Mizoram Literacy Rate: मिजोरम बना देश का पहला पूर्ण साक्षर राज्य, जानिए क्या है इसका खास एजुकेशन सिस्टम?
Mizoram Literacy Rate: भारत के उत्तर-पूर्व में बसे मिजोरम को प्रकृति ने खुलकर संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हरियाली से ढके पहाड़, स्वच्छ हवा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत ने इसे देश के सबसे शांत और सुंदर राज्यों में से एक बना दिया है।
लेकिन अब इस राज्य ने अपनी एक और पहचान गढ़ी है- भारत का पहला "100% साक्षर राज्य" बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मिजोरम की यह सफलता किसी चमत्कार से कम नहीं।

जहां देश के कई हिस्सों में अब भी साक्षरता के लिए जद्दोजहद जारी है, वहीं इस छोटे से राज्य ने शिक्षा को केवल नीति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जन-आंदोलन बना दिया।
Mizoram Literacy Rate: मिजोरम की शिक्षा में क्रांति
21 मई 2025, मिजोरम के इतिहास में एक स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने वाला दिन बन गया, जब मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मिजोरम विश्वविद्यालय (MZU) के एक भव्य समारोह में इस उपलब्धि की घोषणा की।
वर्ष 2011 की जनगणना में मिजोरम देश में साक्षरता दर के मामले में तीसरे स्थान पर था। केरल और त्रिपुरा उस समय उससे आगे थे। लेकिन बीते 14 वर्षों में मिजोरम ने एक सतत, योजनाबद्ध और समर्पित प्रयास के बल पर इस अंतर को समाप्त किया और आज वह देश के सबसे अधिक पढ़े-लिखे नागरिकों वाला राज्य बन गया है।
2023-24 की पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार:
- पुरुषों की साक्षरता दर: 99.2%
- महिलाओं की साक्षरता दर: 97%
इन आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया कि मिजोरम न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक संदर्भ में भी एक अत्यंत उच्च साक्षरता दर वाला राज्य बन चुका है।
Mizoram ने कैसे हासिल की यह अभूतपूर्व उपलब्धि?
1. ULLAS योजना का प्रभावी क्रियान्वयन
मिजोरम में ULLAS (Understanding Lifelong Learning for All in Society) योजना को अत्यधिक कुशलता से लागू किया गया। यह योजना विशेष रूप से उन वयस्कों को लक्षित करती है जो कभी स्कूल नहीं गए या समय से पहले पढ़ाई छोड़ दी थी।
इस योजना के प्रमुख उद्देश्य थे:
- आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता
- डिजिटल साक्षरता
- जीवन कौशल
- सतत शिक्षा का प्रसार
2. निरक्षरों की पहचान और अभियान
2011 की जनगणना के आधार पर राज्य में 3,026 निरक्षरों की पहचान की गई, जिनमें से 1,692 संभावित शिक्षार्थियों को चिन्हित कर पढ़ाने की दिशा में प्रयास किए गए।
2023 में CRCC (Cluster Resource Centre Coordinators) की मदद से घर-घर सर्वेक्षण किया गया, जिसमें शेष निरक्षर लोगों की भी पहचान की गई।
स्वयंसेवकों का समर्पण
मिजोरम में साक्षरता की इस क्रांति के पीछे 292 स्वयंसेवी शिक्षक थे। इनमें छात्रों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। शिक्षण कक्षाएं स्कूलों, समुदाय भवनों, चर्च हॉल्स, YMA पुस्तकालयों और कई बार तो घरों में भी आयोजित की गईं। यह एक प्रकार का जन-आंदोलन बन गया, जिसमें प्रत्येक मिजो नागरिक ने भागीदारी की।
समुदाय और संस्कृति का योगदान
मिजोरम की सबसे बड़ी ताकत रही है - उसकी सामूहिक चेतना और शिक्षा को लेकर सजगता। इस उपलब्धि में केवल सरकार की नहीं, बल्कि चर्च, स्थानीय NGOs और 'यंग मिजो एसोसिएशन' (YMA) जैसी संस्थाओं की भी बड़ी भूमिका रही।
चर्चों ने अपने स्थान शिक्षण केंद्रों के लिए खोले, जबकि YMA ने अभियान चलाकर युवाओं को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। दूर-दराज के सीमावर्ती जिलों तक भी यह अभियान पहुंचाया गया।
Mizoram Literacy Rate बना भारत के लिए प्रेरणा
मिजोरम का उदाहरण साबित करता है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामुदायिक भागीदारी और व्यवस्थित योजना के जरिए शिक्षा जैसी चुनौती को भी पार किया जा सकता है। यह एक ऐसा राज्य है, जहां शब्दों से ज्यादा काम ने अपना पर्फेक्शन दिखाया। आने वाले वर्षों में मिजोरम का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक 'ब्लूप्रिंट' बन सकता है, खासकर उन राज्यों के लिए जहां साक्षरता दर अभी भी कम है।
मिजोरम ने यह दिखा दिया है कि जब समाज, सरकार और संगठन एक लक्ष्य के लिए एकजुट हो जाते हैं, तो असंभव कुछ भी नहीं। देश के अन्य राज्यों को मिजोरम की इस यात्रा से सीख लेकर शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने चाहिए।
साक्षर भारत का सपना तब ही साकार होगा, जब हर राज्य, हर गांव और हर नागरिक शिक्षित होगा मिजोरम ने यह सपना जगा दिया है। "मिजोरम की साक्षरता सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत के उज्जवल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है।"












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