नई शिक्षा नीति पर भड़की मनसे, दे डाली खुली धमकी
नई दिल्ली। नई शिक्षा नीति के प्रस्ताव को लेकर लगातार रार बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी अब इस विवाद पर खुली चेतावनी दी है। मनसे ने इस मामले पर खुली चेतावनी देते हुए कहा कि हिंदी हमारी मातृ भाषा नहीं है, इसे हमपर थोपकर हमे उकसाएं नहीं। मनसे के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पार्टी के प्रवक्ता अनिल शिदोरे ने कहा कि हिंदी को हमपर थोपे नहीं। बता दें कि शुक्रवार को नई शिक्षा नीति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया, दक्षिण भारत के लोग सरकार की इस नई प्रस्तावित शिक्षा नीति का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। तमिलनाडु ने इस शिक्षा नीति का विरोध करते हुए कहा कि हमपर हिंदी भाषा को थोपने की कोशिश हो रही है, जिसके बाद केंद्र सरकार को इस मामले में सफाई देनी पड़ी कि उसका आशय कतई किसी भाषा को किसी पर थोपना नहीं है।

सरकार की सफाई
सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि इस नीति को लेकर सिर्फ रिपोर्ट दाखिल की गई है। सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। इसपर अभी तक कोई विचार भी नहीं किया गया है, लिहाजा लोगों के बीच इस तरह की गलतफहमी है कि सरकार ने इस नई शिक्षा नीति को लागू करने का फैसला ले लिया है। जावड़ेकर ने कहा कि हम लोगों की राय लेने के बाद ही इस नई नीति को लेकर लोगों के सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार हमेशा से ही भारततीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने का काम करती है, लिहाजा इस तरह की बात ही नहीं उठती है कि सरकार लोगों पर किसी भाषा को थोपना चाहती है। हम सभी भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

कमेटी ने दिया सुझाव
बता दें कि इसरो के चीफ डॉक्टर के कस्तूरीरंजन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इस बात का सुझाव दिया था कि हिंदी और अग्रेजी भाषा के साथ किसी एक क्षेत्रीय भाषा को पढ़ाया जाना चाहिए। हिंदी भाषी राज्यों के लिए कमेटी ने हिंदी अंग्रेजी के साथ किसी तीसरी भाषा को पढ़ाए जाने का सुझाव दिया है। तमिल भाषा को क्लासिकल भाषा की श्रेणी में रखा जाए। इस पूरे विवाद पर शिक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करके सफाई दी है कि नई शिक्षा नीति सिर्फ एक ड्राफ्ट है इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है, हम लोगों से इस बारे में सुझाव ले रहे हैं।

वरिष्ठ मंत्रियों ने किया बचाव
इस पूरे विवाद में सरकार का बचाव करने के लिए दो वरिष्ठ मंत्री सामने आए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सरकार का इस विवाद पर बचाव किया है। निर्मला सीतारण और एस जयशंकर ने ट्विटर पर तकरीबन एक जैसे ही मैसेज करके लोगों को भरोसा दिलाया है कि इस नीति को लागू करने से पहले इसकी समीक्षा की जाएगी। बता दें कि दोनों ही मंत्री तमिलनाडु से आते हैं, जहां इस शिक्षा नीति का सबसे अधिक विरोध हो रहा है। दोनों ही मंत्रियों ने यह ट्वीट तमिल भाषा में किया है। इससे पहले उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी सरकार का बचाव किया था और लोगों से अपील की थी कि वह इसे पढ़ें, इसका विश्लेषण करें, बहस करें, ऐसे ही इसे लेकर किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे।
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