मोदी सरकार का संसद में बयान, ताजमहल कभी भी मंदिर नहीं था
नई दिल्ली। ताज महल को लेकर चल रहे विवाद पर केंद्र सरकार ने संसद में अहम बयान दिया है। केंद्र ने संसद में ताजमहल को किसी भी समय में मंदिर होने के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि ऐसा कोई भी साक्ष्य मौजूद नहीं है जो इसकी पुष्टि करे कि ताजमहल किसी भी दौर में मंदिर था। सदन में एआईएडीएमके के सांसद बी. सेनगुट्टुवन के सवाल के जवाब में महेश शर्मा ने यह बयान दिया।
दरअसल काफी समय से कुछ हिंदू संगठन ताज महल को हिंदू मंदिर होने का दावा करते रहे हैं और तमाम रोकटोक के बाद भी इसकी पूजा भी गुपचुप तरीके से करते रहे हैं।
आगरा में कुछ वकीलों ने भी एक याचिका दायर करके दावा किया कि ताजमहल पहले मंदिर था। लिहाजा इसका मालिकाना हक हिंदुओं को दिया जाए। यही नहीं याचिक में मुसलमानों को यहां नमाज नहीं अदा करने की भी मांग की थी।
आपको बता दें कि पूर्व में एएशआई भी इस तरह के दावे को सिरे से खारिज कर चुकी है। एएसआई का कहना है कि ताजमहल के स्थान पर कभी भी मंदिर नहीं था।












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