संसद सत्र में काम करने का मोदी सरकार ने तोड़ा 30 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली। यूं तो सामान्य तौर पर भारतीय संसद शोर-शराबे के लिए अक्सर चर्चा में रहती है बजाए काम के। दुनिया से सबसे बड़े लोकतंत्र में संसद की कार्यवाही अक्सर बाधित होती रहती है लेकिन आपको यह सुनकर आश्यर्च होगा कि पिछले कई सालों में इस बार का संसद सत्र सबसे ज्यादा उत्पादक साबित हुआ है।

इस बार चार महीनें के संसद सत्र के आंकड़ों पर नजर डालें तो लोकसभा में कामों की रफ्तार काफी बढ़ी है। काम करने के घंटों में 123 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले 15 सालों में लोकसभा सत्र में इस बार सबसे ज्यादा काम हुए हैं। यही नहीं इस बार लोकसभा के सत्र को 3 दिनों के लिए बढ़ाया भी गया था।

हालांकि राज्यसभा की काम की रफ्तार लोकसभा से कम रही

एक तरफ जहां लोकसभा ने काम की रफ्तार को काफी बढ़ाया है वहीं राज्यसभा में पिछली बार की तुलना में रफ्तार में काफी इजापा नहीं हुआ है। राज्यसभा में कार्य उत्पादकता 101 फीसदी दर्ज की गयी है।

वहीं संसद के शोध अधिकारी चाक्षु रॉय ने बताया कि इस बार सत्र के दौरान व्यापार, राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर काफी काम हुआ है। उन्होंने बताया कि दोनों सदन इस बार काफी लंबे समय के लिए मिले जिसके चलते कार्य की उत्पादकता में इजाफा हुआ है।

लोकसभा में अहम मुद्दों पर हुई सबसे ज्यादा चर्चा

इस बार सत्र के दौरान सरकार ने अपना पहला पूर्ण बजट प्रस्तुत किया था। लोकसभा में संसद की वेबसाईट के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार किसानों से जुड़े मुद्दों, फाइनेंस से जुड़े मुद्दों पर सबसे ज्यादा बहस हुई। वहीं इन विषयों पर कुल सत्र का 56 फीसदी समय खर्च हुआ।

इस लंबे और सार्थक सत्र की एक खास वजह यह भी है कि भाजपा के पास देश में 30 साल बाद इतना बहुत बहुमत है। पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 545 में से 282 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं मुख्य दल कांग्रेस महज 44 सीटों पर ही सिमट कर रह गयी थी।

लोकसभा में विपक्ष की संख्या है बड़ा कारण

लोकसभा के सत्र के सार्थक होने की बड़ी वजह सदन में विपक्षा की संख्या का काफी कम होना भी है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा पिछली सरकारों की तुलना में आम सहमति बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है जिसके चलते सदन का कार्यवाही काफी सार्थक हो सकी है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुनील कुमार का कहना है कि भाजपा विपक्ष के साथ मिलकर काम करने की इच्छुक है। उन्होंने कहा कि सरकार विवादित और गैरविवादित सभी मुद्दों पर आम सहमति के साथ आगे बढ़ने पर काम कर रही है।

आर्थिक स्तर पर देश तेजी से बढ़ रहा आगे

वहीं सदन की कार्यवही में उत्पादकता बढ़ने की एक और वजह यह भी है कि सरकार आर्थिक स्तर पर देश को मजबूती देने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। वरिष्ठ प्रोफेसर आशुतोष सक्सेना का कहना है कि सामान्य रुप से बजट सत्र के दौरान विपक्ष सदन की कार्यवाही में व्यवधान नहीं डालता है क्योंकि इसमें अहम आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है।

कांग्रेस सरकार के आंकड़े कहीं ज्यादा निराशाजनक

अगर पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो मोदी सरकार के पहले बजट की उत्पादकता 103 फीसदी रही थी जबकि मानसून सत्र की उत्पादकता 98 फीसदी दर्ज की गयी थी। वहीं पिछली सरकार के बजट सत्र पर नजर डालें तो यह सिर्फ 49 फीसदी जबकि मानसून सत्र की उत्पादकता 58 फीसदी रही थी। वहीं शीतकालीन सत्र की उत्पादकता महज 15 फीसदी रही थी।

राज्यसभा में अभी भी है सरकार के लिए मुश्किल

मोदी सरकार के दौरान कुल 16 विधेयकों को दोनों सदनों में पास किया गया। इस सत्र के दौरान अलग से 20 नये विधेयक पेश किये गये थे जिसमें से 19 लोकसभा में पेश किये गये। लेकिन जिस तरह से लोकसभा में मोदी सरकार को काफी आसानी से काम करने का मौका मिल रहा है वहीं राज्यसभा में सरकार के लिए भी भी मुश्किल खड़ी है। राज्यसभा में कांग्रेस के पास 250 में से 68 सीटें हैं जबकि भाजपा के पास सिर्फ 47 सीटें हैं।

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