिति का लाभ नहीं उठा पाई। चुनाव में अत्‍यधिक आत्मविश्वास से लबरेज भाजपा की चुनावी गाड़ी हरियाणा में बहुमत के करीब आ कर रुक गई तो महाराष्ट्र में शिवसेना का साथ भी मामूली बहुमत ही दिला पाई। हरियाणा में चौटाला परिवार की राजनीतिक विरासत के दो हिस्सों में बंट जाने और कांग्रेस में चरम पर गुटबाजी के पहुंचने के बाद भी भाजपा इस राज्य में अपना पुराना प्रदर्शन भी नहीं दुहरा पाई। राज्य में विपक्ष के हक में बने जाट-दलित और मुस्लिम समीकरण ने भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर दिया। आलम ये हो गया कि चुनाव परिणाम ने हरियाणा में भाजपा की किस्मत निर्दलीय विधायकों के रहमोकरम पर निर्धारित हो रही है। महाराष्‍ट्र और हरियाणा राज्यों के चुनाव परिणाम ने आत्मविश्‍वास में डूबी भाजपा की अगले विधानसभा चुनावों को लेकर सिददर्दी बढ़ा दी है।

लोकसभा चुनाव में 90 में से 89 सीटों पर मिली थी जीत

लोकसभा चुनाव में 90 में से 89 सीटों पर मिली थी जीत

पांच माह पूर्व हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां न सिर्फ विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था, बल्कि विधानसभा की 90 में से 89 सीटें हासिल की थी। लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद हरियाणा भाजपा बहुत उत्साहित थी। लोकसभा चुनाव के दौरान कुल 90 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 79 हलकों में बढ़त हासिल की थी। इसी को देखते हुए भाजपा अध्‍यक्ष अमित शाह ने इस विधानसभा चुनाव के लिए ‘मिशन 75 पार'का टारगेट सेट किया था। इस लक्ष्य को प्राप्त कर लोकसभा की तरह विधानसभा चुनाव में भी रिकार्ड जीत हासिल करना टीम मनोहर के लिए न केवल बड़ी चुनौती थी, बल्कि भाजपा की जीत दिलाकर सीएम मनोहर लाल को पीएम मोदी और शाह की उम्मीदों पर भी खरा उतरना था। इस मिशन के लिए हरियाणा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, सन्नी दओल, राजनाथ, नितिन गडकरी जैसे बड़े चेहरों समेत 40 स्टार प्रचारकों ने अपनी ताकत झोंकी थी।

मोदी और शाह की रैलियों का असर

मोदी और शाह की रैलियों का असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बल्लभगढ़ में रैली की थी वहां भाजपा जीती, लेकिन दादरी में आजाद प्रत्याशी जीता। इसी तरह ऐलनाबाद में भी पीएम के प्रयास विफल रहे और वहां इनेलो जीती। रेवाड़ी में मोदी ने हुंकार भरी, लेकिन वहां कांग्रेस जीती, कुरुक्षेत्र में मोदी का प्रभाव दिखा। थानेसर समेत आसपास की कई सीटें भाजपा के खाते में आई। गोहाना में मोदी गए लेकिन जीत कांग्रेस के खाते में गई। हिसार में पीएम मोदी की रैली हुई, वहां बीजेपी को जीत हासिल हुई। इसी तरह गृहमंत्री अमित शाह कैथल, लोहारू और पानीपत में रैलियां की। इन सभी सीटों पर भाजपा को जीत मिली। मगर महम और बहादुरगढ़ में अमित शाह के प्रयास विफल रहे। टोहाना, रतिया और नरवाना में अमित शाह की रैलियां रद्द हो गई थी। इन तीनों सीटों में से भाजपा को सिर्फ रतिया में ही जीत मिली। टोहाना ने भाजपा के अध्यक्ष सुभाष बराला तक हार गए।

जनता का नहीं मिला आर्शीवाद

जनता का नहीं मिला आर्शीवाद

भाजपा को लग रहा था कि आक्रामक चुनाव प्रचार के चलते मिशन 75 पार को आसानी हासिल कर लिया जाएगा। स्टार प्रचारकों में दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 4 और अमित शाह की 8 रैलियां प्रस्तावित थी। परिस्थितियों को भांपते हुए अचानक पीएम मोदी की 3 और रैलियां बढ़ा दी गई। जबकि अमित शाह की 3 रैलियां उनके अस्वस्थ होने की वजह से रद्द करनी पड़ी। अंतिम दौर में तो भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार को पूरी तरह से आक्रामक बना दिया था। लेकिन गुरुवार को जब नतीजे सामने आए, तो बड़ा उलटफेर हो गया।। इसके बावजूद हरियाणा में भाजपा ‘मनोहर'जीत से दूर ही रही।सीएम मनोहर लाल ने चुनाव प्रचार की शुरूआत अपनी ‘जन आशीर्वाद'यात्रा से की। मनोहर लाल ने हाथ में हलकावार विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड ले सभी 90 हलकों को नापा और चुनावी हुंकार भरी। टिकट वितरण में भी पूरी तरह से सीएम मनोहर लाल की ही चली। इस दौरान दो मंत्रियों समेत ग्यारह मौजूदा विधायकों की टिकट भी काटी गई और कई नए चेहरों को मैदान में उतारा गया था।

कांग्रेस ने किया कमाल

कांग्रेस ने किया कमाल

कांग्रेस की ओर से बड़े स्टार प्रचारक प्रचार राहुल गांधी ही रहे। सोनिया व प्रियंका गांधी की खराब तबियत के कारण प्रचार के लिए हरियाणा नहीं आ पाई। राहुल गांधी ने नूहं और महेंद्रगढ़ में दो बड़ी रैलियां की और दोनों जगह कांग्रेस जीती। जबकि इन रैलियों का प्रभाव आसपास की सीटों पर भी देखने को मिला। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, वीरेंद्र सहवाग ने भी हरियाणा के रण में कांग्रेस की जीत के लिए पसीना बहाया।

वही हरियाणा विधानसभा चुनाव में अंतिम समय में चुनाव की कांग्रेस की कमान संभालने वाले पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सबको चौंकने पर मजबूर कर दिया। अपने दम पर कांग्रेस को 30 से अधिक सीटें दिला कर हुड्डा ने भाजपा को अपने दम पर बहुमत हासिल करने से रोक दिया। हुड्डा ने ऐसे समय कारनाम दिखाया जब खुद पार्टी नेतृत्व को राज्य में भाजपा के विजय रथ को रोकने का भरोसा नहीं था।

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