ट्रेन में बच्चों को आधे किराये पर नहीं मिलेगी फुल सीट
नई दिल्ली। मोदी सरकार ने रेल किराया नहीं बढ़ाया, लेकिन उन लोगों की जेब काटने का पूरा इंतजाम कर लिया, जिनके बच्चों की उम्र 5 से 12 साल के बीच में है। जी हां अब इस आयु वर्ग के बच्चों को आधे किराये पर फुल सीट या बर्थ नहीं मिलेगी। यह नियम 1 अप्रैल 2016 से लागू हो जायेगा।

रेल मंत्रालय ने बच्चों के किराया नियम में संशोधन करने का निर्णय लिया है। संशोधित प्रावधान के अधीन 5 वर्ष और 12 वर्ष के कम आयु के उन बच्चों का पूरा व्यस्क किराया लिया जाएगा, जिनके लिए आरक्षण के समय बर्थ/सीट (आरक्षण श्रेणी) की मांग की गई है।
जो सीट की डिमांड नहीं करेंगे
यथापि 5 वर्ष और 12 वर्ष से कम आयु के जिन बच्चों के लिए आरक्षण के समय बर्थ/सीट की मांग नहीं की गई है, उनका लिया जाने वाला व्यस्क टिकट का आधा किराया, प्रभार की न्यूनतम दूरी की शर्त पर पूर्ववत् जारी रहेगा। आरक्षण फॉर्म में आवश्यक परिवर्तन किये जाएगे, ताकि यात्री बच्चों के लिए पूरी बर्थ/सीट लेने या न लेने की जरूरत का विकल्प भर सकेगा।
अनारक्षित टिकटों में बच्चों के किराये अर्थात् अनारक्षित टिकटों के लिए 5 से 12 वर्ष तक की आयु के बच्चों का किराया प्रभार की न्यूनतम दूरी की शर्त पर व्यस्क टिकट किराये का आधा किराया पूर्ववत् जारी रहेगा। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों का बिना बर्थ/सीट के कोई किराया पहले की तरह नहीं लगेगा। बच्चों के किराये का संशोधित नियम अप्रैल, 2016 से की जाने वाली यात्राओं पर लागू होगा। इस प्रावधान के शुरू होने की ठीक तारीख को बाद में अलग से अधिसूचित किया जाएगा।
इस फैसले पर वनइंडिया की राय
वनइंडिया की राय यह है कि सेकेंड क्लास, एसी3, एसी2, एसी1, आदि के शयनयान में यह नियम लागू करना जायज है, क्योंकि माता-पिता आधे किराये पर सफर कर रहे अपने बच्चों को अपने पास लिटा सकते हैं। लेकिन सेकेंड सीटर, चेयर कार या एसी-चेयर कार में वैसे ही सीट की चौड़ाई महज 1 फुट होती है, उसमें आधे किराये पर बच्चे को कैसे बिठा सकते हैं। इसलिये हमारी राय में यह नया नियम चेयरकार में लागू नहीं किया जाना चाहिये।
और अगर रेलवे आधे किराये पर बच्चों को एक फुट चौड़ी सीट नहीं दे सकता है, तो वह आधा किराया भी नहीं लिया जाना चाहिये।












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